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संगीन मामलों में उलझी पुलिस पर आरटीआई की मार हर माह विभाग के पास आ रहीं 100 से ज्यादा आरटीआई
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Tue, 25 Aug 2015 02:26 AM IST
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आरटीआई से भ्रष्टाचार पर लगाम लगी या नहीं, यह तो अधिकारी ही बता सकते हैं। लेकिन यही आरटीआई पुलिस के गले की फांस जरूर बन गई है।
शहर के लोग अजीबोगरीब जानकारी मांगकर पुलिस महकमे का काम बढ़ा रहे हैं। एक ओर शहर में हो रहीं ताबड़तोड़ वारदात जहां पुलिस का पसीना छुड़ा रही हैं, वहीं प्रतिदिन थोक के भाव विभाग के पास आ रहीं आरटीआई चैन छीन रही हैं। पिछले आठ महीने में पुलिस महकमे से मांगी गईं 1100 आरटीआई इसका प्रमाण हैं। एसपी कार्यालय में दिनभर फरियादियों की भीड़ लगी रहती है।
इनकी शिकायतें सुनने में एससी को शाम के पांच बज जाते हैं। वहीं, आरटीआई में मांगी गई अधिकतर जानकारी भी एसपी के क्षेत्राधिकार से जुड़ी होती है। ऐसे में उनके सामने यह समस्या रहती है कि वे पहले फरियादियों की सुनें या आरटीआई का जवाब दें। इतना ही डीएसपी और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को भी आईटीआई क ी जवाबी फाइल पर हस्ताक्षर करने पड़ते हैं।
85 फीसदी मांग रहे शिकायत की नकल
विभाग के पास आईं आरटीआई पर नजर डालें तो अधिकतर लोग अपनी शिकायतों पर की गई कार्रवाई के बारे में सूचना मांगते हैं। करीब 85 फीसदी आवेदकों ने अपनी शिकायत की नकल कॉपी मांगी है। ताकि वह देख सकें कि एसपी को सौंपी गई शिकायत पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की। इसके साथ ही कुछ लोग अपने खिलाफ की गई शिकायत की कॉपी भी मांगते हैं, ताकि भविष्य में उसे दिखाकर अपना बचाव कर सकें।
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हर माह 100 से ज्यादा आवेदन
जनवरी 2015 से अब तक विभाग के पास करीब 1100 आईटीआई आईं हैं। आईटीआई अधिकारी के अनुसार हर माह करीब 100 आरटीआई आ ही जातीं हैं।
मांगते हैैं अजीब सूचनाएं -
चालान की पर्ची गुम हुई तो मांग डाला जिलेभर का डाटा
रेवाड़ी के बावल निवासी पूर्ण सिंह ने चालान की पर्ची गुम हो गई। उसने उस दिन पूरे जिले में हुए चालान का ब्योरा पुलिस महकमे से मांग लिया, वह भी हर थाने का अलग-अलग।
दरअसल, 21 जुलाई को पूर्ण सिंह का यातायात पुलिस ने चालान बना दिया था। इसके बाद पूर्ण सिंह की जेब से चालान की पर्ची खो गई। इसके बाद उसने आरटीआई लगाकर 21 जुलाई को जिलेभर में काटे गए चालान का ब्योरा मांग लिया।
एसपी को सरकारी गाड़ी क्यों दी गई
प्रेमनगर के युवक दीपक ने एसी को मिली सरकारी गाड़ी पर ही सवाल उठा दिये। उसने आरटीआई लगाकर पूछा कि एसपी को सरकारी गाड़ी कि स उद्देश्य से दी गई है। सवाल यही खत्म नहीं हो जाता, उसने पूछा कि पिछले तीन साल में गाड़ी कहां-कहां गई।
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शहर के लोग अजीबोगरीब जानकारी मांगकर पुलिस महकमे का काम बढ़ा रहे हैं। एक ओर शहर में हो रहीं ताबड़तोड़ वारदात जहां पुलिस का पसीना छुड़ा रही हैं, वहीं प्रतिदिन थोक के भाव विभाग के पास आ रहीं आरटीआई चैन छीन रही हैं। पिछले आठ महीने में पुलिस महकमे से मांगी गईं 1100 आरटीआई इसका प्रमाण हैं। एसपी कार्यालय में दिनभर फरियादियों की भीड़ लगी रहती है।
इनकी शिकायतें सुनने में एससी को शाम के पांच बज जाते हैं। वहीं, आरटीआई में मांगी गई अधिकतर जानकारी भी एसपी के क्षेत्राधिकार से जुड़ी होती है। ऐसे में उनके सामने यह समस्या रहती है कि वे पहले फरियादियों की सुनें या आरटीआई का जवाब दें। इतना ही डीएसपी और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को भी आईटीआई क ी जवाबी फाइल पर हस्ताक्षर करने पड़ते हैं।
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85 फीसदी मांग रहे शिकायत की नकल
विभाग के पास आईं आरटीआई पर नजर डालें तो अधिकतर लोग अपनी शिकायतों पर की गई कार्रवाई के बारे में सूचना मांगते हैं। करीब 85 फीसदी आवेदकों ने अपनी शिकायत की नकल कॉपी मांगी है। ताकि वह देख सकें कि एसपी को सौंपी गई शिकायत पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की। इसके साथ ही कुछ लोग अपने खिलाफ की गई शिकायत की कॉपी भी मांगते हैं, ताकि भविष्य में उसे दिखाकर अपना बचाव कर सकें।
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हर माह 100 से ज्यादा आवेदन
जनवरी 2015 से अब तक विभाग के पास करीब 1100 आईटीआई आईं हैं। आईटीआई अधिकारी के अनुसार हर माह करीब 100 आरटीआई आ ही जातीं हैं।
मांगते हैैं अजीब सूचनाएं -
चालान की पर्ची गुम हुई तो मांग डाला जिलेभर का डाटा
रेवाड़ी के बावल निवासी पूर्ण सिंह ने चालान की पर्ची गुम हो गई। उसने उस दिन पूरे जिले में हुए चालान का ब्योरा पुलिस महकमे से मांग लिया, वह भी हर थाने का अलग-अलग।
दरअसल, 21 जुलाई को पूर्ण सिंह का यातायात पुलिस ने चालान बना दिया था। इसके बाद पूर्ण सिंह की जेब से चालान की पर्ची खो गई। इसके बाद उसने आरटीआई लगाकर 21 जुलाई को जिलेभर में काटे गए चालान का ब्योरा मांग लिया।
एसपी को सरकारी गाड़ी क्यों दी गई
प्रेमनगर के युवक दीपक ने एसी को मिली सरकारी गाड़ी पर ही सवाल उठा दिये। उसने आरटीआई लगाकर पूछा कि एसपी को सरकारी गाड़ी कि स उद्देश्य से दी गई है। सवाल यही खत्म नहीं हो जाता, उसने पूछा कि पिछले तीन साल में गाड़ी कहां-कहां गई।