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इतिहास का सामाजिक संदर्भ समझना जरूरी : प्रो. सेवा
Mon, 31 Aug 2026 09:47 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Mon, 31 Aug 2026 09:47 PM IST
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30-एमडीयू के इतिहास विभाग में संवाद कार्यक्रम के दौरान मौजूद प्रो. सेवा सिंह व अन्य। स्रोत: एम
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के इतिहास एवं पुरातत्व विभाग ने सोमवार को एक व्याख्यान आयोजित किया। यह व्याख्यान प्रख्यात इतिहासकार प्रो. सुमित सरकार की स्मृति में था। इसका शीर्षक 'इतिहास से संवाद : सुमित सरकार स्मृति व्याख्यान' था।
सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. सेवा सिंह दहिया ने कहा कि इतिहास को केवल घटनाओं और तिथियों के रूप में नहीं देखना चाहिए। इसके सामाजिक संदर्भ को समझना बहुत जरूरी है। विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जयवीर सिंह धनखड़ भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
कार्यक्रम का आयोजन इतिहास चेतना-द हिस्ट्री सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इसमें शिक्षाविदों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। सभी ने प्रो. सुमित सरकार के भारतीय इतिहास लेखन में योगदान को याद किया। उनके इतिहास को देखने के दृष्टिकोण पर भी चर्चा की गई।
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मुख्य वक्ता प्रो. बीडी यादव ने प्रो. सुमित सरकार को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उनके इतिहास लेखन की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। प्रो. यादव ने बताया कि इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का संग्रह नहीं है। यह समाज को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से इतिहास को रटने के बजाय तर्क, प्रमाण और आलोचनात्मक दृष्टि से समझने का आह्वान किया।
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रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के इतिहास एवं पुरातत्व विभाग ने सोमवार को एक व्याख्यान आयोजित किया। यह व्याख्यान प्रख्यात इतिहासकार प्रो. सुमित सरकार की स्मृति में था। इसका शीर्षक 'इतिहास से संवाद : सुमित सरकार स्मृति व्याख्यान' था।
सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. सेवा सिंह दहिया ने कहा कि इतिहास को केवल घटनाओं और तिथियों के रूप में नहीं देखना चाहिए। इसके सामाजिक संदर्भ को समझना बहुत जरूरी है। विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जयवीर सिंह धनखड़ भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
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कार्यक्रम का आयोजन इतिहास चेतना-द हिस्ट्री सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इसमें शिक्षाविदों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। सभी ने प्रो. सुमित सरकार के भारतीय इतिहास लेखन में योगदान को याद किया। उनके इतिहास को देखने के दृष्टिकोण पर भी चर्चा की गई।
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मुख्य वक्ता प्रो. बीडी यादव ने प्रो. सुमित सरकार को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उनके इतिहास लेखन की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। प्रो. यादव ने बताया कि इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का संग्रह नहीं है। यह समाज को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से इतिहास को रटने के बजाय तर्क, प्रमाण और आलोचनात्मक दृष्टि से समझने का आह्वान किया।