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चेयरमैन कुंडू ने दी पार्षदों सहित सामूहिक इस्तीफे की धमकी

Wed, 03 May 2017 02:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Wed, 03 May 2017 02:18 AM IST
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सीएम को पत्र लिखकर दिया सोमवार तक का अल्टीमेटम, तीन घंटे मनाने में लगे रहे एसडीएम - फोटो : amar ujala
भाजपा समर्थित जिला परिषद के चेयरमैन बलराज कुंडू ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाकर सामूहिक इस्तीफे की धमकी दी है। उनका कहना है कि उन्होंने ग्रामीण पंचायत खेलों के दौरान 50 लाख रुपये की बचत करवाई थी। उसी समय से अफसरशाही ने पंचायत मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ को उनके प्रति गुमराह किया हुआ है। इतना ही नहीं जिला पार्षदों द्वारा पास किए गए कार्यों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि सोमवार तक उनके काम नहीं हुए तो वे पार्षदों सहित सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जिला परिषद कार्यालय पर ताला जड़ कर धरना दिया जाएगा। तीन घंटे तक मामले को लेकर जिप चेयरमैन कार्यालय में हंगामा चलता रहा। डीसी की तरफ से प्रतिनिधि बनकर आए एसडीएम अरविंद मल्हान ने चेयरमैन और पार्षदों को मनाने का प्रयास किया। हालांकि वे अपने रुख पर अड़े रहे।
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जिला परिषद के अंदर बजट और कार्यों को लेकर जिप चेयरमैन और अधिकारियों के बीच खींचतान चल रही थी। सोमवार को मामला इतना बढ़ा कि कर्मचारियों के कमरों को ताले लगा दिए गए। चेयरमैन बलराज कुंडू ने सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर और डीसी से बात भी की थी। ग्रोवर ने शुक्रवार तक उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया। इसके साथ ही डीसी की तरफ से मंगलवार को एसडीएम अरविंद मल्हान को बातचीत करने के लिए जिप चेयरमैन के पास भेजा गया। सवा 11 बजे एसडीएम ने चेयरमैन कार्यालय पहुंच कर बात की। चेयरमैन बलराज कुंडू और मौजूद पार्षद अपने रुख पर अड़े रहे और सीएम को पत्र लिखकर सामूहिक इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दे दिया।
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...लगता है जिला पार्षदों की कोई जरूरत ही नहीं

सीएम को लिखे पत्र पर जिप वाइस चेयरमैन सहित 9 पार्षदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसमें साफ लिखा है कि 21 अप्रैल को समस्याओं को लेकर जिप पार्षदों ने सीएम मनोहर लाल खट्टर, पंचायत मंत्री ओमप्रकाश धनखड़, एसीएस पंचायत नवराज संधू को लिखित पत्र देकर अवगत करवाया था। इसके बावजूद अधिकारियों की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया। ऐसे में लगता है कि जिला पार्षदों की कोई आवश्यकता ही नहीं है। ऐसे में जिप चेयरमैन, वाइस चेयरमैन सहित पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा देने का फैसला लिया है। हालात नहीं बदले तो सोमवार को इस्तीफा भेजकर जिप कार्यालय पर ताला लगा दिया जाएगा।
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जसिया की महिलाएं पहुंची, प्लाट दिलवा दो, नहीं तो वोट नहीं देंगी

इस हंगामे के बीच जसिया गांव से एक दर्जन महिलाएं मौके पर आ गईं। महिलाओं ने कहा कि उन्हें कई साल पहले प्रशासन ने 100-100 गज के प्लाट दिए थे। आज तक कब्जा नहीं मिला। अगर प्लाट नहीं मिले तो वे चुनाव में किसी को भी वोट नहीं देंगी। चेयरमैन ने एसडीएम को बताया कि इस तरह लोग उनके पास आते हैं लेकिन अधिकारी ध्यान ही नहीं देते।

ऊपर के इशारे पर तो नहीं हो रहा मेरे साथ यह व्यवहार : कुंडू

जिप चेयरमैन बलराज कुंडू ने साफतौर पर कहा कि कहीं ऊपर के इशारे पर उनके साथ ऐसा व्यवहार तो नहीं हो रहा। मुझे शक है क्योंकि अफसरशाही न केवल मंत्री, बल्कि सरकार को भी गुमराह कर रही है। हालांकि कुंडू ने खुलकर किसी नेता या मंत्री और अधिकारी का नाम नहीं लिया।

एसडीएम को सौंप दी चाबी

एक दिन पहले जिला परिषद में जिन दो कमरों पर ताला लगाया गया था, उनकी चाबी चेयरमैन व पार्षदों को मनाने पहुंचे एसडीएम को दे दी गई। एसडीएम ने चाबी जिप सीआईओ इंद्रजीत को सौंप दी। इसके बाद दोनों कमरों के ताले खोल दिए गए।  

डीडीपीओ को सुनाई खरी-खरी

मंगलवार को जिप चेयरमैन ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि उन्हाेंने डीडीपीओ से विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट मांगी थी। आज तक सूची नहीं दी गई। इसी बीच डीडीपीओ सारवान मीटिंग में आ गए। सबके सामने चेयरमैन ने उन्हें खरी-खरी सुनाई। डीडीपीओ ने कहा  रिपोर्ट तैयार होते ही दे दी जाएगी।

जिप प्रशासन नियमों और कानून के दायरे में रहकर काम कर रहा है। कई मामलों में बजट या फाइल को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यालय से अनुमति लेनी पड़ती है। अनुमति मिलने के बाद ही काम आगे बढ़ पाता है। चेयरमैन की गाड़ी का बिल सोमवार को ही मुझे मिला है। जिप चेयरमैन और अधिकारियों के बीच तालमेल में कोई कमी है तो उसे दूर किया जाएगा।
इंद्रजीत सिंह, सीईओ, जिला परिषद।

आज डीसी को भेज दूंगा रिपोर्ट

जिप चेयरमैन ने सीएम के नाम लिखित पत्र दिया है। इस पर पार्षदों के हस्ताक्षर भी हैं। रिपोर्ट बनाकर पत्र को डीसी अतुल कुमार के पास बुधवार सुबह भेज दिया जाएगा। डीसी से आग्रह किया जाएगा कि समस्या के समाधान के लिए चेयरमैन की उच्च स्तर के किसी अधिकारी से मीटिंग करवाई जाए।
अरविंद मल्हान, एसडीएम।

मीटिंग में बैकफुट पर नजर आए अधिकारी

जिला परिषद के अंदर मंगलवार को हंगामे के दौरान अधिकारी बैकफुट पर नजर आए। एक तरफ जहां जिप चेयरमैन सरेआम आरोपों की झड़ी लगा रहे थे, दूसरी तरफ अधिकारी खुलकर कोई जवाब नहीं दे रहे थे। हर किसी ने चुप्पी साध रखी थी। एसडीएम अरविंद मल्हान बार-बार आगे शिकायत न आने का भरोसा दे रहे थे।

सीएम को लिखे पत्र में ये लगाए आरोप

: जिप ने 14 माह के कार्यकाल में छह मीटिंग कर प्रस्ताव पास किए। जिप प्रशासन ने बिजली, पानी, पीएचसी, सीएचसी, शिक्षा, समाज कल्याण और खाद्य आपूर्ति से संबंधित किसी एजेंडे पर काम नहीं किया।
: मोबाइल टावर लगाने के लिए जिला परिषद से डेढ़ लाख रुपये की फीस भरकर मंजूरी लेनी पड़ती है। जिले में 858 टावर हैं। इनमें से किसी ने मंजूरी नहीं ली। अधिकारियों की मिलीभगत से टावर अवैध रूप से चल रहे हैं।
: विकास कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए पांच कमेटी गठित की गई थीं। अधिकारियों ने कमेटियों को किनारे करके जिला विकास भवन के रखरखाव का ठेका दे दिया।
: सोलर सिस्टम लगाने के लिए एक करोड़ का बजट आया हुआ है। जिप ने प्रस्ताव पास करके सोलर सिस्टम लगाने की मांग की लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। जिला विकास भवन में चल रहे सरकारी कार्यालयों का 16 लाख बकाया बिजली बिल नहीं दिया गया है।
: 14 माह में जिप चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के आफिस के बाहर नेम प्लेट नहीं लगी। सीईओ के कमरे के बाहर तीन दिन में नेम प्लेट लगा दी गई।
: जिप की गाड़ी पेमेंट न होने से 10 दिन से वर्कशाप में खड़ी है। न तो गाड़ी का छह माह से तेल का खर्च दिया गया और न ही ड्राइवर का वेतन दिया।
: क्लर्क सरिता को छोड़कर बाकी अधिकारी और कर्मचारी सुबह हाजिरी लगाकर निकल जाते हैं। शाम को फिर हाजिरी लगाने आ जाते हैं। एक टाइपिस्ट तो बहुत कम आता है। पार्षदों से दुर्व्यवहार भी किया जाता है।
: सीएम ने जिप चेयरमैनों को स्वच्छता अभियान कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया था। अभी तक मीटिंग या सर्वे के बारे में कोई सूचना नहीं दी गई।
: ग्रामीण एरिया में सार्वजनिक शौचालय के बारे में झूठी रिपोर्ट बनवाई गई। उन्होंने पटवापुर गांव में जाकर लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि काफी लोगों के घरों में शौचालय बनाए ही नहीं गए। अधिकारियों ने सरपंचों और ब्लाक समिति चेयरमैनों से हस्ताक्षर करवा लिए।
: जिला विकास भवन में ठेके पर कर्मचारी काम कर रहे हैं। इनमें से कई को अधिकारियों के घर काम करने के लिए लगाया हुआ है। कोई पार्षद काम के लिए कहता है तो कर्मचारी कहते हैं कि वे ठेकेदार और एडीसी की नौकरी करते हैं, जिला परिषद की नहीं।

: सोमवार को एमडीयू में पंचायत मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने जिप पार्षदों, सरपंचों और ब्लाक समिति सदस्यों को तीन माह का प्रशिक्षण देने के लिए कोर्स का शुभारंभ किया। एडीसी और डीडीपीओ ने उन्हें सूचना तक नहीं दी।
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