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Rohtak News: प्रदूषण के कारण समय से पहले जन्म ले रहे बच्चे
Sun, 23 Nov 2025 02:52 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 23 Nov 2025 02:52 AM IST
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20...पीजीआई गायनी विभाग की अध्यक्ष डॉ. पुष्पा दहिया।
अभिषेक कीरत
रोहतक। प्रदेश में वायु प्रदूषण का असर गर्भवती महिलाओं और शिशुओं पर भी पड़ने लगा है। बच्चे समय से पहले जन्म ले रहे हैं। हवा में घुला जहर सांसों के जरिए शरीर में जा रहा है। यह खून में मिलकर गर्भस्थ शिशु तक पहुंच रहा है। पीजीआई रोहतक के गायनी विभाग की अध्यक्ष डॉ. पुष्पा दहिया ने बताया कि यहां एक साल में 13,500 महिलाओं की डिलीवरी हुई। इनमें से 18 प्रतिशत यानि 2430 बच्चे समय से पहले जन्मे।
पिछले कुछ दिनों से हवा की गुणवत्ता खराब है। इससे खांसी-जुकाम, अस्थमा की समस्याएं बढ़ गई हैं। यह स्थिति गर्भवती के लिए नुकसानदायक होती है। ज्यादा खांसी का भी गर्भ पर असर पड़ता है और प्रदूषण बच्चे के समय से पहले जन्म लेने का कारण बनता है। इसके अलावा, महिला को हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, मलेरिया, डेंगू होने पर भी समय से पहले बच्चे के जन्म लेने की संभावना रहती है।
डॉ. दहिया के मुताबिक पैदा होने वाले बच्चों को भी तीन तरह से बांटा जा सकता है। 36 सप्ताह से पहले जन्म लेने वाले बच्चे को प्रीमैच्योर कहा जाता है। 28 सप्ताह से पहले, 28 से 32 सप्ताह व 37 सप्ताह से पहले जन्मे बच्चे शामिल हैं। इनमें से सिर्फ 34 से 36 सप्ताह के बीच पैदा होने वाले बच्चों को ज्यादा समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। बच्चा जितना जल्दी पैदा होगा, जोखिम उतना ही अधिक होगा। संवाद
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ऐसे सावधानी बरतें
डॉ. पुष्पा दहिया ने बताया कि नियमित जांच व डॉक्टर की सलाह से दवाई लेकर प्री-मैच्योर डिलीवरी को कम किया जा सकता है। एनिमिया ग्रस्त महिलाओं के जागरूक होने से प्री-मैच्योर डिलीवरी से बचा जा सकता है। हरी सब्जियां, दूध, लस्सी के सेवन से पोषण की कमी पूरी की जा सकती है।
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प्री-मैच्योर बच्चों को आती हैं ये समस्याएं
समय पूर्व जन्मे बच्चे बाहरी तापमान सहन नहीं कर पाते हैं। उनमें हाइपोथेरेमिया, हाइपरग्लेसेमिया, पीलिया व इंफेक्शन होने का खतरा अधिक रहता है। इन्हें अधिक देखभाल की आवश्यकता पड़ती है। कमजोर होने के कारण उनके रेटिना यानि देखने की शक्ति में भी कमी आ सकती है। इंफेक्शन जल्दी होने की आशंका रहती है। बाल्यावस्था में ध्यान न देने पर आईक्यू कम हो सकता है।
गर्भवतियों के लिए हानिकारक है प्रदूषण
प्रदूषण महिलाओं में प्री-मैच्योर डिलीवरी का कारण बन सकता है। प्रदूषण के कारण महिलाओं को इंफेक्शन का खतरा रहता है। स्वास्थ्य खराब होने से महिला पोषण नहीं ले पाती है। इससे इम्युनिटी कम हो जाती है। शरीर में विटामिन व प्रोटिन जैसे पोषक तत्व कम हो जाते हैं। इससे बच्चे को भी पोषण नहीं मिल पाता है। प्रदूषण के कारण प्लेसेंटा (गर्भाशय में बनने वाला एक अस्थायी अंग) बच्चे तक ऑक्सीजन भी सही से नहीं पहुंचा पाता है।
- डॉ. सुरेंद्र मलिक, गायनी विभाग, नागरिक अस्पताल
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रोहतक। प्रदेश में वायु प्रदूषण का असर गर्भवती महिलाओं और शिशुओं पर भी पड़ने लगा है। बच्चे समय से पहले जन्म ले रहे हैं। हवा में घुला जहर सांसों के जरिए शरीर में जा रहा है। यह खून में मिलकर गर्भस्थ शिशु तक पहुंच रहा है। पीजीआई रोहतक के गायनी विभाग की अध्यक्ष डॉ. पुष्पा दहिया ने बताया कि यहां एक साल में 13,500 महिलाओं की डिलीवरी हुई। इनमें से 18 प्रतिशत यानि 2430 बच्चे समय से पहले जन्मे।
पिछले कुछ दिनों से हवा की गुणवत्ता खराब है। इससे खांसी-जुकाम, अस्थमा की समस्याएं बढ़ गई हैं। यह स्थिति गर्भवती के लिए नुकसानदायक होती है। ज्यादा खांसी का भी गर्भ पर असर पड़ता है और प्रदूषण बच्चे के समय से पहले जन्म लेने का कारण बनता है। इसके अलावा, महिला को हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, मलेरिया, डेंगू होने पर भी समय से पहले बच्चे के जन्म लेने की संभावना रहती है।
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डॉ. दहिया के मुताबिक पैदा होने वाले बच्चों को भी तीन तरह से बांटा जा सकता है। 36 सप्ताह से पहले जन्म लेने वाले बच्चे को प्रीमैच्योर कहा जाता है। 28 सप्ताह से पहले, 28 से 32 सप्ताह व 37 सप्ताह से पहले जन्मे बच्चे शामिल हैं। इनमें से सिर्फ 34 से 36 सप्ताह के बीच पैदा होने वाले बच्चों को ज्यादा समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। बच्चा जितना जल्दी पैदा होगा, जोखिम उतना ही अधिक होगा। संवाद
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ऐसे सावधानी बरतें
डॉ. पुष्पा दहिया ने बताया कि नियमित जांच व डॉक्टर की सलाह से दवाई लेकर प्री-मैच्योर डिलीवरी को कम किया जा सकता है। एनिमिया ग्रस्त महिलाओं के जागरूक होने से प्री-मैच्योर डिलीवरी से बचा जा सकता है। हरी सब्जियां, दूध, लस्सी के सेवन से पोषण की कमी पूरी की जा सकती है।
प्री-मैच्योर बच्चों को आती हैं ये समस्याएं
समय पूर्व जन्मे बच्चे बाहरी तापमान सहन नहीं कर पाते हैं। उनमें हाइपोथेरेमिया, हाइपरग्लेसेमिया, पीलिया व इंफेक्शन होने का खतरा अधिक रहता है। इन्हें अधिक देखभाल की आवश्यकता पड़ती है। कमजोर होने के कारण उनके रेटिना यानि देखने की शक्ति में भी कमी आ सकती है। इंफेक्शन जल्दी होने की आशंका रहती है। बाल्यावस्था में ध्यान न देने पर आईक्यू कम हो सकता है।
गर्भवतियों के लिए हानिकारक है प्रदूषण
प्रदूषण महिलाओं में प्री-मैच्योर डिलीवरी का कारण बन सकता है। प्रदूषण के कारण महिलाओं को इंफेक्शन का खतरा रहता है। स्वास्थ्य खराब होने से महिला पोषण नहीं ले पाती है। इससे इम्युनिटी कम हो जाती है। शरीर में विटामिन व प्रोटिन जैसे पोषक तत्व कम हो जाते हैं। इससे बच्चे को भी पोषण नहीं मिल पाता है। प्रदूषण के कारण प्लेसेंटा (गर्भाशय में बनने वाला एक अस्थायी अंग) बच्चे तक ऑक्सीजन भी सही से नहीं पहुंचा पाता है।
- डॉ. सुरेंद्र मलिक, गायनी विभाग, नागरिक अस्पताल