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Rohtak: बाबा मस्तनाथ मठ; कलश धारण कर बाबा के समाधि स्थल पहुंची 8 गांव ही 3000 महिलाएं

Tue, 10 Oct 2023 10:54 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 10 Oct 2023 10:54 PM IST
सार

बाबा मस्तनाथ मठ में कलश स्थापना समारोह के साथ देशमेले की तैयारी पूरी हो चुकी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समारोह में शिरकत करेंगे, मठ में दो दिन भाजपा के दिग्गज नेता पहुंचेंगे।

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Rohtak: Baba Mastnath Math; 3000 women from 8 villages reached Baba's Samadhi place carrying Kalash
बाबा मस्तनाथ मठ में आयोजित कलश यात्रा में शमिल श्रद्धालु। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हरियाणा के रोहतक में सप्तम महंत पीर चांदनाथ योगी के आठमान भंडारे, शंखढाल, मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा एवं देशमेले से एक दिन पूर्व ही बाबा मस्तनाथ मठ में भक्तिमय माहौल नजर आया। बाबा मस्तनाथ की पुनर्निर्मित समाधि (मंदिर) पर मंगलवार को कलश स्थापना हुई। आठ गांवों की करीब 3000 महिलाएं अपने सिर पर कलश धारण कर समाधि स्थल पहुंचीं। मठ के महंत बाबा बालकनाथ योगी ने समारोह की तैयारियों का जायजा लिया।

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सिद्ध चौरंगीनाथ ने आठवीं शताब्दी में की थी अस्थल बोहर मठ स्थापना
बाबा मस्तनाथ मठ संपूर्ण विश्व की संत परंपरा में नाथ संप्रदाय का अद्वितीय स्थान है। आदिनाथ भगवान शंकर इस संप्रदाय के प्रवर्तक हैं। आठवीं शताब्दी के प्रसिद्ध ग्रंथ ''हर्षचरित'' व इससे पूर्ववर्ती ग्रंथ कादंबरी, मैत्रेयी उपनिषद् और पुराणों में भी कनफड़ा योगियों के उल्लेख मिलते हैं। लोकहित के कार्यों के कारण ही वर्तमान समय में नाथ संप्रदाय अफगानिस्तान, तिब्बत व चीन तक फैला है।
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तिब्बत के तंजूर मठ व चीन के बौद्ध विहारों में सिद्ध संप्रदाय के अनेक सिद्धों की कीर्ति गाथाएं वर्तमान में भी सुरक्षित हैं। उत्तर भारत में लोकगीत, सांग, किस्से और कहानियां इस बात को प्रमाणित भी करते हैं। गुरु परंपरा का निर्वहन करते हुए सिद्ध चौरंगीनाथ ने आठवीं शताब्दी में अस्थल बोहर मठ की स्थापना की।
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सिद्ध बाबा चौरंगीनाथ ने अपनी अखंड साधना, कठोर तप, अद्भुत एवं अलौकिक योग माया से मठ की महिमा को दसों दिशाओं में फैलाया। कालक्रम से विध्वस्त हुए मठ का 18वीं शताब्दी में पुनः जीर्णोद्धार बाबा मस्तनाथ ने कराया। भगवान गोरक्षनाथ के अवतार थे।

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