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कोरोना संक्रमणकाल में तीन वैक्सीन पर चल रही रिसर्च देश में टॉप पर
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Research on three vaccines in the corona transition tops the country
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रोहतक। कोरोना संक्रमणकाल में देश के लोगों का जीवन बचाने के लिए तीन मुख्य वैक्सीनों से सबसे अधिक उम्मीद की जा रही है। इसमें भारत बॉयोटैक की कोवैक्सीन, सीरम इंस्टीट्यूटी की कोविशिल्ड व रूस की स्पुतनिक वी वैक्सीन है। रूस की वैक्सीन पर डॉ. रैडी रिसर्च कर रही हैं। माना जा रहा है तीनों वैक्सीनों में प्रमुख रूप से कोवैक्सीन व कोविशिल्ड से अधिक उम्मीद है, क्योंकि ये अपना ट्रायल फेज जल्द पूरा कर सकती हैं। यह जानकारी कोवैक्सीन की रिसर्च में शामिल पीजीआईएमएस कम्यूनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर एवं रिसर्च को-इन्वेस्टिगेटर डॉ. रमेश वर्मा ने दी।
डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि भारत बॉयोटैक की कौवैक्सीन व सीरम इंस्टीट्यूटी की कोविशिल्ड लगभग बराबर अपनी रिसर्च कर रही हैं। मार्च, अप्रैल तक इनकी रिसर्च पूरी होने की उम्मीद है। हालांकि इन कंपनियों ने वैक्सीन तैयार करने की अनुमति सरकार से मांगी थी, लेकिन रिसर्च पूरी होने तक सरकार ने मंजूरी नहीं दी है। सरकार ने इन कंपनियों से तीसरे फेज की रिसर्च का डाटा मांगा है। यह डाटा उपलब्ध कराने के बाद ही इस वैक्सीन को प्रयोग में लेने की अनुमति दी जाएगी। अभी कोई वैक्सीन मार्केट में नहीं आएंगी।
सरकार के लिए सबसे बड़ा चैलेंज होगा वैक्सीनेशन करना
एक्सपर्ट मानते हैं वैक्सीन आने के बाद सरकार के लिए सबसे बड़ा चैलेंज होगा वैक्सीनेशन करना। इसके लिए कई स्तर पर कार्य करना होगा। क्योंकि वैक्सीन आने के बाद हर कोई चाहेगा कि वैक्सीन उसे पहले लगे, जबकि डोज सीमित संख्या में होगी। सरकार को लोगों को समझाकर पहले जरूरतमंदों को यह वैक्सीन लगानी होगी। कोवैक्सीन व कोविशिल्ड को दो से आठ डिग्री तापमान में रखा जा सकेगा। यह समस्या नहीं है। वैक्सीनेशन के लिए हमारे पास सब इंतजाम है, बस वैक्सीन आने का इंतजार है।
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स्पुतनिक वी पर हो रही रिसर्च फाइजर ने मांगी है अनुमति
डॉ. वर्मा बताते हैं कि रूस की स्पुतनिक वी पर रिसर्च जारी है। यह डॉ. रैडी कंपनी के अंतर्गत है, ईएसआई फरीदाबाद इस पर काम कर रहा है। जबकि फाइजर देश में ट्रायल के लिए अनुमति मांग रही है। फाइजर भले ही यूके में लगनी शुरू हो गई है, लेकिन हमारे देश में इसके प्रयोग से पहले इसे सभी ट्रायलों में पास होना होगा। इंडिया में बगैर वैक्सीन के ट्रायल में पास हुए इसके प्रयोग की अनुमति नहीं दी जाती। अलग-अलग देश में रहने वाले लोगों की शारीरिक क्षमता अलग होती है। हम फाइजर से कम उम्मीद कर रहे हैं, क्योंकि इसे रखने के लिए माइनस 17 डिग्री तापमान चाहिए। इसके अलावा माडरेना व अन्य वैक्सीनों से अभी कोई उम्मीद नहीं है।
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डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि भारत बॉयोटैक की कौवैक्सीन व सीरम इंस्टीट्यूटी की कोविशिल्ड लगभग बराबर अपनी रिसर्च कर रही हैं। मार्च, अप्रैल तक इनकी रिसर्च पूरी होने की उम्मीद है। हालांकि इन कंपनियों ने वैक्सीन तैयार करने की अनुमति सरकार से मांगी थी, लेकिन रिसर्च पूरी होने तक सरकार ने मंजूरी नहीं दी है। सरकार ने इन कंपनियों से तीसरे फेज की रिसर्च का डाटा मांगा है। यह डाटा उपलब्ध कराने के बाद ही इस वैक्सीन को प्रयोग में लेने की अनुमति दी जाएगी। अभी कोई वैक्सीन मार्केट में नहीं आएंगी।
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सरकार के लिए सबसे बड़ा चैलेंज होगा वैक्सीनेशन करना
एक्सपर्ट मानते हैं वैक्सीन आने के बाद सरकार के लिए सबसे बड़ा चैलेंज होगा वैक्सीनेशन करना। इसके लिए कई स्तर पर कार्य करना होगा। क्योंकि वैक्सीन आने के बाद हर कोई चाहेगा कि वैक्सीन उसे पहले लगे, जबकि डोज सीमित संख्या में होगी। सरकार को लोगों को समझाकर पहले जरूरतमंदों को यह वैक्सीन लगानी होगी। कोवैक्सीन व कोविशिल्ड को दो से आठ डिग्री तापमान में रखा जा सकेगा। यह समस्या नहीं है। वैक्सीनेशन के लिए हमारे पास सब इंतजाम है, बस वैक्सीन आने का इंतजार है।
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स्पुतनिक वी पर हो रही रिसर्च फाइजर ने मांगी है अनुमति
डॉ. वर्मा बताते हैं कि रूस की स्पुतनिक वी पर रिसर्च जारी है। यह डॉ. रैडी कंपनी के अंतर्गत है, ईएसआई फरीदाबाद इस पर काम कर रहा है। जबकि फाइजर देश में ट्रायल के लिए अनुमति मांग रही है। फाइजर भले ही यूके में लगनी शुरू हो गई है, लेकिन हमारे देश में इसके प्रयोग से पहले इसे सभी ट्रायलों में पास होना होगा। इंडिया में बगैर वैक्सीन के ट्रायल में पास हुए इसके प्रयोग की अनुमति नहीं दी जाती। अलग-अलग देश में रहने वाले लोगों की शारीरिक क्षमता अलग होती है। हम फाइजर से कम उम्मीद कर रहे हैं, क्योंकि इसे रखने के लिए माइनस 17 डिग्री तापमान चाहिए। इसके अलावा माडरेना व अन्य वैक्सीनों से अभी कोई उम्मीद नहीं है।