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लगातार सूअरों की हो रही मौत पर अब सरकार को अलर्ट करेगा पीजीआईएमएस

Thu, 25 Aug 2022 02:12 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 25 Aug 2022 02:12 AM IST
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PGIMS will now alert the government on the continuous death of pigs
डॉ. ध्रुव चौधरी। अमर उजाला
अफ्रीकन स्वाइन फ्लू महामारी का रूप न ले, इसके लिए सख्ती जरूरी है। पशुपालन व स्वास्थ्य विभाग इस पर संयुक्त रूप से कार्य करें। क्योंकि सूअरों का संक्रमण इनके पालकों के माध्यम से मनुष्य में आ सकता है। शुरुआत में ही इसे जांच कर रोकना अनिवार्य है। जरूरी है कि संक्रमित सूअर पालकों की जांच हो और उन्हें एक सप्ताह के लिए आइसोलेट किया जाए। इस संबंध में पीजीआईएमएस के पीसीसीएम विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी सरकार को पत्र भेज रहें हैं, ताकि उच्च स्तर पर कमेटी गठित हो और संक्रमण को फैलने से पहले ही रोका जा सके।
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सीनियर प्रोफेसर डॉ. ध्रुव चौधरी ने बताया कि संक्रमित सूअरों के नजदीक रहने वालों को अधिक अलर्ट रहने की जरूरत है। क्योंकि पशुओं से मनुष्य में वायरस जब आता है तो यह अधिक खतरनाक होता है। अफ्रीकन स्वाइन फ्लू नया वैरिएंट है। एक साथ कई सूअरों का अपने आप मरना हेल्थ इमरजेंसी है। इसके लिए वन हेल्थ कंसेप्ट पर काम करना होगा। जरूरी है कि पशुपालन और स्वास्थ्य विभाग एक साथ मिलकर काम करें। पशुपालन विभाग को जीवित व मरने वाले सूअरों की जांच करनी चाहिए। इसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को देनी चाहिए, ताकि उसी हिसाब से गाइडलाइन बने। मृत सूअरों को सीधे दफन करना सही नहीं है। उनको जमीन में आठ से दस फीट गहरे गड्ढे में दबाना जरूरी है।
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सुरक्षा गाइडलाइन का रखे ध्यान
सूअर पालक व इसे दफन करने वाले व्यक्ति के लिए जरूरी है कि वह संक्रमण से स्वयं को सुरक्षित रखे। इसके लिए उसे ग्लब्ज पहने के अलावा मास्क भी पहना जरूरी है। जो भी इनके संपर्क में हो उसे चिकित्सक के संपर्क में रहना चाहिए। डॉ. चौधरी ने बताया कि 20-30 साल से पक्षियों व पशुओं से संक्रमण मनुष्यों में आ रहा है और घातक सिद्ध होता है, इसलिए सूअरों के मरने को हलके में लेना सही नहीं है।
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नहरों में मिल रहे मृत सूअर भी गंभीर मामला
एक्सपर्ट ने बताया कि मृत सूअरों को नहर में डालना सही नहीं है। क्योंकि जनस्वास्थ्य विभाग बैक्टीरिया को पानी से समाप्त कर सकता है, वायरस को नहीं। पानी में वायरस की जांच करना भी इतना आसान नहीं है। सूअर पालकों को चाहिए कि वह मृत सूअरों की जानकारी विभाग को दें, ताकि वह नियमानुसार इनकी जांच करवा कर तरीके से दफनाएं। इससे बीमारी को आगे फैलने से रोका जा सकेगा।
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