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सचिन की फैन शेफाली ने सहवाग के अंदाज में जड़े चौके छक्के
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रोहतक की छोरी का बल्ला एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब तेज चला। इस बार यह बल्ला किसी सीरीज में नहीं, आईसीसी टी-20 महिला विश्वकप के पहले मैच में चला है। शुक्रवार को भारत ने महिला विश्वकप का पहला मुकाबला आस्ट्रेलिया के साथ खेला। इसमें 16 साल 24 दिन की सबसे छोटी उम्र की खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर की फैन शेफाली वर्मा ने विस्फोटक बल्लेबाज सहवाग के अंदाज में चौके-छक्के लगाए। उसने मात्र 15 गेंद में 5 चौकों और 1 छक्के की मदद से ताबड़तोड़ 29 रन बनाए। पूरे मैच में शेफाली वर्मा का 193.33 का स्ट्राइक रेट सबसे ज्यादा रहा। विश्वकप के पहले मुकाबले में भारत ने आस्ट्रेलिया को 17 रन से पराजित किया।
शेफाली के पिता संजीव वर्मा ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि इस जीत पर सबसे पहले तो पूरे देश को बधाई देता हूं। टीम गेम में सभी का सहयोग होता है, जिसमें शेफाली ने भी अपने बल्ले से योगदान दिया। मैच जितने के बाद पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। परिवार ने तो पूरा मैच देखा, लेकिन वह किसी जरूरी काम की वजह से बाहर गए थे। बाद में हाईलाइट में शेफाली की बैटिंग देख उनका जोश हाई हो गया। कमेंटरी में बार-बार बेटी का नाम सुनकर बहुत अच्छा लगा। भारत की टीम की अच्छी शुरुआत हुई है, जिससे उम्मीद है कि वर्ल्ड कप अपने देश में ही आएगा। शेफाली अब उनके परिवार की नहीं पूरे देश की उम्मीद है।
लॉ स्कोरिंग पिच पर सबसे तेज चला बल्ला : कोच
शेफाली वर्मा के कोच अश्विनी कुमार ने कहा कि मैच लॉ स्कोरिंग था। पिच गेंदबाजी के लिए अनुकूल थी। इस पिच पर शेफाली की बैटिंग ने टीम को शानदार शुरुआत दिलाई। टीम में एक-एक रन का योगदान होता है। जीत में शेफाली की पारी भी अहम रही है। शेफाली एक विस्फोटक बल्लेबाज है। टाइमिंग के साथ उन्होंने सभी शॉट पूरे आत्मविश्वास से खेले। खराब गेंदों का भी फायदा उठाया। उम्मीद है कि आगे के मैचों में भी उनकी शानदार बैटिंग जारी रहेगी। वैसे तो सभी खिलाड़ी बेहतरीन है, लेकिन शेफाली में क्षमता बहुत है।
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दो साल से लड़कों के साथ की नेट प्रेक्टिस
जब शेफाली ने खेलना शुरू किया तो वह छोटी उम्र में ही बहुत बढ़िया खेलती थी। साथ खेलने वाली लड़कियां बेहतर खिलाड़ी थी, लेकिन शेफाली में उनसे अधिक क्षमता थी। यह देख उन्होंने उनकी प्रेक्टिस लड़कों के साथ करवानी शुरू कर दी। दो ढाई साल से उन्होंने बल्ले का अभ्यास लड़कों की गेंदबाजी पर ही किया है। अंडर-19, अंडर-23 व रणजी खिलाड़ियों की गेंदों को उन्होंने खूब अभ्यास किया, जिस कारण ही उनका गेम सबसे अलग है।
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शेफाली के पिता संजीव वर्मा ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि इस जीत पर सबसे पहले तो पूरे देश को बधाई देता हूं। टीम गेम में सभी का सहयोग होता है, जिसमें शेफाली ने भी अपने बल्ले से योगदान दिया। मैच जितने के बाद पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। परिवार ने तो पूरा मैच देखा, लेकिन वह किसी जरूरी काम की वजह से बाहर गए थे। बाद में हाईलाइट में शेफाली की बैटिंग देख उनका जोश हाई हो गया। कमेंटरी में बार-बार बेटी का नाम सुनकर बहुत अच्छा लगा। भारत की टीम की अच्छी शुरुआत हुई है, जिससे उम्मीद है कि वर्ल्ड कप अपने देश में ही आएगा। शेफाली अब उनके परिवार की नहीं पूरे देश की उम्मीद है।
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लॉ स्कोरिंग पिच पर सबसे तेज चला बल्ला : कोच
शेफाली वर्मा के कोच अश्विनी कुमार ने कहा कि मैच लॉ स्कोरिंग था। पिच गेंदबाजी के लिए अनुकूल थी। इस पिच पर शेफाली की बैटिंग ने टीम को शानदार शुरुआत दिलाई। टीम में एक-एक रन का योगदान होता है। जीत में शेफाली की पारी भी अहम रही है। शेफाली एक विस्फोटक बल्लेबाज है। टाइमिंग के साथ उन्होंने सभी शॉट पूरे आत्मविश्वास से खेले। खराब गेंदों का भी फायदा उठाया। उम्मीद है कि आगे के मैचों में भी उनकी शानदार बैटिंग जारी रहेगी। वैसे तो सभी खिलाड़ी बेहतरीन है, लेकिन शेफाली में क्षमता बहुत है।
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दो साल से लड़कों के साथ की नेट प्रेक्टिस
जब शेफाली ने खेलना शुरू किया तो वह छोटी उम्र में ही बहुत बढ़िया खेलती थी। साथ खेलने वाली लड़कियां बेहतर खिलाड़ी थी, लेकिन शेफाली में उनसे अधिक क्षमता थी। यह देख उन्होंने उनकी प्रेक्टिस लड़कों के साथ करवानी शुरू कर दी। दो ढाई साल से उन्होंने बल्ले का अभ्यास लड़कों की गेंदबाजी पर ही किया है। अंडर-19, अंडर-23 व रणजी खिलाड़ियों की गेंदों को उन्होंने खूब अभ्यास किया, जिस कारण ही उनका गेम सबसे अलग है।