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Rohtak News: पितृ पक्ष श्राद्ध 18 से, पितरों की पूजा से होती है कुल की उन्नति

Sat, 14 Sep 2024 11:22 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 14 Sep 2024 11:22 PM IST
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Pitru Paksha Shraddha from 18th, worship of ancestors brings progress of the family
14सीटीके28..आचार्य मनोज मिश्रा, दुर्गा भवन मंदिर। संवाद
रोहतक। हिंदू धार्मिक शास्त्रों में पितरों को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि बिना पितरों की कृपा के व्यक्ति का उद्धार संभव नहीं है। सनातन धर्म में पितरों को प्रसन्न करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में उनके श्राद्ध व तर्पण करने की परंपरा है। 16 दिन तक चलने वाले पितृ पक्ष का समापन पितृ अमावस्या के दिन किया जाता है। इस बार पितृ पक्ष श्राद्ध 18 सितंबर बुधवार से प्रारंभ होकर अमावस्या 2 अक्टूबर, बुधवार के दिन संपन्न होंगे। पितृ अमावस्या को सर्वपितृ श्राद्ध और पितृ विसर्जन का दिन भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष के दिन पृथ्वी लोक पर आए पितरों को अमावस्या के दिन विदाई दी जाती है। इस दिन पितृ वापस अपने लोक लौट जाते हैं।
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यह भी धार्मिक मान्यता है कि पितृ अमावस्या के दिन, पितरों से आशीर्वाद मांगकर उन्हें सम्मान सहित विदा करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। दुर्गा भवन मंदिर के पुजारी आचार्य मनोज मिश्रा ने बताया कि पितृ अमावस्या के दिन, उन सभी लोगों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु की तिथि परिवारजनों को पता नहीं होती है। अमावस्या के दिन, उन लोगों का श्राद्ध भी किया जा सकता है, जिनका श्राद्ध पितृ पक्ष के बाकी दिनों में किसी वजह से करना रह गया हो।
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श्राद्ध के सोलह दिन
18 सितंबर बुधवार भाद्रपद पूर्णिमा, सुबह 8:05 तक, इसके बाद प्रतिपदा का श्राद्ध।
19 सितंबर वीरवार, द्वितीय श्राद्ध, पंचक समाप्त।
20 सितंबर शुक्रवार, तृतीय श्राद्ध।
21 सितंबर शनिवार, चतुर्थी श्राद्ध- संकष्टी चतुर्थी।
22 सितंबर रविवार, पंचमी श्राद्ध।
23 सितंबर सोमवार, षष्टी श्राद्ध।
24 सितंबर मंगलवार, सप्तमी श्राद्ध।
25 सितंबर बुधवार, महालक्ष्मी व्रत संपन्न, अष्टमी श्राद्ध।
26 सितंबर वीरवार, नवमी श्राद्ध।
27 सितंबर शुक्रवार, दशमी श्राद्ध।
28 सितंबर शनिवार, इंदिरा एकादशी श्राद्ध।
29 सितंबर रविवार, द्वादशी श्राद्ध।
30 सितंबर सोमवार, त्रयोदशी श्राद्ध, प्रदोष व्रत।
1 अक्टूबर मंगलवार, चतुर्दशी श्राद्ध।
2 अक्टूबर बुधवार, अश्विन अमावस्या श्राद्ध, सर्वपितृ श्राद्ध।

इस नियम से करें पितृ पक्ष का समापन
-सुबह जल्दी उठकर पानी में गंगाजल मिलाकर नहाएं।
-साफ कपड़े पहनकर अपने पितरों का श्राद्ध करें।
-इस दिन घर की महिलाएं, नहा-धोकर ही भोजन पकाएं।
-ब्राह्मण को भोजन अवश्य कराएं।
-अगर अमावस्या के दिन, आप किसी का श्राद्ध नहीं भी कर रहे हैं तो भी इस दिन, सात्विक भोजन ही करें।


पितृ अमावस्या पर रखें इन बातों का विशेष ध्यान
-सर्व पितृ अमावस्या के दिन पंचबली और हवन अवश्य कराएं।
-ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद में घर के सभी सदस्य, एक साथ भोजन करें।
-भोजन करने के बाद, पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना अवश्य करें।
-गाय, कुत्ते और कौआ को भोजन अवश्य खिलाएं।
-हरे चारे का दान करें ।
-पीपल के पेड़ का पूजन अवश्य करें।
-पूर्वजों के नाम पर निर्धनों को वस्त्र दान करना चाहिए।
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