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अब छह माह तक खराब नहीं होगा बाजरे का आटा
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रोहतक। सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि उन्होंने मोटे अनाज को लेकर लोकसभा में प्रश्न रखा है। बाजरे के आटे का भंडारण व नई किस्म विकसित करने की बात कही है। इस पर केंद्रीय कृषि राज्य एवं किसान कल्याण मंत्री ने जवाब दिया है कि वैज्ञानिकों ने बाजरे की नई किस्म विकसित की है। अब बाजरे का आटा जल्द खराब नहीं होगा। इसके भंडारण में भी दिक्कत भी नहीं होगी।
सांसद ने कहा है कि बाजरे का सबसे अधिक उत्पादन हरियाणा व राजस्थान में होता है। इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सांसद ने यहां तक कहा कि 60 एवं 70 के दशक में सबसे अधिक मोटे अनाज का चलन था, लेकिन धीरे-धीरे कम हो गया है। अब प्रधानमंत्री के प्रयास से फिर से मोटे अनाज का प्रचलन बढ़ने लगा है। साबित हो चुका है कि 12 बीमारियों में मोटा अनाज वरदान माना गया है। मंगलवार को लोकसभा में सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने सवाल रखा कि भविष्य को देखते हुए बाजरा भंडारण व बाजरे का आटा जल्द खराब नहीं हो, इसके लिए रिसर्च की जरूरत है। सांसद के सवाल पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री कैलाश चौधरी ने बताया कि बाजरे की सेल्फ लाइफ को लेकर आईसीआर के वैज्ञानिकों ने रिसर्च किया है। नई किस्म विकसित की है, जिससे अब बाजरे का आटा छह माह तक खराब नहीं होगा। गेहूं के आटे की तरह ही रोटियां बनेगी, उसके भंडारण में कोई दिक्कत नहीं होगी। सांसद ने कहा कि मोटे अनाज का चलन देश में कम, विदेशों में अधिक बढ़ गया है। मोटा अनाज किडनी, लीवर, शुगर, बीपी, कैंसर आदि बीमारियों में लाभदायक है। बाजरे का आटा जल्द खराब होता है। इसके लिए भविष्य को देखते हुए बाजरे की नई किस्म विकसित की जाए।
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सांसद ने कहा है कि बाजरे का सबसे अधिक उत्पादन हरियाणा व राजस्थान में होता है। इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सांसद ने यहां तक कहा कि 60 एवं 70 के दशक में सबसे अधिक मोटे अनाज का चलन था, लेकिन धीरे-धीरे कम हो गया है। अब प्रधानमंत्री के प्रयास से फिर से मोटे अनाज का प्रचलन बढ़ने लगा है। साबित हो चुका है कि 12 बीमारियों में मोटा अनाज वरदान माना गया है। मंगलवार को लोकसभा में सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने सवाल रखा कि भविष्य को देखते हुए बाजरा भंडारण व बाजरे का आटा जल्द खराब नहीं हो, इसके लिए रिसर्च की जरूरत है। सांसद के सवाल पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री कैलाश चौधरी ने बताया कि बाजरे की सेल्फ लाइफ को लेकर आईसीआर के वैज्ञानिकों ने रिसर्च किया है। नई किस्म विकसित की है, जिससे अब बाजरे का आटा छह माह तक खराब नहीं होगा। गेहूं के आटे की तरह ही रोटियां बनेगी, उसके भंडारण में कोई दिक्कत नहीं होगी। सांसद ने कहा कि मोटे अनाज का चलन देश में कम, विदेशों में अधिक बढ़ गया है। मोटा अनाज किडनी, लीवर, शुगर, बीपी, कैंसर आदि बीमारियों में लाभदायक है। बाजरे का आटा जल्द खराब होता है। इसके लिए भविष्य को देखते हुए बाजरे की नई किस्म विकसित की जाए।
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