{"_id":"6ab59790d1f1c505350f38dc","slug":"national-daughters-day-daughters-of-rohtak-bring-pride-to-the-state-and-the-nation-rohtak-news-c-17-ali1038-926129-2026-09-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"नेशनल डॉटर्स डे : रोहतक की बेटियां बनीं देश-प्रदेश की शान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नेशनल डॉटर्स डे : रोहतक की बेटियां बनीं देश-प्रदेश की शान
Fri, 25 Sep 2026 03:05 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Fri, 25 Sep 2026 03:05 AM IST
विज्ञापन
14. मनीषा यादव, फ्लाइंग ऑफिसर।
अमर उजाला/संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक/कलानौर। रोहतक की बेटियां शिक्षा, सेना, चिकित्सा और उद्यमिता सहित हर क्षेत्र में प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। उनकी उपलब्धियां परिवारों का गौरव बढ़ा रही हैं। ये सफलताएं समाज में सकारात्मक बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। बेटियां अब देश के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला बन चुकी हैं।
मेधा के दम पर भालौठ की बेटी ने सिडनी में शिलापट्ट पर लिखवाया नाम
वीर चक्र विजेता कैप्टन प्रह्लाद सिंह की पोती डॉ. सिंधु श्योराण 2022 में ऑस्ट्रेलिया में पीएचडी के लिए चयनित हुईं। उन्हें 1 करोड़ रुपये की फीस माफी और 25 लाख रुपये की स्कॉलरशिप मिली। जून 2026 में वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी ने उन्हें पीएचडी अवार्ड की। उन्होंने 3 मिनट थीसिस और जॉन कॉनरॉय पुरस्कार जीते। विश्वविद्यालय के सम्मान पट्ट में उनका नाम दर्ज हुआ। उनके 40 से अधिक शोध-पत्र भी प्रकाशित हुए हैं।
पिता का सपना पूरा करने को मनीषा ने भरी सफलता की उड़ान
एसआई पिता देवेंद्र का अफसर बिटिया का सपना पूरा करने के लिए मनीषा यादव ने रोहतक से प्रारंभिक पढ़ाई के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी और एमएससी की पढ़ाई पूरी की। वायु सेना की एफकैट परीक्षा में ऑल इंडिया छठीं रैंक हासिल की। अब वह हैदराबाद में पायलट की ट्रेनिंग ले रही हैं। मनीषा के दादा राव राजेंद्र सिंह भी फौज में रहे हैं। दादा की वर्दी और देशसेवा की परंपरा ने मनीषा को प्रेरित किया। मनीषा की उपलब्धि से दादी महेंद्रो देवी, मां पिंकी यादव और भाई मंदीप यादव भी खुश हैं। अब निगाहें उस दिन पर हैं जब पायलट की ट्रेनिंग पूरी कर मनीषा वायु सेना की जिम्मेदारी संभालेंगी।
विज्ञापन
मजदूरी कर पिता ने पढ़ाया, रेणु 13वीं रैंक हासिल कर बनीं डॉक्टर
कलानौर के रमेश और राजवंती ने मजदूरी कर बच्चों को पढ़ाया। बेटी रेणु ने 2011 में नीट में 13वीं रैंक हासिल की लेकिन एडमिशन इतना आसान नहीं था। तब पीजीआई में दाखिले के लिए आवेदन ऑफलाइन होते थे। फॉर्म कलानौर से स्पीड पोस्ट किया लेकिन छुट्टियों के कारण डाक समय से नहीं पहुंची। सैकड़ों फॉर्म रद्द हो गए। मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट गया। अशिक्षित होने के बावजूद पिता बेटी के भविष्य के लिए कोर्ट पहुंचे। कोर्ट के आदेश के बाद एमबीबीएस में दाखिले पाने वाले 4 विद्यार्थियों में रेणु बाला भी शामिल थीं। डॉ. रेणु बाला 2024 से पीजी की पढ़ाई कर रही हैं और एनेस्थीसिया में एमडी कर रही हैं। परिवार में दो बहनें और एक भाई हैं जो वर्तमान में एमबीबीएस कर रहे हैं।
दूध बेच मां ने पढ़ाया, अब सेवा का अध्याय लिख रहीं ममता
कलानौर की डॉ. ममता बहादुरगढ़ पीएचसी में मेडिकल अफसर हैं। मां पिंकी देवी ने दूध बेचकर पढ़ाया। लोगों ने ताने दिए, खर्च बहुत है, बीएससी कर लो। ममता ने घर पर 10 घंटे पढ़ाई की और 2019 में नीट क्लीयर कर हिमाचल के सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। 2024 में डॉक्टर बनने के बाद अब ममता मरीजों की सेवा करने के साथ भविष्य के सपनों को भी आगे बढ़ा रही हैं। वह आगामी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। वह अपने परिवार की पहली डॉक्टर हैं।
मां ने बेटियों को बनाया अपनी ताकत, एक डॉक्टर तो दूसरी इंजीनियर
हिसार में जन्मीं व करनाल में ब्याही गईं और कलानौर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाली सीएमओ डॉ. कमला वर्मा मेडिकल की पढ़ाई कर डॉक्टर बनीं। डॉ. कमला ने दोनों बेटियों अदिति और आसमां की पढ़ाई और परवरिश को प्राथमिकता दी। अदिति ने एमबीबीएस में गोल्ड मेडल हासिल किया और अब मेडिकल सर्जरी में पीजी कर रही हैं। छोटी बेटी आसमां इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही हैं। डॉ. कमला का मानना है कि जब परिवार बेटियों का हौसला बढ़ाता है तो वे सफलता की इबारत लिखती हैं।
खेल के मैदान में कीर्तिमान रच रहीं शहर की बेटियां
रोहतक। खेल के मैदान में रोहतक की बेटियां लगातार सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। अपनी मेहनत, प्रतिभा और संघर्ष के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। एक से बढ़कर एक उपलब्धि आज बेटियों के नाम है। संवाद
_________________________________________________
एशियन गेम्स में शहर की बेटी शैफाली ने खेली उम्दा पारी
शैफाली वर्मा भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार खिलाड़ी के रूप में जानी जाती हैं। आज पूरी दुनिया में भारतीय क्रिकेट की पोस्टर गर्ल हैं। धुआंधार बल्लेबाजी के लिए उन्हें लेडी सहवाग की संज्ञा दी गई है। शैफाली ने रोहतक की गलियों से निकल कर पहले आईपीएल और फिर भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई। हाल ही में उन्होंने एशियन गेम्स में भी भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
_________________________________________________
घुटने की चोट भी नहीं तोड़ पाई निधि का हौसला
किशनगढ़ गांव की रहने वाली डिस्कस थ्रो खिलाड़ी निधि रानी ने हाल ही में कॉमनवेल्थ खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। निधि के बाएं घुटने की तीन सर्जरी हो चुकी हैं। इसके बावजूद इन्होंने अपने खेल को प्रभावित नहीं होने दिया। निधि रेलवे में सीनियर सुपरिंटेंडेंट के पद पर कार्यरत हैं। 2025 में रांची में हुई दक्षिण एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था।
परवीन के मुक्कों से विपक्षी हो जाते हैं चित
रुड़की गांव की बेटी परवीन हुड्डा ने 2022 में हुई विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया था। 2025 के विश्व कप में स्वर्ण पदक जीता। परवीन ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। अब जापान में हो रहे एशियन गेम्स में भी वह 65 किलो भार वर्ग के क्वार्टरफाइनल में पहुंच चुकी हैं।
संजना जीत चुकी हैं आठ अंतरराष्ट्रीय पदक
मोरखेड़ी की संजना ने परिवार की खराब आर्थिक स्थिति के बावजूद हार नहीं मानी। 18 वर्षीय संजना भारोत्तोलन की खिलाड़ी हैं। वह आठ अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुकी हैं। संजना ने 2026 कॉमनवेल्थ में भी भाग लिया था। हालांकि, वह पदक दौड़ से बाहर हो गईं थीं।
दीपांशी ने लगातार तीन साल एशियन चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक
17 वर्षीय पहलवान दीपांशी रिठाल गांव की रहने वाली हैं। वह बेहद छोटी उम्र में एशियन गेम्स में भाग लेने जा रही हैं। इन्होंने महज आठ साल की आयु में ही कुश्ती शुरू कर दी थी। दिपांशी ने 2022 से 2024 तक लगातार तीन साल एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। वह रोहतक के सर छोटूराम अखाड़े में अभ्यास करती हैं।
विज्ञापन
रोहतक/कलानौर। रोहतक की बेटियां शिक्षा, सेना, चिकित्सा और उद्यमिता सहित हर क्षेत्र में प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। उनकी उपलब्धियां परिवारों का गौरव बढ़ा रही हैं। ये सफलताएं समाज में सकारात्मक बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। बेटियां अब देश के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला बन चुकी हैं।
मेधा के दम पर भालौठ की बेटी ने सिडनी में शिलापट्ट पर लिखवाया नाम
वीर चक्र विजेता कैप्टन प्रह्लाद सिंह की पोती डॉ. सिंधु श्योराण 2022 में ऑस्ट्रेलिया में पीएचडी के लिए चयनित हुईं। उन्हें 1 करोड़ रुपये की फीस माफी और 25 लाख रुपये की स्कॉलरशिप मिली। जून 2026 में वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी ने उन्हें पीएचडी अवार्ड की। उन्होंने 3 मिनट थीसिस और जॉन कॉनरॉय पुरस्कार जीते। विश्वविद्यालय के सम्मान पट्ट में उनका नाम दर्ज हुआ। उनके 40 से अधिक शोध-पत्र भी प्रकाशित हुए हैं।
विज्ञापन
पिता का सपना पूरा करने को मनीषा ने भरी सफलता की उड़ान
एसआई पिता देवेंद्र का अफसर बिटिया का सपना पूरा करने के लिए मनीषा यादव ने रोहतक से प्रारंभिक पढ़ाई के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी और एमएससी की पढ़ाई पूरी की। वायु सेना की एफकैट परीक्षा में ऑल इंडिया छठीं रैंक हासिल की। अब वह हैदराबाद में पायलट की ट्रेनिंग ले रही हैं। मनीषा के दादा राव राजेंद्र सिंह भी फौज में रहे हैं। दादा की वर्दी और देशसेवा की परंपरा ने मनीषा को प्रेरित किया। मनीषा की उपलब्धि से दादी महेंद्रो देवी, मां पिंकी यादव और भाई मंदीप यादव भी खुश हैं। अब निगाहें उस दिन पर हैं जब पायलट की ट्रेनिंग पूरी कर मनीषा वायु सेना की जिम्मेदारी संभालेंगी।
विज्ञापन
मजदूरी कर पिता ने पढ़ाया, रेणु 13वीं रैंक हासिल कर बनीं डॉक्टर
कलानौर के रमेश और राजवंती ने मजदूरी कर बच्चों को पढ़ाया। बेटी रेणु ने 2011 में नीट में 13वीं रैंक हासिल की लेकिन एडमिशन इतना आसान नहीं था। तब पीजीआई में दाखिले के लिए आवेदन ऑफलाइन होते थे। फॉर्म कलानौर से स्पीड पोस्ट किया लेकिन छुट्टियों के कारण डाक समय से नहीं पहुंची। सैकड़ों फॉर्म रद्द हो गए। मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट गया। अशिक्षित होने के बावजूद पिता बेटी के भविष्य के लिए कोर्ट पहुंचे। कोर्ट के आदेश के बाद एमबीबीएस में दाखिले पाने वाले 4 विद्यार्थियों में रेणु बाला भी शामिल थीं। डॉ. रेणु बाला 2024 से पीजी की पढ़ाई कर रही हैं और एनेस्थीसिया में एमडी कर रही हैं। परिवार में दो बहनें और एक भाई हैं जो वर्तमान में एमबीबीएस कर रहे हैं।
दूध बेच मां ने पढ़ाया, अब सेवा का अध्याय लिख रहीं ममता
कलानौर की डॉ. ममता बहादुरगढ़ पीएचसी में मेडिकल अफसर हैं। मां पिंकी देवी ने दूध बेचकर पढ़ाया। लोगों ने ताने दिए, खर्च बहुत है, बीएससी कर लो। ममता ने घर पर 10 घंटे पढ़ाई की और 2019 में नीट क्लीयर कर हिमाचल के सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। 2024 में डॉक्टर बनने के बाद अब ममता मरीजों की सेवा करने के साथ भविष्य के सपनों को भी आगे बढ़ा रही हैं। वह आगामी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। वह अपने परिवार की पहली डॉक्टर हैं।
मां ने बेटियों को बनाया अपनी ताकत, एक डॉक्टर तो दूसरी इंजीनियर
हिसार में जन्मीं व करनाल में ब्याही गईं और कलानौर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाली सीएमओ डॉ. कमला वर्मा मेडिकल की पढ़ाई कर डॉक्टर बनीं। डॉ. कमला ने दोनों बेटियों अदिति और आसमां की पढ़ाई और परवरिश को प्राथमिकता दी। अदिति ने एमबीबीएस में गोल्ड मेडल हासिल किया और अब मेडिकल सर्जरी में पीजी कर रही हैं। छोटी बेटी आसमां इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही हैं। डॉ. कमला का मानना है कि जब परिवार बेटियों का हौसला बढ़ाता है तो वे सफलता की इबारत लिखती हैं।
खेल के मैदान में कीर्तिमान रच रहीं शहर की बेटियां
रोहतक। खेल के मैदान में रोहतक की बेटियां लगातार सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। अपनी मेहनत, प्रतिभा और संघर्ष के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। एक से बढ़कर एक उपलब्धि आज बेटियों के नाम है। संवाद
_________________________________________________
एशियन गेम्स में शहर की बेटी शैफाली ने खेली उम्दा पारी
शैफाली वर्मा भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार खिलाड़ी के रूप में जानी जाती हैं। आज पूरी दुनिया में भारतीय क्रिकेट की पोस्टर गर्ल हैं। धुआंधार बल्लेबाजी के लिए उन्हें लेडी सहवाग की संज्ञा दी गई है। शैफाली ने रोहतक की गलियों से निकल कर पहले आईपीएल और फिर भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई। हाल ही में उन्होंने एशियन गेम्स में भी भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
_________________________________________________
घुटने की चोट भी नहीं तोड़ पाई निधि का हौसला
किशनगढ़ गांव की रहने वाली डिस्कस थ्रो खिलाड़ी निधि रानी ने हाल ही में कॉमनवेल्थ खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। निधि के बाएं घुटने की तीन सर्जरी हो चुकी हैं। इसके बावजूद इन्होंने अपने खेल को प्रभावित नहीं होने दिया। निधि रेलवे में सीनियर सुपरिंटेंडेंट के पद पर कार्यरत हैं। 2025 में रांची में हुई दक्षिण एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था।
परवीन के मुक्कों से विपक्षी हो जाते हैं चित
रुड़की गांव की बेटी परवीन हुड्डा ने 2022 में हुई विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया था। 2025 के विश्व कप में स्वर्ण पदक जीता। परवीन ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। अब जापान में हो रहे एशियन गेम्स में भी वह 65 किलो भार वर्ग के क्वार्टरफाइनल में पहुंच चुकी हैं।
संजना जीत चुकी हैं आठ अंतरराष्ट्रीय पदक
मोरखेड़ी की संजना ने परिवार की खराब आर्थिक स्थिति के बावजूद हार नहीं मानी। 18 वर्षीय संजना भारोत्तोलन की खिलाड़ी हैं। वह आठ अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुकी हैं। संजना ने 2026 कॉमनवेल्थ में भी भाग लिया था। हालांकि, वह पदक दौड़ से बाहर हो गईं थीं।
दीपांशी ने लगातार तीन साल एशियन चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक
17 वर्षीय पहलवान दीपांशी रिठाल गांव की रहने वाली हैं। वह बेहद छोटी उम्र में एशियन गेम्स में भाग लेने जा रही हैं। इन्होंने महज आठ साल की आयु में ही कुश्ती शुरू कर दी थी। दिपांशी ने 2022 से 2024 तक लगातार तीन साल एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। वह रोहतक के सर छोटूराम अखाड़े में अभ्यास करती हैं।

14. मनीषा यादव, फ्लाइंग ऑफिसर।

14. मनीषा यादव, फ्लाइंग ऑफिसर।

14. मनीषा यादव, फ्लाइंग ऑफिसर।

14. मनीषा यादव, फ्लाइंग ऑफिसर।

14. मनीषा यादव, फ्लाइंग ऑफिसर।

14. मनीषा यादव, फ्लाइंग ऑफिसर।

14. मनीषा यादव, फ्लाइंग ऑफिसर।

14. मनीषा यादव, फ्लाइंग ऑफिसर।