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विजिटिंग कार्ड पर फोन नंबर लिखा होना प्रेम-प्रसंग का सबूत नहीं : कोर्ट
Sat, 09 Aug 2025 12:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sat, 09 Aug 2025 12:20 AM IST
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रोहतक। कोर्ट का कहना है कि महिला के विजिटिंग कार्ड पर दूसरे का फोन नंबर लिखा होना उसके प्रेम-प्रसंग का सबूत नहीं है। इस आधार पर व्यभिचार का आरोप भी गलत है। ऐसा कहकर पिता अपने नाबालिग बच्चों की देखभाल के दायित्व से मुक्त नहीं हो सकता। कोर्ट ने बच्चों के लिए 4,000 रुपये प्रतिमाह देने का आदेश दिया।
एएसजे संदीप दुग्गल की कोर्ट ने यह आदेश दिया। महिला ने कोर्ट को बताया था कि जुलाई 2024 में उसने अर्जी दायर कर गुजारा भत्ता और पति के मकान में रहने के लिए हिस्सा मांगा था। कोर्ट ने मांग खारिज कर दी जबकि वह दोनों नाबालिग बच्चों का पालन-पोषण कर रही है।
महिला ने पति पर घर से निकालने का आरोप लगाते हुए सेशन कोर्ट में की गई अपील में कहा कि उसके ऊपर लगाए व्यभिचार के आरोपों का कोई साक्ष्य नहीं है। निचली अदालत को भरण पोषण व साझे घर में रहने की अनुमति देनी चाहिए थी। निचली अदालत का फैसला रद्द हो।
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जवाब में पति के वकील ने दलील दी कि व्यभिचार के आधार पर ही पत्नी से तलाक मांगा था। इसमें उसके प्रेमी का जिक्र भी था। हालांकि, थाने में दोनों पक्षों में समझौता हो गया और पति सपरिवार दूसरी जगह किराये पर रहने लगा। लेकिन, वहां भी पत्नी का दोस्त आने लगा।
दलील दी कि पत्नी ने विजिटिंग कार्ड पर अपने प्रेमी का फोन नंबर लिखा रखा है। कोर्ट ने कहा कि विजिटिंग कार्ड में गैर का नंबर लिखाना उनके प्रेमी-प्रेमिका होने की पुष्टि नहीं करता।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी दलीलों से पति अपने 5 वर्ष से छोटे दोनों बच्चों की देखभाल और देखरेख की कानूनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता है। कोर्ट ने पिता को हर महीने 2,000 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से 4,000 रुपये पत्नी को चुकाने का आदेश दिया।
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एएसजे संदीप दुग्गल की कोर्ट ने यह आदेश दिया। महिला ने कोर्ट को बताया था कि जुलाई 2024 में उसने अर्जी दायर कर गुजारा भत्ता और पति के मकान में रहने के लिए हिस्सा मांगा था। कोर्ट ने मांग खारिज कर दी जबकि वह दोनों नाबालिग बच्चों का पालन-पोषण कर रही है।
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महिला ने पति पर घर से निकालने का आरोप लगाते हुए सेशन कोर्ट में की गई अपील में कहा कि उसके ऊपर लगाए व्यभिचार के आरोपों का कोई साक्ष्य नहीं है। निचली अदालत को भरण पोषण व साझे घर में रहने की अनुमति देनी चाहिए थी। निचली अदालत का फैसला रद्द हो।
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जवाब में पति के वकील ने दलील दी कि व्यभिचार के आधार पर ही पत्नी से तलाक मांगा था। इसमें उसके प्रेमी का जिक्र भी था। हालांकि, थाने में दोनों पक्षों में समझौता हो गया और पति सपरिवार दूसरी जगह किराये पर रहने लगा। लेकिन, वहां भी पत्नी का दोस्त आने लगा।
दलील दी कि पत्नी ने विजिटिंग कार्ड पर अपने प्रेमी का फोन नंबर लिखा रखा है। कोर्ट ने कहा कि विजिटिंग कार्ड में गैर का नंबर लिखाना उनके प्रेमी-प्रेमिका होने की पुष्टि नहीं करता।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी दलीलों से पति अपने 5 वर्ष से छोटे दोनों बच्चों की देखभाल और देखरेख की कानूनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता है। कोर्ट ने पिता को हर महीने 2,000 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से 4,000 रुपये पत्नी को चुकाने का आदेश दिया।