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रोहतक की हवा हुई प्रदूषित, एक्यूआई 332, सांस रोगियों की बढ़ी परेशानी
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शहर की टूटी हुईं सड़कें। डीजल वाहन। निर्माण कार्य व तेजी से बढ़ता शहरीकरण। रोहतक में हवा की सेहत बिगाड़ रहा है। सड़कों से हर समय उड़ती धूल, वाहनों का धुआं, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई व कम पौधरोपण से एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इससे सांस रोगियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं अस्थमा के मरीजों को अटैक तक आ सकता है। बुधवार को भी जिले में पीएम 2.5 (यानी हवा में सूक्ष्म धूल कणों की मात्रा) सबसे अधिक 332 एक्यूआई दर्ज किया गया। वहीं, औसतन 288 रहा। यह स्तर सामान्य से भी तीन गुणा अधिक है।
शहर में बढ़ते प्रदूषण के चार बड़े कारण
रोहतक शहर में वायु प्रदूषण के चार बड़े कारण हैं। इसमें शहरीकरण, परिवहन, जर्जर सड़कें व पेड़ों की अंधाधुंध कटाई मुख्य हैं। पर्यावरणविदों की मानें तो इन चार कारणों की वजह से ही एक्यूआई खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। अक्सर इलाके का नाम पराली जलाने से जोड़ा जाता है। जबकि इन दिनों पराली जलाने का कोई मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद एक्यूआई का बढ़ना चिंता का विषय है।
बेतहाशा दौड़ रहे ऑटो व कारें
शहर की सड़क आवागमन को सुगम बनाने के लिए हैं। जबकि हो इसका उल्टा रहा है। वाहनों की बढ़ती भीड़ ने सड़कों पर जाम सरीखे हालात पैदा कर आवागमन मुश्किल कर दिया है। यही नहीं भीड़ में खड़े वाहन लगातार धुआं छोड़ते रहते हैं। इसमें बड़ी संख्या में डीजल चलित ऑटो का बेतहाशा दौड़ने के अलावा मोटरसाइकिलों व कारों में बगैर किसी काम घूमने वाले लोग शामिल होते हैं। इससे हवा में पीएम 2.5 का स्तर बढ़ता है।
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बिजली चलित वाहनों की मंजूरी जरूरी
बदले दौर में सब कुछ बदल रहा है। तापमान बढ़ने लगा है। धरती जलने लगी है। यह सब प्रदूषण के बढ़ते स्तर से हो रहा है। इस स्तर को कम करने के लिए बिजली व सौर ऊर्जा चलित वाहनों का उपयोग बेहतर कदम है। सड़कों पर ऐसे वाहन उतारे जाएं, जिनसे प्रदूषण कम से कम हो।
मेट्रो सरीखे साधनों की जरूरत
महानगरों में प्रदूषण का स्तर कम करने व परिवहन समस्या का समाधान करने के लिए रेल व बसों के अलावा मेट्रो की व्यवस्था की गई है। यह सुविधा दूसरे बड़े शहरों में भी मुहैया कराई जानी चाहिए। इससे हर व्यक्ति को अपने वाहन लेकर नहीं चलना होगा। लोग एक ही वाहन से सुगम आवागमन कर सकेंगे। यह प्रयास प्रदूषण के स्तर को काफी हद तक कम करेगा।
शहर का एक्यूआई खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। यह चिंता का विषय है। शहरीकरण, परिवहन, टूटी सड़कें, डीजल वाहन, पेड़ों की कटाई प्रदूषण की बड़ी वजह है। इस बारे में सभी को सोचना होगा। प्रशासन को उचित कदम उठाने चाहिए। तभी इस समस्या का समाधान संभव है।
- प्रो. राजेश धनखड़, पर्यावरण विज्ञान विभाग, एमडीयू
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रदूषण जांच उपकरण एमडीयू में स्थापित है। यहां से वाहन बड़ी संख्या में जाते हैं। इसी सड़क पर बड़ी संख्या में डीजल चलित ऑटो खड़े रहते हैं। इस कारण वाहनों की संख्या ज्यादा रहती है। शायद यही वजह है कि यहां प्रदूषण का स्तर अधिक है।
- रवींद्र यादव, असिस्टेंट एनवायरमेंट इंजीनियर, क्षेत्रीय कार्यालय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बहादुरगढ़
एक्यूआई बढ़ने से सांस संबंधी समस्याएं होती है। इसमें अस्थमा के रोगियों के लिए सांस लेना मुश्किल हो जाता है। कोरोना संक्रमण काल में वायरस और प्रदूषण से बचने के लिए मास्क का हर हाल में प्रयोग करें। यह दोनों की समस्याओं से बचाएगा।
- डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन
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शहर में बढ़ते प्रदूषण के चार बड़े कारण
रोहतक शहर में वायु प्रदूषण के चार बड़े कारण हैं। इसमें शहरीकरण, परिवहन, जर्जर सड़कें व पेड़ों की अंधाधुंध कटाई मुख्य हैं। पर्यावरणविदों की मानें तो इन चार कारणों की वजह से ही एक्यूआई खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। अक्सर इलाके का नाम पराली जलाने से जोड़ा जाता है। जबकि इन दिनों पराली जलाने का कोई मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद एक्यूआई का बढ़ना चिंता का विषय है।
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बेतहाशा दौड़ रहे ऑटो व कारें
शहर की सड़क आवागमन को सुगम बनाने के लिए हैं। जबकि हो इसका उल्टा रहा है। वाहनों की बढ़ती भीड़ ने सड़कों पर जाम सरीखे हालात पैदा कर आवागमन मुश्किल कर दिया है। यही नहीं भीड़ में खड़े वाहन लगातार धुआं छोड़ते रहते हैं। इसमें बड़ी संख्या में डीजल चलित ऑटो का बेतहाशा दौड़ने के अलावा मोटरसाइकिलों व कारों में बगैर किसी काम घूमने वाले लोग शामिल होते हैं। इससे हवा में पीएम 2.5 का स्तर बढ़ता है।
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बिजली चलित वाहनों की मंजूरी जरूरी
बदले दौर में सब कुछ बदल रहा है। तापमान बढ़ने लगा है। धरती जलने लगी है। यह सब प्रदूषण के बढ़ते स्तर से हो रहा है। इस स्तर को कम करने के लिए बिजली व सौर ऊर्जा चलित वाहनों का उपयोग बेहतर कदम है। सड़कों पर ऐसे वाहन उतारे जाएं, जिनसे प्रदूषण कम से कम हो।
मेट्रो सरीखे साधनों की जरूरत
महानगरों में प्रदूषण का स्तर कम करने व परिवहन समस्या का समाधान करने के लिए रेल व बसों के अलावा मेट्रो की व्यवस्था की गई है। यह सुविधा दूसरे बड़े शहरों में भी मुहैया कराई जानी चाहिए। इससे हर व्यक्ति को अपने वाहन लेकर नहीं चलना होगा। लोग एक ही वाहन से सुगम आवागमन कर सकेंगे। यह प्रयास प्रदूषण के स्तर को काफी हद तक कम करेगा।
शहर का एक्यूआई खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। यह चिंता का विषय है। शहरीकरण, परिवहन, टूटी सड़कें, डीजल वाहन, पेड़ों की कटाई प्रदूषण की बड़ी वजह है। इस बारे में सभी को सोचना होगा। प्रशासन को उचित कदम उठाने चाहिए। तभी इस समस्या का समाधान संभव है।
- प्रो. राजेश धनखड़, पर्यावरण विज्ञान विभाग, एमडीयू
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रदूषण जांच उपकरण एमडीयू में स्थापित है। यहां से वाहन बड़ी संख्या में जाते हैं। इसी सड़क पर बड़ी संख्या में डीजल चलित ऑटो खड़े रहते हैं। इस कारण वाहनों की संख्या ज्यादा रहती है। शायद यही वजह है कि यहां प्रदूषण का स्तर अधिक है।
- रवींद्र यादव, असिस्टेंट एनवायरमेंट इंजीनियर, क्षेत्रीय कार्यालय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बहादुरगढ़
एक्यूआई बढ़ने से सांस संबंधी समस्याएं होती है। इसमें अस्थमा के रोगियों के लिए सांस लेना मुश्किल हो जाता है। कोरोना संक्रमण काल में वायरस और प्रदूषण से बचने के लिए मास्क का हर हाल में प्रयोग करें। यह दोनों की समस्याओं से बचाएगा।
- डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन