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Rohtak News: बीमा कंपनी को आठ लाख चुकाने के आदेश
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रोहतक। दुर्घटना के बाद ओवरलोडिंग का हवाला देकर बीमा दावा खारिज करने में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष नगेंद्र सिंह कादियान की कोर्ट ने बीमाधारक के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने माना कि बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि ओवरलोडिंग ही दुर्घटना का कारण थी।
शिकायतकर्ता हिसार रोड निवासी ऋषिराज ने आयोग को बताया कि उनका ट्रेलर ट्रक 22 अक्टूबर 2024 को दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। मरम्मत पर 8.76 लाख रुपये खर्च हुए लेकिन बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि ट्रक ओवरलोड था। लिफ्ट एक्सल सही स्थिति में नहीं था।
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि दुर्घटना अचानक सामने चल रहे वाहन ने इमरजेंसी ब्रेक लगाने से हुई थी। मैकेनिक के हलफनामे और अन्य सबूतों से स्पष्ट हुआ कि दुर्घटना के बाद ट्रैक हटाने के लिए लिफ्ट एक्सल उठाया गया था। न कि दुर्घटना के समय वह उसी स्थिति में चल रहा था।
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आयोग ने माना कि वाहन में 2,110 किलोग्राम अतिरिक्त भार था लेकिन बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि इसी कारण दुर्घटना हुई। हालांकि अतिरिक्त भार को देखते हुए मरम्मत राशि में 10 प्रतिशत की कटौती उचित मानते हुए शेष दावा मंजूर किया गया। आयोग ने बीमा कंपनी का दावा खारिज किए जाने को सेवा में कमी माना।
आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को 8.02 लाख रुपये 24 मार्च 2025 से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, 10 हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना और 5 हजार रुपये मुकदमा खर्च 30 दिन के भीतर पीड़ित को देने के आदेश दिए हैं।
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शिकायतकर्ता हिसार रोड निवासी ऋषिराज ने आयोग को बताया कि उनका ट्रेलर ट्रक 22 अक्टूबर 2024 को दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। मरम्मत पर 8.76 लाख रुपये खर्च हुए लेकिन बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि ट्रक ओवरलोड था। लिफ्ट एक्सल सही स्थिति में नहीं था।
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सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि दुर्घटना अचानक सामने चल रहे वाहन ने इमरजेंसी ब्रेक लगाने से हुई थी। मैकेनिक के हलफनामे और अन्य सबूतों से स्पष्ट हुआ कि दुर्घटना के बाद ट्रैक हटाने के लिए लिफ्ट एक्सल उठाया गया था। न कि दुर्घटना के समय वह उसी स्थिति में चल रहा था।
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आयोग ने माना कि वाहन में 2,110 किलोग्राम अतिरिक्त भार था लेकिन बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि इसी कारण दुर्घटना हुई। हालांकि अतिरिक्त भार को देखते हुए मरम्मत राशि में 10 प्रतिशत की कटौती उचित मानते हुए शेष दावा मंजूर किया गया। आयोग ने बीमा कंपनी का दावा खारिज किए जाने को सेवा में कमी माना।
आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को 8.02 लाख रुपये 24 मार्च 2025 से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, 10 हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना और 5 हजार रुपये मुकदमा खर्च 30 दिन के भीतर पीड़ित को देने के आदेश दिए हैं।