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जिनके नाम पर पीजीआईएमएस, उन्हीं को नहीं रख सके याद

Sun, 23 Feb 2020 01:48 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 23 Feb 2020 01:48 AM IST
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PGIMS management did no remember Pt. Bhagwat Dayal Sharma
पीजीआईएमएस में डायरेक्टर कार्यालय के सामने स्थित पार्क में स्थापित पं. भगवत दयाल शर्मा की प्रति?
संजय कुमार
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रोहतक। सूबे के पहले मुख्यमंत्री पंडित भगवत दयाल शर्मा के नाम पर प्रदेश का पहला मेडिकल कॉलेज रोहतक में बना, जो वर्तमान में लाखों लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के अलावा अब तक आठ हजार से अधिक डॉक्टर समाज को दे चुका है। यही नहीं यहां फार्मेसी, नर्सिंग, फिजियोथैरेपी कॉलेज भी संचालित हो रहे हैं। इसके बावजूद 22 फरवरी को पंडित भगवत दयाल शर्मा की पुण्यतिथि यहां नहीं मनाई गई। हैरानी तो इस बात की है कि चंद सीनियरों को छोड़ कर सूबे के प्रथम सीएम की फोटो तक यहां कोई नहीं पहचानता।
पंडित बीडी शर्मा हेल्थ विश्वविद्यालय के निदेशक कार्यालय के बाहर पार्क में पं. बीडी शर्मा की प्रतिमा है। यह बात यहां कार्यरत अधिकांश डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारी नहीं जानते। अमर उजाला ने सर्वे के तौर पर संस्थान के कुछ सीनियर डॉक्टरों व स्टाफ के पास शनिवार को पंडित बीडी शर्मा का फोटो पहचानने के लिए भेजा, लेकिन इसका जवाब अधिकांश नहीं दे पाए। हैरानी इस बात की रही कि दिल्ली निवासी कुलपति डॉ. ओपी कालरा, रजिस्ट्रार डॉ. एचके अग्रवाल और गिनती के ही कुछ डॉक्टरों ने पूर्व सीएम की फोटो को पहचाना, बाकी ने तो जवाब भी नहीं दिया। कई लोगों को तो उनकी जयंती व पुण्यतिथि के बारे में ही नहीं पता। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस शख्सियत के नाम पर संस्थान है, वहीं पर संबंधित महापुरुष की न तो जयंती मनाई जाती है और न ही पुण्यतिथि। शनिवार सायं संस्थान में पंडित बीडी शर्मा की प्रतिमा पर महज एक माला मिली।
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मेडिकल मोड़ स्थित बोर्ड और ओपीडी कार्ड में ही है पूर्व सीएम की पहचान
मेडिकल मोड़ पर लगे संस्थान के बोर्ड, ओपीडी कार्ड व जांच स्लिप पर ही पंडित भगवत दयाल शर्मा का नाम दिखाई देता है। इसके अलावा यहां आने वाले मरीजों को भी प्रदेश के प्रथम सीएम के बारे में पता नहीं होता। संस्थान की ओपीडी में प्रतिदिन सात से आठ हजार मरीज ओपीडी में जांच कराने आते हैं और 2200 के करीब वार्डों में दाखिल रहते हैं।
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143 दिन सीएम रहे थे पंडित भगवत दयाल शर्मा
मूलरूप से झज्जर जिला के कस्बा बेरी निवासी पंडित भगवत दयाल शर्मा 1966 में कांग्रेस के दिग्गज नेता थे। 1 नवंबर 1966 को जब हरियाणा का गठन हुआ तो उनको प्रदेश का पहला मुख्यमंत्री बनाया गया। वह 143 दिन प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उनके बाद सांसद राव इंद्रजीत के पिता राव बीरेंद्र सूबे के मुख्यमंत्री बने। पंडित बीडी शर्मा की प्रदेश की सियासत में ही नहीं, केंद्र तक पहुंच थी। 22 फरवरी 1993 को उनका देहांत हो गया।
संस्थान याद नहीं करता तो यह उनकी अपनी सोच
प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री व निडर ब्राह्मण नेता पंडित भगवत दयाल शर्मा हम सबके लिए अहम हैं। मेडिकल का तो नाम ही उनके नाम से पड़ा। यदि संस्थान ही उन्हें याद नहीं करता या नहीं जानता तो उनकी अपनी सोच है। इसके लिए तो किसी को फोर्स नहीं किया जा सकता। बेटी होेने के नाते मैं बेरी गई थी। वहां हवन किया, इसमें काफी लोग शामिल भी हुए। उनकी समाधि स्थल की देखभाल भी मैं खुद कर रही हूं। सरकार इसे अपनी देखरेख में ले ले तो बेहतर है। इससे आम आदमी ही नहीं सरकार व प्रशासन भी उन्हें याद रखेगा। मैं उनकी बेटी हूं, इस बात पर मुझे गर्व है।

प्रो. भारती शर्मा, कुल सचिव, सुपवा।
भविष्य में कार्यक्रम आयोजित कराएंगे
पंडित भगवत दयाल शर्मा प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे और उन्हीं के नाम पर संस्थान का नाम रखा गया था। हेल्थ विवि में महापुरुष की जयंती व पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों को उनकी जानकारी मिल सके। भविष्य में इन महत्वपूर्ण दिनों पर संस्थान की ओर से आयोजन करवाएं जाएंगे।
- डॉ. एचके अग्र्रवाल, रजिस्ट्रार, पं. बीडी शर्मा हेल्थ विश्वविद्यालय
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