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‘आयुष्मान भारत’ के लाभार्थी की सूची में नवजात व दुल्हन का ही नाम जुड़ सकता है

Sun, 22 Sep 2019 02:15 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 22 Sep 2019 02:15 AM IST
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Only the name of the newborn and bride can be added to the beneficiary list of 'Ayushman Bharat'.
‘आयुष्मान भारत योजना’ के लाभार्थी के घर पैदा हुए नवजात शिशु और नई दुल्हन का नाम ही लाभ पात्रों की सूची में जोड़ना संभव है। नवजात का नाम सूची में दर्ज करने के लिए आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र और दुल्हन का नाम सूची में दर्ज करने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट और उसके आधार कार्ड की जरूरत होती है। इसके लिए लाभार्थी को महज एक आवेदन करना होता है और प्रशासन से अनुमति मिलने पर नवजात को सूची में शामिल कर दिया जाता है। नाम जुड़ते ही नवजात व दुल्हन को भी केंद्र सरकार की योजना के तहत स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलने लगता है।
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केंद्र सरकार की ओर से संचालित हो रही आयुष्मान भारत योजना लाभार्थियों को स्वास्थ्य लाभ देने के अलावा पब्लिक की जिज्ञासा का कारण बनी है। आयुष्मान के विभिन्न काउंटरों पर पहुंच रही पब्लिक आयुष्मान मित्रों से अपना नाम लिस्ट में तलाशने का आग्रह करती है और जब सूची में नाम नहीं मिलता तो एक ही सवाल पूछा जाता है कि वह अपना नाम लिस्ट में डलवाने के लिए क्या करे। यहां काउंटर पर तैनात आयुष्मान मित्र भी रटा रटाया जवाब दे देता है कि वह सूची में दर्ज नाम का ही गोल्डन कार्ड बना सकता है। इसके अलावा यदि कोई और जानकारी चाहिए तो वह प्रशासन से जा कर पूछें, वह सिर्फ नवजात और नई दुल्हन का नाम ही दर्ज करवा सकते हैं। आयुष्मान योजना के जिला नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश गर्ग ने बताया कि वह लाभार्थी के घर जन्मे बच्चे का नाम और शादी के बाद आई दुल्हन का नाम ही आयुष्मान भारत योजना के लाभ पात्रों की सूची से जुड़वा सकते हैं। इसके अलावा उनके पास किसी तरह का फेरबदल करने का अधिकार नहीं है।
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लिपिकीय गलती बनी है मुसीबत
आयुष्मान काउंटर पर तैनात स्टाफ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 2011 में हुए सर्वे में लिपिकीय गलतियों की भरमार है। इसके चलते कई लाभ पात्र आते भी हैं और उनको सूची में तलाश नहीं पाते। इसलिए काउंटर पर एक व्यक्ति को मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, पता, पिता व पति का नाम आदि से मिलान किया जाता है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि 2011 में कोई व्यक्ति अलग जगह रह रहा था और वर्तमान में वह नई जगह रह रहा है तो उसे सरकार का भेजा पत्र ही नहीं मिल पाता। यही वजह है कि 25 हजार से अधिक लाभ पात्रों तक एक साल में भी नहीं पहुंचा जा सका है।
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