फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   Persian horse trader Saidu Kalal had built Meham's stepwell

Rohtak News: फारसी घोड़ों के व्यापारी सैदु कलाल ने बनवाई थी महम की बावड़ी

Thu, 21 Nov 2024 12:41 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 21 Nov 2024 12:41 AM IST
विज्ञापन
Persian horse trader Saidu Kalal had built Meham's stepwell
फोटो01..महम में स्थित बावड़ी जो पुरात्तव धरोहर के रूप में मौजूद है। संवाद
महम। कस्बे के दक्षिणी छोर पर बनी ऐतिहासिक बावड़ी को लेकर अनेक लोक कथाएं प्रचलित हैं। इतिहासकारों के अनुसार फारसी घोड़ों के व्यापारी सैदु कलाल द्वारा बनाई गई बावड़ी ही पेयजल का स्त्रोत थी। यहां पर उस जमाने में 100 फीट से भी ज्यादा नीचे भूमिगत जलस्तर होता था। इसके अंदर सैकड़ों पत्थर की सीढ़ियां उतरती थी। लगभग 30 फीट चौड़ी इन सीढ़ियों पर घोड़े आराम से उतर जाते थे। वहां पर कुएं से निकालकर घोड़ों को पानी पीलाने के लिए खेल बनी हुई थी। वहां पर आदमियों के ठहरने के लिए भी अलग अलग कमरे बने हुए थे। जहां पर व्यापारी लोग आराम करते थे।
विज्ञापन

बावड़ी के कुएं पर एक शिलालेख लगा हुआ है। वैसे तो कहा जा रहा है कि उस पर लिखे लेख को अंग्रेजों ने पढ़ने की कोशिश की लेकिन पढ़ नहीं सके तो उस शिलालेख पर गोलियां चला दी थी। उस पर लगी गोलियों के निशान आज भी मौजूद हैं। अब बताया जा रहा है कि उस पर फारसी भाषा में लिखा है। सैदु कलाल का मकबरा, हालांकि कुछ लोग इसे स्वर्ग का झरना भी बताते हैं।बताया जा रहा है कि मुगल काल के समय 1658-59 में शाहजहां काल में इसका निर्माण कराया गया था। सैदु कलाल को शाहजहां का चौबेदार भी बताया गया है।
विज्ञापन

ज्ञानी चोर की बावड़ी के नाम से प्रसिद्ध है यह स्मारक
इस स्मारक को आमलोग अब ज्ञानी चाेर की बावड़ी के नाम से ही पुकारते हैं। कहा जा रहा है कि ज्ञानी चोर साहूकार से धन लूटकर गरीबों में बांटता था।यह स्मारक उसके छिपने का स्थान था। लोक कथाएं ये भी हैं कि यहां से सुरंग शुरू होकर दिल्ली तक जाती हैं। ज्ञानी चोर सुरंग के जरिए भाग निकलता था। अब भी लोग इसे दूर-दूर से देखने के लिए आते रहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


चौधरी देवीलाल के समय हुई थी नवीनीकरण की कोशिश
1987 में महम से चौधरी देवीलाल विधायक बने। उन्होंने प्रदेश की कमान संभाली तो उस समय इसका नवीनीकरण करने व इस बावड़ी को दार्शनिक स्थल बनाने की योजना के तहत इसका पानी निकालना शुरू किया था। जमीन धंसने का खतरा भांपते हुए इस काम को यहीं पर रोक दिया गया था। इसके बाद 1995 में आई बाढ़ का पानी इसमें भर जाने के कारण इसको काफी नुकसान पहुंचा था। इसके चारों ओर लगभग तीस इंच छोटी ईंटों की दीवार बनाई गई हैं, जो आज भी काफी मजबूती से खड़ी हैं।
अब भूमिगत जलस्तर आया ऊपर लुप्त हो रही यादगार
अब यहां पर भूमिगत जलस्तर काफी ऊपर आने के कारण इस यादगार स्मारक का अस्तित्व खतरे में है। इसके अंदर बने कमरे व अन्य स्थल व कुएं के पास जाने का रास्ता पानी में डूब चुका है। पहले इसके अंदर उतर कर देखते थे तो भूल भूलैया जैसा नजारा होता था, लेकिन अब सिर्फ ऊपर से देखा जा सकता है।

100 मीटर के दायरे में निषिद्ध क्षेत्र घोषित होने के बावजूद बन रहे मकान
संरक्षित समारक के चारों ओर 100 मीटर के दायरे में भारतीय पुरात्तव विभाग की ओर से निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया गया है। इस संरक्षित समारक के चारों ओर 100 मीटर तक भवन निर्माण करना गैर कानूनी होने के बावजूद निर्माण कार्य जारी हैं। इस ओर विभाग द्वारा अगर ध्यान नहीं दिया गया तो इस समारक के चारों ओर आबादी बस जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed