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Rohtak News: पुलिस ने झुग्गियों में जाकर की जांच, असम की मिली आईडी
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संवाद न्यूज एजेंसी
महम (रोहतक)। महम की झुग्गियों में रह रहे 10 परिवार रोहिंग्या या बांग्लादेशी हैं या नहीं, इसकी जांच करने के लिए सोमवार को पुलिस मौके पर पहुंची और उनके कागजात जांचे। जांच में असम की आईडी, आधार कार्ड व पैनकार्ड मिले। इसके बाद रिकाॅर्ड लेकर पुलिस लौट आई। थाना प्रभारी सुरेश पहलवान का कहना है कि आला अधिकारियों को पूरी रिपोर्ट सौंप दी है।
शहर के अशोक नगर के पास झुग्गी बनाकर 10 से ज्यादा परिवार रह रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने उनको रोहिंग्या बताकर रविवार को वहां से एक सप्ताह में चले जाने का फरमान सुनाया था। इसके बाद हरकत में आई पुलिस सोमवार को झुग्गी-झोपड़ियों में पहुंची और जांच पड़ताल की।
मोहम्मद कैरूल, हैदर अली, संदुल इस्लाम, हिकमत अली व हुसैन अली ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वे असम के बरपेटा जिले केरामापारा पाम गांव के रहने वाले हैं। वे रोहिंग्या या बांग्लादेशी नहीं बल्कि भारतीय हैं। कूड़ा बीनकर बड़े शहरों में बेच देते हैं।
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खेत मालिक बोला-कुछ लोग चमका रहे हैं राजनीति
खेत मालिक जसवंत ढाका ने बताया कि उनके खेत में 10 परिवार पिछले पांच साल से झुग्गी बनाकर रह रहे हैं। गर्भवती व शिशुओं का सरकारी अस्पताल में टीकाकरण किया जाता है। हर साल दो बार पुलिस वेरिफिकेशन होती है। अपने त्योहार मनाने के लिए वे अपने गांव जाते रहते हैं। जमीन मालिक का कहना है कि यह सब कुछ राजनीति से प्रेरित हैं, इसलिए रोहिंग्या बताकर बाहर निकालने की बात कह रहे हैं।
फर्जी हो सकती है आईडी, जांच करवाए पुलिस
पंचायत के अध्यक्ष एवं वार्ड 14 के पार्षद विकास श्योराण का कहना है कि ये परिवार बांग्लादेशी हैं। इनकी आईडी की जांच होनी चाहिए। कहीं फर्जी आईडी बनवाकर प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा है। इनकी भाषा व शक्ल सूरत बांग्लादेश की है, न की असम की।
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महम (रोहतक)। महम की झुग्गियों में रह रहे 10 परिवार रोहिंग्या या बांग्लादेशी हैं या नहीं, इसकी जांच करने के लिए सोमवार को पुलिस मौके पर पहुंची और उनके कागजात जांचे। जांच में असम की आईडी, आधार कार्ड व पैनकार्ड मिले। इसके बाद रिकाॅर्ड लेकर पुलिस लौट आई। थाना प्रभारी सुरेश पहलवान का कहना है कि आला अधिकारियों को पूरी रिपोर्ट सौंप दी है।
शहर के अशोक नगर के पास झुग्गी बनाकर 10 से ज्यादा परिवार रह रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने उनको रोहिंग्या बताकर रविवार को वहां से एक सप्ताह में चले जाने का फरमान सुनाया था। इसके बाद हरकत में आई पुलिस सोमवार को झुग्गी-झोपड़ियों में पहुंची और जांच पड़ताल की।
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मोहम्मद कैरूल, हैदर अली, संदुल इस्लाम, हिकमत अली व हुसैन अली ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वे असम के बरपेटा जिले केरामापारा पाम गांव के रहने वाले हैं। वे रोहिंग्या या बांग्लादेशी नहीं बल्कि भारतीय हैं। कूड़ा बीनकर बड़े शहरों में बेच देते हैं।
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खेत मालिक बोला-कुछ लोग चमका रहे हैं राजनीति
खेत मालिक जसवंत ढाका ने बताया कि उनके खेत में 10 परिवार पिछले पांच साल से झुग्गी बनाकर रह रहे हैं। गर्भवती व शिशुओं का सरकारी अस्पताल में टीकाकरण किया जाता है। हर साल दो बार पुलिस वेरिफिकेशन होती है। अपने त्योहार मनाने के लिए वे अपने गांव जाते रहते हैं। जमीन मालिक का कहना है कि यह सब कुछ राजनीति से प्रेरित हैं, इसलिए रोहिंग्या बताकर बाहर निकालने की बात कह रहे हैं।
फर्जी हो सकती है आईडी, जांच करवाए पुलिस
पंचायत के अध्यक्ष एवं वार्ड 14 के पार्षद विकास श्योराण का कहना है कि ये परिवार बांग्लादेशी हैं। इनकी आईडी की जांच होनी चाहिए। कहीं फर्जी आईडी बनवाकर प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा है। इनकी भाषा व शक्ल सूरत बांग्लादेश की है, न की असम की।