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विश्वासघात दिवस 31 को, फूंकेंगे प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री का पुतला

Fri, 28 Jan 2022 02:48 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 28 Jan 2022 02:48 AM IST
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On Betrayal Day 31, the effigies of the Prime Minister and the Chief Minister will be burnt
जाट भवन में आयोजित संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक को संबोधित करते किसान नेता अनिल नांदल। संवाद
रोहतक। संयुक्त किसान मोर्चा हरियाणा की वीरवार को सेक्टर एक स्थित जाट भवन में बैठक हुई, जिसमें केंद्र सरकार पर किसानों की मांगों की अनदेखी का आरोप लगाया गया। फैसला हुआ कि 31 जनवरी को विश्वासघात दिवस मनाया जाएगा। प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का पुतला फूंका जाएगा।
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संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर संयुक्त किसान मोर्चा हरियाणा के किसान संगठनों की बैठक हुई। अध्यक्षता मोर्चा अध्यक्ष जसवीर सिंह भाटी ने की। इसमें भारतीय किसान यूनियन अंबावता की प्रदेशाध्यक्ष अनिल नांदल (बल्लू प्रधान) ने बताया कि 31 जनवरी को देश के साथ-साथ हरियाणा में भी केंद्र सरकार द्वारा किसानों की मांगों की अनदेखी पर विश्वासघात दिवस मनाया जाएगा। उन्होंने कहा किसान आंदोलन के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक मांगों पर विचार नहीं किया गया है। इससे किसानों में काफी रोष है। जब तक सरकार आंदोलन के दौरान शहीद व घायल हुए किसानों को मुआवजा नहीं देगी, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। सरकार एमएसपी की गारंटी को लेकर भी मुकर रही है। भूमि अधिग्रहण विधेयक को लेकर किसानों में काफी आक्रोश है। बैठक में दिलबाग हुड्डा लूदास प्रदेश महासचिव भारतीय किसान यूनियन अंबावता, सतवीर पुनिया राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन अंबावता, रामवीर डांडा महासचिव, हवा सिंह जिला अध्यक्ष, विजय जागलान सचिव पानीपत भारतीय किसान यूनियन अंबावता, मनोज सहरावत व मनोज बाजाड आदि किसान संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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किसान मोर्चा करेगा ट्रेड यूनियन की हड़ताल का समर्थन
गुरनाम सिंह चढूनी की ओर से जारी वीडियो में दिए बयान को संयुक्त किसान मोर्चा ने खारिज करते हुए घोर आपत्ति जताई है। मोर्चा के इंद्रजीत सिंह ने कहा कि किसान आंदोलन को ट्रेड यूनियनों की ओर से लगातार मजदूरों व कर्मियों का समर्थन मिला। भारत बंद जैसे आंदोलन सफल बनाने में सराहनीय भूमिका रही। इसकी बदौलत किसान मजदूर एकता का नारा परवान चढ़ा। आज ट्रेड यूनियनें मुद्दों पर हड़ताल कर रही हैं, उनमें लेबर कोड की वापसी भी है। इसके अलावा उनका बड़ा मुद्दा देश की परिसंपत्तियों को बेचने से रोकना भी है, जो जनता की मांग है। यह निंदा का विषय है कि गुरनाम सिंह सभी कर्मियों को भ्रष्ट कहकर बदनाम करने की चेष्टा कर रहे हैं। ट्रेड यूनियनों के साथ 95 फीसदी से ज्यादा असंगठित क्षेत्र के मजदूर हैं। 15 जनवरी की सिंघू बार्डर पर हुई एसकेएम की बैठक में बाकायदा दो दिवसीय राष्ट्रीय हड़ताल का एजेंडा शुरू में ही लिखा गया। विस्तार से बताया गया कि ट्रेड यूनियनों ने किसान आंदोलन का समर्थन किया था। उसके बाद हड़ताल के मुद्दे भी बताए गए और एसकेएम के समर्थन का प्रस्ताव रखा जिसे ध्वनिमत से पारित किया गया। एसकेएम हरियाणा चढूनी के वीडियो में प्रकट बयानों से असहमति प्रकट करते हुए स्पष्ट करना चाहता है कि वह ट्रेड यूनियनों की दो दिवसीय हड़ताल का पुरजोर समर्थन करता है।
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