फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   Relatives asked for the dead body of daughter Hanika, the hospital billed 4 lakhs, commotion

Rohtak News: परिजनों ने बेटी हनिका का शव मांगा, अस्पताल ने 4 लाख का बिल, हंगामा

Wed, 04 Jan 2023 06:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 04 Jan 2023 06:00 AM IST
विज्ञापन
Relatives asked for the dead body of daughter Hanika, the hospital billed 4 lakhs, commotion
निजी अस्पताल में लड़की की मौत के बाद जमा लोग। अमर उजाला
रोहतक। सड़क हादसे में घायल 10 साल की हनिका ने आठ दिन बाद उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। उसका इलाज दिल्ली बाईपास स्थित एक निजी अस्पताल में चल रहा था। बेटी की मौत से आहत परिजनों ने जब शव मांगा तो अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें चार लाख का बिल थमा दिया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि पहले बिल जमा कराओ फिर बेटी का शव ले जाओ। इस बात को लेकर परिजनों ने हंगामा कर दिया। इसकी जैसी ही सूचना पुलिस को मिली तो वह मौके पर पहुंची और परिजनों को शांत कराया। इसके बाद शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम करवा परिजनों को सौंप दिया। उधर, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि आरोप बेबुनियाद हैं। एमएलसी केस था, पुलिस को ही शव दे सकते थे।
विज्ञापन

पुलिस के मुताबिक गढ़ी बोहर निवासी सोनू ने बताया कि 23 दिसंबर को वह अपनी बेटी हनिका (10) व भांजी (2) शिया के साथ सेक्टर एक की मार्केट में आया हुआ था। वे सड़क किनारे खड़े होकर घर जाने के लिए वाहन का इंतजार कर रहे थे। तभी भाई कृष्ण स्कूटी पर बेटी झानविका (13) व झनिसा (7) के साथ आया। उन्हें देखकर कृष्ण ने स्कूटी रोक दी। वे अभी आपस में बात कर रहे थे, तभी शीला बाईपास की तरफ से तेज गति से कैंटर आया और सीधी उनको टक्कर मार दी। टक्कर में कृष्ण, शिया, हनिका, झानविका व झनिसा घायल हो गए। राहगीरों की मदद से उन्होंने पीजीआई में दाखिल कराया, जहां डॉक्टरों ने कृष्ण को मृत घोषित कर दिया। गंभीर रूप से घायल शिया व हनिका को पावर हाउस चौक स्थित निजी अस्पताल मेड स्टार में दाखिल कराया। सिया ने उसी दिन दम तोड़ दिया था, जबकि हनिका का अभी उपचार चल रहा था।
विज्ञापन

‘बेटी का 20 घंटे बाद मिला शव’
गढ़ी बोहर निवासी सोनू ने बताया कि उसकी बेटी की रविवार दोपहर हालत ज्यादा बिगड़ गई। करीब चार बजे उसे बताया गया कि बेटी की मौत हो गई है। उसे कहा गया कि शव देने से पहले कागजी कार्रवाई की जाएगी। सोमवार को शव लेने पहुंचे तो पहले चार लाख रुपये बिल जमा कराने के लिए कहा गया। उसने सामाजिक कार्यकर्ता रमेश बोहर से बात की। वे अस्पताल पहुंचे। काफी देर तक अस्पताल प्रबंधन अपनी बात कहता रहा, जबकि परिजन अपनी बात पर अड़े रहे। मामले की सूचना सेक्टर एक पुलिस चौकी में दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची। दोनों पक्षों से बातचीत करके शव कब्जे में लिया। मौत के 20 घंटे बाद पीजीआई के डेड हाउस में पोस्टमार्टम के बाद शव हमें सौंप दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

‘निजी अस्पताल समझे, पैसा ही सबकुछ नहीं’
सामाजिक कार्यकर्ता रमेश बोहर का कहना है कि निजी अस्पताल ने चार लाख रुपये बिल बना दिया। पूछने पर कहा कि दवाइयां बाहर से मंगवानी पड़ती है। पता किया तो 250 रुपये का इंजेक्शन 6 हजार रुपये लगाया गया। वे अस्पताल संचालकों को कहना चाहते हैं कि पैसा ही सबकुछ नहीं होता।
वर्जन-
बच्ची गंभीर हालत में आई थी। आठ दिन तक उसका उपचार चला। परिजनों ने मात्र 50 हजार रुपये जमा करवाए थे। करीब तीन लाख रुपये बिल बनता था। अस्पताल को बिल मांगने का हक है। दूसरा 6 हजार की कीमत का इंजेक्शन लगाने का आरोप गलत है। हम इतनी महंगी दवा ही नहीं रखते। तीसरा, एमएलसी केस होने के कारण शव परिजनों को नहीं, बल्कि पुलिस को ही सौंप सकते थे। बिल न चुकाना पड़े, इसलिए जानबूझकर हंगामा किया गया।

- डॉक्टर अशोक कुमार, संचालक मेड स्टार अस्पताल
पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। निजी अस्पताल के बिल को लेकर विवाद था जिनका दोनों पक्षों ने आपस में समाधान कर लिया। इस संबंध में हमें कोई शिकायत नहीं मिली।
- एएसआई सुरेंद्र, चौकी प्रभारी सेक्टर एक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed