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ये वैक्सीन है कमाल: TB इलाज के लिए गोलियों की जरूरत होगी खत्म, PGIMS में हुई CME में पद्मश्री डॉ. दिगंबर बोले
Mon, 03 Apr 2023 09:51 AM IST
नवीन दलाल
विकास सैनी, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
विकास सैनी, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
Published by: नवीन दलाल
Updated Mon, 03 Apr 2023 09:51 AM IST
सार
एमडीआर टीबी के इलाज के लिए नई दवा तैयार की जा रही है। जिसके देश में पिछले चार साल से ट्रायल चल रहा है जोकि अब अंतिम चरण में पहुंचा हुआ है। वहीं वैज्ञानिक भी इसके बेहतर परिणाम से संतुष्ट हैं।
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पीजीआई राेहतक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हरियाणा विश्व पटल पर नई इबारत लिखने जा रहा है। सबकुछ ठीक रहा तो जल्द हम ट्यूबरक्लॉसिस (टीबी) पर अंकुश लगाने में सफल होंगे। पिछले चार साल से टीबी पर अंकुश लगाने वाली वैक्सीन तैयार की जा रही है। वैक्सीन भी एक नहीं दो हैं। इनका 12 हजार लोगों पर ट्रायल चल रहा है। यह ट्रायल अंतिम चरण में है।
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देश में टीबी के इलाज के लिए पिछले चार साल से चल रहा वैक्सीन ट्रायल अंतिम चरण में पहुंचा
हालांकि अभी वैक्सीन कोड खोला नहीं गया है मगर इसके बेहतर परिणाम से वैज्ञानिक संतुष्ट हैं। वैक्सीन बनाने वाली टीम के सदस्य पीजीआईएमईआर (चंडीगढ़) के प्रोफेसर एमेरिट्स पद्मश्री डॉ. दिगंबर बहरा ने अमर उजाला से बातचीत में यह दावा किया है। रविवार को पीजीआईएमएस (रोहतक) के पल्मनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसन विभाग की ओर से आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) में शिरकत करने पहुंचे थे। सीएमई भी वैक्सीन की सफलता की संभावनाओं को सराहा गया है। सरकार ने भी वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य तय किया है। इस अभियान में वैक्सीन अहम भूमिका निभा सकती है।
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एमडीआर का छह माह में इलाज संभव
टीबी का बिगड़ा हुआ स्वरूप एमडीआर यानी मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस टीबी उन्मूलन के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है। इस बाधा को वैज्ञानिकों ने काफी हद तक दूर करने का दावा किया है। इसके लिए एमडीआर टीबी के इलाज के लिए नई दवा तैयार की जा रही है। यह दवा एमडीआर टीबी वाले मरीज को छह माह में ठीक कर सकेगी। इसका ट्रायल भी अंतिम दौर से गुजर रहा है। वर्तमान में एमडीआर टीबी वाले मरीजों को नौ से 11 माह दवा लेनी होगी जबकि सामान्य टीबी के मरीजों के लिए दो साल दवा दी जाती है। भविष्य में इतने लंबे समय दवा लेने की जरूरत नहीं रहेगी।
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प्रतिक्रिया
क्षय रोग से बचाव के लिए बच्चों को बीसीजी का टीका लगाना जरूरी है। अब तक यही एकमात्र इलाज है। वर्तमान में अंडर ट्रायल वैक्सीन दूसरा प्रयास होगा। सीएमई में वरिष्ठ चिकित्सकों ने टीबी संबंधी अनुभव साझा किए हैं। ये अनुभव टीबी उन्मूलन में अहम योगदान देंगे। -डॉ. ध्रुव चौधरी, अध्यक्ष, पल्मनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसन विभाग, पीजीआईएमएस, रोहतक।
देश में प्रति एक लाख लोगों में 316 टीबी रोगी
नेशनल टीबी प्रिविलेंस सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में हर वर्ष तीन लाख नए टीबी रोग सामने आ रहे हैं। इनमें 85 प्रतिशत मरीज ठीक हो जाते हैं। एमडीआर यानी बिगड़ी हुई टीबी के 68 प्रतिशत मरीज ही ठीक हो पा रहे हैं। देश में प्रति एक लाख लोगों में 316 टीबी रोगी हैं। दिल्ली टीबी मरीज सबसे अधिक व केरल में सबसे कम हैं। हरियाणा 432 टीबी मरीजों के साथ चौथे स्थान पर है। - डॉ. जयकिशन, चेयरमैन, स्टेट टॉस्क फोर्स हरियाणा फॉर एनटीईपी एवं अध्यक्ष, टीबी एंड चेस्ट विभाग, एमएम विवि मुल्लाना, अंबाला।