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Rohtak News: कृत्रिम गर्भाधान की योजना पशुपालकों के लिए सिद्ध
Thu, 27 Apr 2023 05:53 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 27 Apr 2023 05:53 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। प्रदेश के पशुपालन विभाग एवं हरियाणा पशुधन बोर्ड की ओर से क्रियान्वित की जा रही कृत्रिम गर्भाधान की योजना पशुपालकों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। इस विधि द्वारा गायों की विभिन्न नस्लों में कृत्रिम गर्भाधान से सुधार किया जाता है। जिससे दुग्ध उत्पादन बढने के साथ-साथ बेसहारा पशुओं की संख्या पर नियंत्रण किया जा सकता है।
उपायुक्त अजय कुमार ने बताया कि इस विधि द्वारा एक्स व वाई क्रोमोसोम्स को मशीन द्वारा अलग-अलग किया जाता है। नर सिमन को एक्स व वाई में अलग-अलग करके उसके एक्स क्रोमोसोम्स के सिमन स्ट्रॉ तैयार किए जाते है तथा इन एक्स क्रोमोसोम्स वाले स्पर्म को मादा के गर्भाषय में कृत्रिम गर्भाधान की विधि द्वारा डाल दिया जाता है। इससे केवल बछड़ी (मादा) ही पैदा होती है। इस विधि से नस्ल सुधार किया जाता है। यह विधि अपनाने से दूध उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है तथा सडकों व अन्य स्थानों पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं की संख्या पर भी काफी हद तक नियंत्रण किया जा सकता है। क्योंकि बेसहारा पशुओं में ज्यादातर नर पशु ही होते हैं।
विभाग द्वारा महंगे दामों में होता है सिमन स्ट्रॉ
उपायुक्त ने बताया कि विभाग द्वारा बहुत महंगे दामों में सिमन स्ट्रॉ आयात किया जाता है तथा पशुपालकों को अनुदान देकर प्रति स्ट्रॉ सिर्फ 200 रुपये में उपलब्ध करवाया जाता है। इसे प्रत्येक पशु संस्था में भरपूर मात्रा में नियमित रूप से उपलब्ध करवाया जाता है। यह विधि अभी केवल गायों में लागू की गई है। जिले में वर्ष 2022-23 के दौरान इस विधि से लगभग 367 बछड़ियां पैदा हुई हैं तथा इसी दौरान इस विधि से जिले में 26 बछड़े भी पैदा हुए है। इस विधि से एक सौ में से लगभग 89 से 90 तक बछड़ियां (मादा) पैदा होती है तथा केवल 10 से 11 नर बछड़े भी पैदा हो सकते है। कभी-कभी वाई क्रोमोसोम्स अलग नहीं हो पाते। इस विधि से पैदा नर बछड़ों की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है, जो बड़े होने पर ब्रीडिंग में इस्तेमाल होते हैं।
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रोहतक। प्रदेश के पशुपालन विभाग एवं हरियाणा पशुधन बोर्ड की ओर से क्रियान्वित की जा रही कृत्रिम गर्भाधान की योजना पशुपालकों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। इस विधि द्वारा गायों की विभिन्न नस्लों में कृत्रिम गर्भाधान से सुधार किया जाता है। जिससे दुग्ध उत्पादन बढने के साथ-साथ बेसहारा पशुओं की संख्या पर नियंत्रण किया जा सकता है।
उपायुक्त अजय कुमार ने बताया कि इस विधि द्वारा एक्स व वाई क्रोमोसोम्स को मशीन द्वारा अलग-अलग किया जाता है। नर सिमन को एक्स व वाई में अलग-अलग करके उसके एक्स क्रोमोसोम्स के सिमन स्ट्रॉ तैयार किए जाते है तथा इन एक्स क्रोमोसोम्स वाले स्पर्म को मादा के गर्भाषय में कृत्रिम गर्भाधान की विधि द्वारा डाल दिया जाता है। इससे केवल बछड़ी (मादा) ही पैदा होती है। इस विधि से नस्ल सुधार किया जाता है। यह विधि अपनाने से दूध उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है तथा सडकों व अन्य स्थानों पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं की संख्या पर भी काफी हद तक नियंत्रण किया जा सकता है। क्योंकि बेसहारा पशुओं में ज्यादातर नर पशु ही होते हैं।
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विभाग द्वारा महंगे दामों में होता है सिमन स्ट्रॉ
उपायुक्त ने बताया कि विभाग द्वारा बहुत महंगे दामों में सिमन स्ट्रॉ आयात किया जाता है तथा पशुपालकों को अनुदान देकर प्रति स्ट्रॉ सिर्फ 200 रुपये में उपलब्ध करवाया जाता है। इसे प्रत्येक पशु संस्था में भरपूर मात्रा में नियमित रूप से उपलब्ध करवाया जाता है। यह विधि अभी केवल गायों में लागू की गई है। जिले में वर्ष 2022-23 के दौरान इस विधि से लगभग 367 बछड़ियां पैदा हुई हैं तथा इसी दौरान इस विधि से जिले में 26 बछड़े भी पैदा हुए है। इस विधि से एक सौ में से लगभग 89 से 90 तक बछड़ियां (मादा) पैदा होती है तथा केवल 10 से 11 नर बछड़े भी पैदा हो सकते है। कभी-कभी वाई क्रोमोसोम्स अलग नहीं हो पाते। इस विधि से पैदा नर बछड़ों की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है, जो बड़े होने पर ब्रीडिंग में इस्तेमाल होते हैं।
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