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दवाओं की जांच में पीजीआई और स्वास्थ्य विभाग आमने-सामने
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Fri, 27 May 2016 02:11 AM IST
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दवाओं के रिएक्शन मामले में जांच को पहुंची टीम
- फोटो : amar ujala
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पीजीआई में बृहस्पतिवार को नाटकीय घटनाक्रम हुआ। यहां इमरजेंसी में मरीजों को दवाओं के रिएक्शन के मामले में ड्रग कंट्रोलर टीम सहित सैंपल लेेने पहुंची तो डीएमएस डॉ. संदीप कुमार ने उनसे अनुमति पत्र दिखाने को कहा। इस पर ड्रग कंट्रोलर विजय राजे ने कहा कि जिले में कहीं से भी सैंपल भरने के लिए उन्हें सरकार से अनुमति है। काफी देर तनातनी के बाद फोन पर बात कराने के बाद टीम ने यहां सैंपल भरे। टीम ने करीब पौना घंटा की कार्रवाई में तीन दवाइयों के 37 सैंपल भरे हैं। इन दवाओं में ग्लूकोज भी शामिल रहा, जिसका निर्माण स्वयं पीजीआई के प्लांट में होता है। कुछ दवाओं की खरीद आपातकालीन विभाग खुद करता है।
आपातकालीन विभाग की दवाओं की गुणवत्ता को लेकर कई बार आरोप लगते रहे हैं कि इससे मरीजों को रिएक्शन होता है। इस शिकायत पर ड्रग कंट्रोलर विजय राजे, डॉ. रणबीर सिंह, डॉ. मंजीत सिंह और राजबीर दवाओं की जांच करने पहुंचे। डीएमएस डॉ. संदीप ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि उनकी दवाओं का सैंपल भरने से पहले टीम को एमएस या निदेशक कार्यालय को सूचित करना चाहिए था। जब फोन पर बात हुई तो सैंपल भरने की कार्रवाई आगे चली। टीम के एक अधिकारी ने बताया कि उनके पास करीब 90 मरीजों को दवा से रिएक्शन होने की सूचना है। टीम के एक अधिकारी ने कहा कि उनके पास रिएक्शन की पूरी रिपोर्ट है। क्योंकि इसके कोआर्डिनेटर पीजीआई के ही एक वरिष्ठ डॉक्टर हैं, जरूरत पडे़गी तो उन्हें रिपोर्ट भी मिल जाएगी।
इन दवाओं के भरे हैं सैंपल
- दो एंटीबायोटिक इंजेक्शन : मेट्रोनिडजोल और एनआईआर लाइफ इंजेक्शन 16-16 सैंपल
- डीएनएस (ग्लूकोज)
राजबीर ने बताया अनुभव
डीएमएस जब ड्रग कंट्रोलर को सैंपल लेने से मना कर रहे थे, तब स्वास्थ्य विभाग की टीम में आए चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी राजबीर ने अपना अनुभव बताया। राजबीर ने ड्रग कंट्रोलर विजय राजे को बताया कि उनके पास सारी दवाओं को सील करने की पॉवर है और इसके लिए पीजीआई की अनुमति की जरूरत नहीं है। वह 25 से अधिक सालों से सैंपलिंग करवा रहे हैं। यह बात बाद में सच भी हुई। फोन पर समाधान निकाला गया कि जो भी कार्रवाई हो, उसकी लिखित कॉपी पीजीआई प्रबंधन को दी जाए।
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बोलीं अधिकारी
पीजीआई से तीन दवाओं का सैंपल लिया गया है। इन सभी को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
विजया राजे, ड्रग कंट्रोलर
आपातकालीन विभाग में किसी मरीज को कोई रिएक्शन नहीं हुआ है। हम उल्टी दस्त के मरीजों का उपचार कर रहे हैं, जो कि सामान्य अस्पताल का काम है। लेकिन मरीजों की जरूरतों को देखते हुए हम किसी को मना नहीं कर रहे। हमने ऐसे मरीजों के लिए स्पेशल वार्ड, डॉक्टर व स्टाफ का इंतजाम किया हुआ है। जिन मरीजों को रिएक्शन होने की बात कही जा रही है, वह एक सामान्य बात है। उल्टी दस्त अधिक होने पर जब दवा दी जाती है तो कुछ मरीजों में छोटी-मोटी समस्या आ जाती है।
- डॉ. संदीप कुमार, प्रभारी एवं डीएमएस, आपातकालीन विभाग, पीजीआई।
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आपातकालीन विभाग की दवाओं की गुणवत्ता को लेकर कई बार आरोप लगते रहे हैं कि इससे मरीजों को रिएक्शन होता है। इस शिकायत पर ड्रग कंट्रोलर विजय राजे, डॉ. रणबीर सिंह, डॉ. मंजीत सिंह और राजबीर दवाओं की जांच करने पहुंचे। डीएमएस डॉ. संदीप ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि उनकी दवाओं का सैंपल भरने से पहले टीम को एमएस या निदेशक कार्यालय को सूचित करना चाहिए था। जब फोन पर बात हुई तो सैंपल भरने की कार्रवाई आगे चली। टीम के एक अधिकारी ने बताया कि उनके पास करीब 90 मरीजों को दवा से रिएक्शन होने की सूचना है। टीम के एक अधिकारी ने कहा कि उनके पास रिएक्शन की पूरी रिपोर्ट है। क्योंकि इसके कोआर्डिनेटर पीजीआई के ही एक वरिष्ठ डॉक्टर हैं, जरूरत पडे़गी तो उन्हें रिपोर्ट भी मिल जाएगी।
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इन दवाओं के भरे हैं सैंपल
- दो एंटीबायोटिक इंजेक्शन : मेट्रोनिडजोल और एनआईआर लाइफ इंजेक्शन 16-16 सैंपल
- डीएनएस (ग्लूकोज)
राजबीर ने बताया अनुभव
डीएमएस जब ड्रग कंट्रोलर को सैंपल लेने से मना कर रहे थे, तब स्वास्थ्य विभाग की टीम में आए चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी राजबीर ने अपना अनुभव बताया। राजबीर ने ड्रग कंट्रोलर विजय राजे को बताया कि उनके पास सारी दवाओं को सील करने की पॉवर है और इसके लिए पीजीआई की अनुमति की जरूरत नहीं है। वह 25 से अधिक सालों से सैंपलिंग करवा रहे हैं। यह बात बाद में सच भी हुई। फोन पर समाधान निकाला गया कि जो भी कार्रवाई हो, उसकी लिखित कॉपी पीजीआई प्रबंधन को दी जाए।
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बोलीं अधिकारी
पीजीआई से तीन दवाओं का सैंपल लिया गया है। इन सभी को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
विजया राजे, ड्रग कंट्रोलर
आपातकालीन विभाग में किसी मरीज को कोई रिएक्शन नहीं हुआ है। हम उल्टी दस्त के मरीजों का उपचार कर रहे हैं, जो कि सामान्य अस्पताल का काम है। लेकिन मरीजों की जरूरतों को देखते हुए हम किसी को मना नहीं कर रहे। हमने ऐसे मरीजों के लिए स्पेशल वार्ड, डॉक्टर व स्टाफ का इंतजाम किया हुआ है। जिन मरीजों को रिएक्शन होने की बात कही जा रही है, वह एक सामान्य बात है। उल्टी दस्त अधिक होने पर जब दवा दी जाती है तो कुछ मरीजों में छोटी-मोटी समस्या आ जाती है।
- डॉ. संदीप कुमार, प्रभारी एवं डीएमएस, आपातकालीन विभाग, पीजीआई।