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भौतिक सत्यापन में हुआ खुलासा, सिर्फ 583 किसानों ने बोई धान की जगह कपास

Tue, 28 Jul 2020 02:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2020 02:42 AM IST
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only 583 farmer cotton production
रोहतक। राज्य सरकार के लगातार प्रयासों के बावजूद इस बार भी किसानों का धान से मोह भंग नहीं हो सका। सरकार ने धान की जगह वैकल्पिक फसलें लगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने को मेरा पानी, मेरी विरासत योजना लॉन्च की थी। लेकिन जिले में इस स्कीम को झटका लगा है। योजना के तहत 1416 किसानों ने पंजीकरण तो करवा लिया लेकिन मात्र 583 किसानों ने ही धान की जगह कपास की फसल की बुवाई की है।
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स्कीम के तहत बड़ी संख्या में किसानों ने रजिस्ट्रेशन तो करवा लिया, लेकिन फिजिकल वेरिफिकेशन में खुलासा हुआ कि बहुत कम किसानों ने धान छोड़ा है। सरकार ने मेरा पानी, मेरी विरासत स्कीम के तहत किसानों को धान के बजाय कपास, बाजरा आदि फसलें लगाने को कहा था। एक एकड़ धान की जगह दूसरी फसल लगाने वाले किसानों के बैंक खातों में सात हजार रुपये ट्रांसफर किए जाने हैं। उसने जो वैकल्पिक फसल लगाई है, उसका बीमा सरकार अपने खर्च पर करवाएगी। साथ ही एमएसपी पर फसल की खरीद भी सुनिश्चित करेगी। इस योजना के तहत पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाना था। किसानों को परेशानी न आए, इसलिए सरकार ने रजिस्ट्रेशन के लिए कोई कागजात भी नहीं मांगे थे। इसे देखते हुए उत्साह में आकर जिले 1416 किसानों ने इस बार धान के बजाय कपास लगाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवा लिया। जिनकी जमीनों का कुल रकबा 1283.771 हेक्टेयर बनता था। कपास की बुआई खत्म होने के बाद खेतीबाड़ी विभाग की टीमों ने रजिस्ट्रेशन करवाने वाले किसानों के खेतों में जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन किया। ताकि पता चल सके कि उन्होंने वाकई इस बार धान की जगह कपास लगाया है या नहीं। उसमें खुलासा हुआ कि सिर्फ 583 किसानों ने ही धान की जगह कपास की बुआई की थी, जिनका कुल रकबा 381.799 हेक्टेयर ही था। जबकि, शुरू में खेतीबाड़ी विभाग रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों को लेकर काफी उत्साहित था। माना जा रहा था कि इस बार जिले में धान के काफी रकबे का विविधीकरण हो जाएगा।
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ब्लॉक --------- रजिस्ट्रेशन -- धान छोड़ने वाले किसान -- रजिस्टर्ड रकबा (हेक्टेयर) -- छोड़ा रकबा (हेक्टेयर)
कलानौर ---------- 292 -------------- 125 --------------------- 252.529 ------------------- 85.490
लाखनमाजरा ------- 25 -------------- 8 ------------------------- 21.906 ------------------- 4.816
महम ---------------- 475 ------------ 163 ---------------------- 510.464 ------------------- 132.011
रोहतक -------------- 433 ------------ 206 ----------------------- 352.932 ------------------ 115.935
सांपला --------------- 191 ------------ 81 ------------------------- 145.940 ----------------- 43.547
कुल ------------------ 1416 ----------- 583 ----------------------- 1283.771 ---------------- 38.799
जल्द शुरू होगा बाजरा का सर्वे
खेतीबाड़ी विभाग ने मेरा पानी, मेरी विरासत स्कीम के तहत रजिस्ट्रेशन करवाने वाले किसानों में से पहले चरण में कपास का सर्वे किया था, क्योंकि उसकी बुवाई खत्म हो चुकी है। दूसरी महत्वपूर्ण फसल बाजरा है, जिसकी बुवाई अभी जारी है। बुवाई खत्म होने के बाद वैकल्पिक फसल के तौर पर बाजरा लगाने वाले किसानों के खेतों की फिजिकल वेरिफिकेशन करवाई जाएगी।
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गिरते भूजल स्तर को देखते हुए किसानों के लिए मेरा पानी, मेरी विरासत स्कीम लांच की गई थी। किसी कागजात की जरूरत न होने के कारण बड़ी संख्या में किसानों ने रजिस्ट्रेशन तो करवा लिया। लेकिन बहुत से किसानों ने बाद में धान को ही तरजीह दी।
- डॉ. रोहताश सिंह, उप निदेशक कृषि।
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