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रोहतक: पैरा विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीत पूजा बनीं प्रेरणास्रोत
Tue, 08 Mar 2022 08:42 PM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Tue, 08 Mar 2022 08:42 PM IST
सार
पूजा ने शादी के चार साल बाद खेलने का शौक पूरा करने के लिए फिर से तीरंदाजी शुरू की थी।
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पूजा जाट्यान।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
कहते हैं कुछ करने की लगन हो और मन में दृढ़ विश्वास तो कुछ भी असंभव नहीं है। पैरा विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीत कर पूजा जाट्यान ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। यह दिव्यांग खिलाड़ी पहली बार विश्व चैंपियनशिप में खेलते हुए दूसरे स्थान पर रही। दुबई में हुई इस चैंपियनशिप से लौटी इस खिलाड़ी का जोरदार स्वागत किया गया।
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अरसे बाद घर पहुंची खिलाड़ी अपनी छह साल की बेटी व अन्य परिजनों से मिली। अब पूजा का लक्ष्य एशियन खेल हैं। इसके लिए फिर लंबे समय अपने परिवार से अलग रहकर अभ्यास में जुटेंगी। अमर उजाला से हुई विशेष बातचीत में पूजा ने अपने पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर के पदक जीतने की कहानी साझा की।
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हरियाणा के गुरुग्राम की बेटी व रोहतक के धनाना में ब्याही पूजा ने बताया कि हमारा परिवार रोहतक के विशाल नगर में रहता है। पति जयदीप जाट्यान प्रॉपर्टी व इंटीरियर का काम करते हैं। वर्ष 2014 में हमारी शादी हुई। हमारी छह साल की बेटी है। वर्ष 2011 से 14 तक तीरंदाजी की।
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शादी के बाद खेल छूट गया था। घर पर रहकर दिन नहीं कटता था। घर के काम में भी मन नहीं लग रहा था। इस बारे में परिवार को बताते हुए तीरंदाजी शुरू करने की बात रखी। परिवार से भी हां में मंजूरी मिल गई।
परिवार ने प्रोत्साहित कर हौसला बढ़ाया
सोनीपत में खेलो इंडिया के तहत नवंबर 2021 में स्पर्धा हुई। इसमें हिस्सा लेते हुए अपने खेल का प्रदर्शन किया। यह उस स्तर का नहीं रहा, कि पुरस्कार मिल सके। इससे निराशा हुई। इस परिस्थिति में परिवार ने सकारात्मक सहयोग किया। मुझे घर की जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुक्त कर दिया। घर का कामकाज परिवार के सदस्यों खासकर सास ने संभाला। बेटी की जिम्मेदारी भी परिवार ही संभाल रहा है। मुझे खेलने के प्रोत्साहित कर हौसला बढ़ाया।
परिवार के इस सहयोग से फिर तीरंदाजी शुरू की। अब दिन भर अभ्यास का पूरा समय मिलता है। यही नहीं, परिवार से दूर भी होना पड़ा है। यही सबसे बड़ा भावुक समय व परेशानी भी है। अपनों के होते हुए उनसे अलग रहना पड़ रहा है, मगर कुछ करने के लिए यह समझौता करना पड़ रहा है। अपनी बेटी से मिलने का कभी-कभार ही समय मिल पाता है। अब चैंपियनशिप से लौटने पर बेटी व परिवार से मुलाकात हो पाई है।
खेल के साथ पढ़ाई भी शुरू की
अब खेल के साथ पढ़ाई भी शुरू कर दी है। पंजाबी विवि से एमकॉम कर रही हूं। यहीं रहकर कोच सुरेंद्र सिंह रंधावा की देखरेख में तीरंदाजी का अभ्यास कर रही हूं। स्पर्धा व अभ्यास के लिए घर-परिवार से अलग रहकर मुकाबले पर ध्यान बनाया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले रजत पदक के बाद अब लक्ष्य एशियन खेल हैं। यहां गोल्ड जीतना है।