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एंडोस्कोपी कर पेट से कीलें, पेच, पत्ती व कांच के टुकड़े निकाले
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मरीज का एक्सरे। विज्ञप्ति
- फोटो : RohtakCity
पीजीआईएमएस के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने एक युवक के पेट से तेज धारदार कीलें, पेच, पत्ती व कांच के टुकड़े निकाल कर मरीज की जान बचाई है। यह सारी चीजें मरीज के पेट में 10 दिन से थीं और जब मरीज को दर्द होना शुरू हुआ तो सच्चाई सामने आई। 20 मिनट की कड़ी मेहनत से डॉक्टर ने एंडोस्कोपी से सभी चीजों को एक-एक करके निकाल लिया। यदि मरीज का यह इलाज निजी अस्पताल में कराया जाता तो हजारों रुपये खर्च होते। ऑपरेशन के दौरान यह खर्च लाखों में चला जाता। इस तरह के गंभीर केस को निजी अस्पताल भी नहीं लेते। पीजीआई में इसकी निशुल्क सुविधा उपलब्ध है।
26 वर्षीय युवक पेट दर्द की शिकायत लेकर शहर के निजी अस्पताल पहुंचा और वहां उसकी एक्स-रे जांच कराई गई। इसमें जब कई चीजें देखने को मिलीं तो उसे पीजीआईएमएस रेफर कर दिया गया। जब मरीज पेट दर्द की शिकायत ले कर गेस्ट्रोलॉजी विभाग पहुंचा तो वह पेट दर्द और उल्टियों से परेशान था। एंडोस्कोपी जांच में उसके पेट में कई नुकीली चीजें देखने को मिलीं। ये चीजें मरीज के पेट में कैसे पहुंचीं, मरीज ने स्पष्ट नहीं किया।
सीनियर प्रोफेसर डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने मरीज की एंडोस्कोपी जांच में पाया कि मरीज के पेट में लोहे की कीलें, पेच, पत्ती एवं कांच के टुकड़े धंसना शुरू हो चुके हैं। क्योंकि मरीज को इन्हें निगले लगभग 10 दिन बीत चुके थे। यदि इन्हें तत्काल न निकाला जाता तो यह पेट व आंतों को फाड़ सकते थे। साथ ही संक्रमण के चलते मरीज की जान भी जा सकती थी। इस पर डॉ. प्रवीण ने 20 मिनट में एंडोस्कोपी के माध्यम से सभी चीजों को एक-एक करके निकाला। इस केस में डर था कि एंडोस्कोपी के दौरान धारदार चीजों को निकालने में खाने के पाइप के निचले और ऊपरी हिस्से को नुकसान न पहुंचे। क्योंकि दोनों जगह बहुत तंग होती हैं और निकालते समय चूक होने पर खाने की नली फटने का डर रहता है।
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गौरतलब है कि डॉ. प्रवीण अभी तक 36500 एंडोस्कोपी कर चुके हैं। विभाग में मरीजों को छल्ले डालना, गलू इंजेक्शन लगाना, फटे हुए अल्सर पर टांके लगाना, खाने की नली के तंग रास्ते को खोलना, क्लोनोस्कोपी व फाइब्रोस्कैन सहित कई सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध हैं।
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26 वर्षीय युवक पेट दर्द की शिकायत लेकर शहर के निजी अस्पताल पहुंचा और वहां उसकी एक्स-रे जांच कराई गई। इसमें जब कई चीजें देखने को मिलीं तो उसे पीजीआईएमएस रेफर कर दिया गया। जब मरीज पेट दर्द की शिकायत ले कर गेस्ट्रोलॉजी विभाग पहुंचा तो वह पेट दर्द और उल्टियों से परेशान था। एंडोस्कोपी जांच में उसके पेट में कई नुकीली चीजें देखने को मिलीं। ये चीजें मरीज के पेट में कैसे पहुंचीं, मरीज ने स्पष्ट नहीं किया।
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सीनियर प्रोफेसर डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने मरीज की एंडोस्कोपी जांच में पाया कि मरीज के पेट में लोहे की कीलें, पेच, पत्ती एवं कांच के टुकड़े धंसना शुरू हो चुके हैं। क्योंकि मरीज को इन्हें निगले लगभग 10 दिन बीत चुके थे। यदि इन्हें तत्काल न निकाला जाता तो यह पेट व आंतों को फाड़ सकते थे। साथ ही संक्रमण के चलते मरीज की जान भी जा सकती थी। इस पर डॉ. प्रवीण ने 20 मिनट में एंडोस्कोपी के माध्यम से सभी चीजों को एक-एक करके निकाला। इस केस में डर था कि एंडोस्कोपी के दौरान धारदार चीजों को निकालने में खाने के पाइप के निचले और ऊपरी हिस्से को नुकसान न पहुंचे। क्योंकि दोनों जगह बहुत तंग होती हैं और निकालते समय चूक होने पर खाने की नली फटने का डर रहता है।
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गौरतलब है कि डॉ. प्रवीण अभी तक 36500 एंडोस्कोपी कर चुके हैं। विभाग में मरीजों को छल्ले डालना, गलू इंजेक्शन लगाना, फटे हुए अल्सर पर टांके लगाना, खाने की नली के तंग रास्ते को खोलना, क्लोनोस्कोपी व फाइब्रोस्कैन सहित कई सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध हैं।

मरीज के पेट से निकाले गए लोहे व कांच के टुकड़े। विज्ञप्ति- फोटो : RohtakCity