फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   private bus permit angry , roadways union nine reached in chandigarh

प्राइवेट बसों के परमिट का विरोध, कर्मचारी 9 को पहुंचेंगे चंडीगढ़

Sat, 06 May 2017 02:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sat, 06 May 2017 02:04 AM IST
विज्ञापन
private bus permit angry , roadways union nine reached in chandigarh
रोडवेज की 19 बसों के पहिए जाम - फोटो : अमर उजाला
रोडवेज में प्राइवेट बसों को परमिट देने से संबंधित नया नियम सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच फिर से तकरार पैदा कर रहा है। प्राइवेट बसों को दिए जाने वाले परमिट के खिलाफ कर्मचारी संगठनों ने एक बार फिर मोर्चा खोलने का मन बना लिया है। इसके लिए प्रदेश भर से कर्मचारी 9 मई को सचिवालय चंडीगढ़ में प्रदर्शन के लिए कूच करेंगे।
विज्ञापन


 परिवहन आयुक्त एसएस ढिल्लो की ओर से कोर्ट में दिए हलफनामे से प्रदेश के सभी कर्मचारी यूनियन नाखुश हैं। ढिल्लो ने 20 अप्रैल को कोर्ट में फैसले को लेकर संशोधन की बात कही है। जबकि तमाम यूनियन के सदस्य इसे निरस्त कराने पर अड़े हैं। सर्व कर्मचारी संघ के डिपो सचिव जयकंवार दहिया ने बताया कि सरकार वादाखिलाफी कर रही है। सरकार ने 13 अप्रैल को फैसला वापस लेने की बात कहते हुए हड़ताल खत्म करवाई थी।
विज्ञापन


लेकिन परिवहन आयुक्त के हलफनामे से साबित हो गया है कि सरकार प्राइवेट बसों के परमिट देने के फैसले में मामूली बदलाव के अलावा कुछ नहीं करने वाली। इसीलिए सर्व कर्मचारी संघ, रोडवेज कर्मचारी यूनियन संबंधित महासंघ के अलावा प्रदेश के सभी कर्मचारी संगठनों के सदस्य सचिवालय चंडीगढ़ का घेराव करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो संपूर्ण प्रदेश में दोबारा चक्का जाम करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


सरकार का यह फैसला आमजन के हित में नहीं है। प्राइवेट गाड़ियां लोगों को वे सुविधाएं और सहूलियत कभी नहीं दे सकतीं जो रोडवेज बसें देती रही हैं। यह फैसला भविष्य में युवाओं की रोजगार की समस्याओं को और बढ़ा देगा। सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए। इसके अलावा जिन कर्मचारियों पर केस दर्ज हुए हैं या वेतन काटा गया है, उसे निरस्त किया जाए।

- कृष्ण कुमार, परिचालक।

हम यह आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं। रोडवेज में पहले ही बसों की कमी है। सरकार इन्हें बढ़ाने को लेकर कोई काम नहीं कर रही है। प्राइवेट बसों के संचालक कभी भी लोकहित में काम नहीं करेंगे। उन्हें सिर्फ अपना मुनाफा ही दिखेगा। इससे सीधे तौर पर आम जनता का नुकसान ही होगा। इस फैसले को वापस लेकर रोडवेज के बेड़े में बसों का इजाफा होना चाहिए।
- सतबीर मुढ़ाल, डिपो प्रधान, सर्व कर्मचारी संघ।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed