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ओपन मार्केट से इम्प्लांट मंगाने पर रोक, अमृत फर्मेसी से होगी खरीद
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रोहतक। पीजीआईएमएस में जब्त निजी सप्लायरों के लाखों रुपये के अवैध इम्प्लांट को लेकर एक ओर हाईकोर्ट में केस विचाराधीन है, दूसरी ओर अब प्रशासन ने अपने सीनियर से लेकर जूनियर डॉक्टरों तक पर प्रतिबंध लगा दिया है कि वह किसी मरीज से ओपन मार्केट से इम्प्लांट नहीं मंगा सकेंगे। ऑपरेशन से संबंधित जो भी सामान चाहिए डॉक्टर वार्ड नं. 12 के सामने बने अमृत फार्मेसी स्टोर से ही मंगाएंगे। इसे एचएलएल लाइफ केयर लिमिटेड (भारत सरकार से मान्यता प्राप्त) की ओर से संचालित किया जा रहा है।
प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि ऑर्थो विभाग ऑपरेशन में प्रयोग होने वाले इम्प्लांट में प्लेट, नेल इत्यादि अमृत फार्मेसी से ही मंगाएगा। इसके अलावा नेत्र सर्जन को भी लैंस यहीं से मंगाने होंगे। संस्थान की फैकल्टी व सीनियर रेजिडेंट किसी मरीज को बाहर से सामान लाने को नहीं कहेंगे। अमृत फार्मेसी स्टोर पर सरकार की ओर से शत प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध है। इसकी जानकारी सभी वार्डों, ओपीडी, ऑपरेशन थियेटर, आपातकालीन विभाग, ट्रॉमा सेंटर आदि के सामने अनिवार्य रूप से चस्पा होनी चाहिए। प्रशासन के निर्देशों को लागू करवाने की जिम्मेदारी सभी विभागाध्यक्षों व यूनिट अध्यक्षों की होगी।
गौरतलब है कि पीजीआईएमएस में ऑर्थो, सर्जरी, नेत्र विभाग के ऑपरेशन थियेटर में प्रयोग होने वाले इम्प्लांट के नाम पर जम कर कमीशन का खेल खेला जाता है। यही वजह है कि संस्थान में लाखों का इम्प्लांट जब्त हैं और इन्हें छुड़ाने के लिए हाईकोर्ट में केस विचाराधीन है। हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार की ओर से दिए गए एफिडेविट में भी संस्थान के डॉक्टरों व निजी सप्लायरों की सांठगांठ पर सवाल उठाया गया है। हालांकि रजिस्ट्रार के विरोध में ऑर्र्थो विभाग के 29 डॉक्टर भी इस मामले में पार्टी बन गए हैं। इस केस पर सुनवाई 10 दिसंबर को हाईकोर्ट में होनी है। वहीं माना जा रहा है कि हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए संस्थान ने इस तरह के आदेश जारी कर दिए हैं, ताकि वह निजी इम्प्लांट सप्लायरों पर पूरी तरह रोक लगा सके।
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मरीजों को मिलेगा लाभ, डॉक्टरों का टूटेगा कमीशन का गठजोड़
अमृत फार्मेसी स्टोर से इम्प्लांट मंगाने की अनिवार्यता का लाभ मरीजों को मिलेगा। इसके बाद डॉक्टरों व निजी इम्प्लांट सप्लायरों के बीच चल रहा कमीशन का गठजोड़ टूटेगा। एक्सपर्ट मानते हैं कि कई इम्प्लांट में 40 से 60 प्रतिशत का कमीशन तय होता है। यदि अधिकारी अपने डॉक्टरों पर लगाम लगा सके तो मरीजों को काफी हद तक आर्थिक लाभ मिलेगा।
बोले अधिकारी
पीजीआईएमएस में भारत सरकार से मान्यता प्राप्त अमृत फार्मेसी स्टोर खोले गए हैं। संस्थान के डॉक्टरों के लिए अनिवार्य है कि वह ओपन मार्केट से कोई सामान न मंगाए। मरीज अपनी इच्छा से ही अमृत फार्मेसी स्टोर से सामान ले कर आएगा। यदि कहीं कोई अनियमितता मिलती है तो संबंधित डॉक्टर या जुडे़ स्टाफ पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
- डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस
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प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि ऑर्थो विभाग ऑपरेशन में प्रयोग होने वाले इम्प्लांट में प्लेट, नेल इत्यादि अमृत फार्मेसी से ही मंगाएगा। इसके अलावा नेत्र सर्जन को भी लैंस यहीं से मंगाने होंगे। संस्थान की फैकल्टी व सीनियर रेजिडेंट किसी मरीज को बाहर से सामान लाने को नहीं कहेंगे। अमृत फार्मेसी स्टोर पर सरकार की ओर से शत प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध है। इसकी जानकारी सभी वार्डों, ओपीडी, ऑपरेशन थियेटर, आपातकालीन विभाग, ट्रॉमा सेंटर आदि के सामने अनिवार्य रूप से चस्पा होनी चाहिए। प्रशासन के निर्देशों को लागू करवाने की जिम्मेदारी सभी विभागाध्यक्षों व यूनिट अध्यक्षों की होगी।
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गौरतलब है कि पीजीआईएमएस में ऑर्थो, सर्जरी, नेत्र विभाग के ऑपरेशन थियेटर में प्रयोग होने वाले इम्प्लांट के नाम पर जम कर कमीशन का खेल खेला जाता है। यही वजह है कि संस्थान में लाखों का इम्प्लांट जब्त हैं और इन्हें छुड़ाने के लिए हाईकोर्ट में केस विचाराधीन है। हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार की ओर से दिए गए एफिडेविट में भी संस्थान के डॉक्टरों व निजी सप्लायरों की सांठगांठ पर सवाल उठाया गया है। हालांकि रजिस्ट्रार के विरोध में ऑर्र्थो विभाग के 29 डॉक्टर भी इस मामले में पार्टी बन गए हैं। इस केस पर सुनवाई 10 दिसंबर को हाईकोर्ट में होनी है। वहीं माना जा रहा है कि हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए संस्थान ने इस तरह के आदेश जारी कर दिए हैं, ताकि वह निजी इम्प्लांट सप्लायरों पर पूरी तरह रोक लगा सके।
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मरीजों को मिलेगा लाभ, डॉक्टरों का टूटेगा कमीशन का गठजोड़
अमृत फार्मेसी स्टोर से इम्प्लांट मंगाने की अनिवार्यता का लाभ मरीजों को मिलेगा। इसके बाद डॉक्टरों व निजी इम्प्लांट सप्लायरों के बीच चल रहा कमीशन का गठजोड़ टूटेगा। एक्सपर्ट मानते हैं कि कई इम्प्लांट में 40 से 60 प्रतिशत का कमीशन तय होता है। यदि अधिकारी अपने डॉक्टरों पर लगाम लगा सके तो मरीजों को काफी हद तक आर्थिक लाभ मिलेगा।
बोले अधिकारी
पीजीआईएमएस में भारत सरकार से मान्यता प्राप्त अमृत फार्मेसी स्टोर खोले गए हैं। संस्थान के डॉक्टरों के लिए अनिवार्य है कि वह ओपन मार्केट से कोई सामान न मंगाए। मरीज अपनी इच्छा से ही अमृत फार्मेसी स्टोर से सामान ले कर आएगा। यदि कहीं कोई अनियमितता मिलती है तो संबंधित डॉक्टर या जुडे़ स्टाफ पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
- डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस