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ऑक्सीजन के बॉटलिंग प्लांट को त्रिस्तरीय सुरक्षा में रखा
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रोहतक। कोरोना के मरीज बढ़ने के साथ ही ऑक्सीजन के लिए भी मारामारी मची हुई है। उसे भर कर अस्पताल तक पहुंचाने में आठ घंटे से अधिक समय लगता है। ऑक्सीजन सिलिंडर को लेकर किसी तरह की लापरवाही न हो इसके लिए प्लांट की त्रिस्तरीय सुरक्षा मुहैया करवाया गया है। प्रशासन को मिलने वाली ऑक्सीजन पानीपत रिफाइनरी व दूसरे प्रदेश से आपूर्ति की जा रही है।
इतना ही नहीं कई बार पानीपत से आने वाला टैंकर 75 किमी की दूरी तय करने में चार घंटे से अधिक समय लगा देता है। कारण उस रूट पर पड़ने वाले जिले में गैस उतारने में समय लग जाता है। जिले का कोटा 13 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का था। जिसे बढ़ा कर 17 मीट्रिक टन किया गया। खपत को देखते हुए प्रशासन से 23 मीट्रिक टन की मांग की गई है। अभी जिले को 17 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिल पा रही है।
प्रशासन की ओर से पूरे प्लांट पर तीसरी आंख से नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही प्लांट पर कंपनी के सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं। इसके साथ ही पुलिस के 10 जवान लगातार तैनात रहते हैं। जहां पर उनसे आठ घंटे के अंतराल पर बदला जाता है।
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ऑक्सीजन सिलिंडर को लेकर गैस के एक-एक औंस का हिसाब रखा जा रहा है। कब कितने सिलिंडर की आपूर्ति कहां पर की जा रही इसका पूरी पारदर्शिता के साथ हिसाब रखा जाता है। सीसीटीवी कैमरे के साथ पुलिस बल की तैनाती की गई है।
- कैप्टन मनोज कुमार, उपायुक्त।
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इतना ही नहीं कई बार पानीपत से आने वाला टैंकर 75 किमी की दूरी तय करने में चार घंटे से अधिक समय लगा देता है। कारण उस रूट पर पड़ने वाले जिले में गैस उतारने में समय लग जाता है। जिले का कोटा 13 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का था। जिसे बढ़ा कर 17 मीट्रिक टन किया गया। खपत को देखते हुए प्रशासन से 23 मीट्रिक टन की मांग की गई है। अभी जिले को 17 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिल पा रही है।
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प्रशासन की ओर से पूरे प्लांट पर तीसरी आंख से नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही प्लांट पर कंपनी के सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं। इसके साथ ही पुलिस के 10 जवान लगातार तैनात रहते हैं। जहां पर उनसे आठ घंटे के अंतराल पर बदला जाता है।
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ऑक्सीजन सिलिंडर को लेकर गैस के एक-एक औंस का हिसाब रखा जा रहा है। कब कितने सिलिंडर की आपूर्ति कहां पर की जा रही इसका पूरी पारदर्शिता के साथ हिसाब रखा जाता है। सीसीटीवी कैमरे के साथ पुलिस बल की तैनाती की गई है।
- कैप्टन मनोज कुमार, उपायुक्त।