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एफडीडीआई प्रबंधन का छात्रों को नोटिस, पैसा भरो या हॉस्टल से बाहर निकलो
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 01 Oct 2016 02:25 AM IST
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एफडीडीआई
- फोटो : file photo
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एफडीडीआई (फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट) में फीस के मुद्दे को लेकर छात्र और प्रबंधन एक बार फिर आमने-सामने हैं। प्रबंधन ने छात्रों को हॉस्टल से बाहर निकालने की चेतावनी दी है। डिग्री का विवाद सुलझे बिना छात्र फीस देने में असमर्थता जता रहे हैं तो वहीं प्रबंधन ने उन्हें कहा है कि आउट सोर्स पर चल रहे हॉस्टल की फीस देनी होगी, अन्यथा हॉस्टल खाली करना होगा।
दरअसल, संस्थान के 2012 से 2014 तक के छात्रों की डिग्री का मामला सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन है, जिसकी सुनवाई 8 नवंबर को है। डिग्री अधर में होने के कारण छात्र पिछले एक साल से हॉस्टल की फीस नहीं दे पा रहे हैं। छात्रों का तर्क है कि कोई भी बैंक उन्हें फीस के लिए लोन देने को तैयार नहीं है। हॉस्टल फीस को लेकर पहले भी कई बार विवाद खड़ा हो चुका है।
अब एक बार फिर से प्रबंधन की तरफ से नोटिस जारी किया है। छात्रों को चेतावनी दी गई है कि उन्हें हर हाल में फीस देनी होगी, यदि वह फीस नहीं देंगे तो हॉस्टल से बाहर निकलना होगा। इस चेतावनी के बाद छात्र असमंजस में हैं। आखिर वह जाएं तो कहां जाएं। छात्र संदीप प्रियदर्शी का कहना है कि जब तक डिग्री के मामले का समाधान नहीं होगा, कोई बैंक लोन नहीं देगा। अब ऐसे में प्रबंधन भी नोटिस पर नोटिस जारी कर रहा है। प्रबंधन की गलती का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। इस मामलों को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
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अप्रैल में हड़ताल पर रहे थे छात्र
इसी मसले पर प्रबंधन और छात्रों के बीच अप्रैल माह में भी विवाद हुआ था। उस समय छात्रों ने कई दिनों तक क्लास का बहिष्कार कर हड़ताल की थी। उस समय भी इसका कोई समाधान नहीं हो सका था और मामला दब गया था। अब एक बार फिर से फीस का यह मुद्दा उठा है।
बिना फीस के हॉस्टल चलाना संभव नहीं
डिग्री का मामला विचाराधीन है। इस कारण छात्रों से फिलहाल पढ़ाई की फीस नहीं ले रहे हैं, लेकिन हॉस्टल आउट सोर्स पर चलता है, जिसकी फीस देनी होगी। कुछ दिन पहले एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के सामने छात्रों ने फीस देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक भी फीस जमा नहीं कराई। बिना फीस के आउट सोर्स पर हॉस्टल चलाने में प्रबंधन सक्षम नहीं है। इसी वजह से नोटिस दिए गए हैं।
- अतुल अस्थाना, सेंटर इंचार्ज रोहतक।
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दरअसल, संस्थान के 2012 से 2014 तक के छात्रों की डिग्री का मामला सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन है, जिसकी सुनवाई 8 नवंबर को है। डिग्री अधर में होने के कारण छात्र पिछले एक साल से हॉस्टल की फीस नहीं दे पा रहे हैं। छात्रों का तर्क है कि कोई भी बैंक उन्हें फीस के लिए लोन देने को तैयार नहीं है। हॉस्टल फीस को लेकर पहले भी कई बार विवाद खड़ा हो चुका है।
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अब एक बार फिर से प्रबंधन की तरफ से नोटिस जारी किया है। छात्रों को चेतावनी दी गई है कि उन्हें हर हाल में फीस देनी होगी, यदि वह फीस नहीं देंगे तो हॉस्टल से बाहर निकलना होगा। इस चेतावनी के बाद छात्र असमंजस में हैं। आखिर वह जाएं तो कहां जाएं। छात्र संदीप प्रियदर्शी का कहना है कि जब तक डिग्री के मामले का समाधान नहीं होगा, कोई बैंक लोन नहीं देगा। अब ऐसे में प्रबंधन भी नोटिस पर नोटिस जारी कर रहा है। प्रबंधन की गलती का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। इस मामलों को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
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अप्रैल में हड़ताल पर रहे थे छात्र
इसी मसले पर प्रबंधन और छात्रों के बीच अप्रैल माह में भी विवाद हुआ था। उस समय छात्रों ने कई दिनों तक क्लास का बहिष्कार कर हड़ताल की थी। उस समय भी इसका कोई समाधान नहीं हो सका था और मामला दब गया था। अब एक बार फिर से फीस का यह मुद्दा उठा है।
बिना फीस के हॉस्टल चलाना संभव नहीं
डिग्री का मामला विचाराधीन है। इस कारण छात्रों से फिलहाल पढ़ाई की फीस नहीं ले रहे हैं, लेकिन हॉस्टल आउट सोर्स पर चलता है, जिसकी फीस देनी होगी। कुछ दिन पहले एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के सामने छात्रों ने फीस देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक भी फीस जमा नहीं कराई। बिना फीस के आउट सोर्स पर हॉस्टल चलाने में प्रबंधन सक्षम नहीं है। इसी वजह से नोटिस दिए गए हैं।
- अतुल अस्थाना, सेंटर इंचार्ज रोहतक।