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नहीं फंसा बंदर तो एक दिन में ही हटाया पिंजरा
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nv 5 yesterday photo wich probe to monkey cabe
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इंद्रप्रस्थ कॉलोनी दो दिन पूर्व बंदरों के झूंड ने शुक्रवार को एक बच्चे को काट लिया था। उसके बाद कॉलोनीवासियों ने निगम में घटना से अवगत करवाया तो बंदर पकड़ने वाली टीम ने उसी दिन पिंजरा लगा दिया। मगर जब पिंजरे में जब एक भी बंदर नहीं फंसा तो टीम ने वहां से पिंजरा हटा दिया। सफाई निरीक्षक का कहना है कि जब पिंजरे में एक भी बंदर नहीं फंसा तो क्या हटाते नहीं? वहीं, चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर का कहना है कि मुझे तो नहीं पता पिंजरा हटा दिया है। दोबारा से लगवा देंगे।
शीला बाईपास के नजदीक इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में बंदरों का काफी आतंक है। जिसके चलते कॉलोनी के बच्चों का घर के बाहर खेलना बंद हो गया है। लोग खाने-पीने का सामना सुरक्षित लेकर घर नहीं पहुंच पाते हैं। जरा सी चूक होने पर बंदर झपट्टा मारकर ले जाते हैं। कॉलोनी के लोगों का आरोप है कि कई बार नगर निगम अफसरों से बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए गुहार लगाई गई मगर कुछ नहीं हुआ। शुक्रवार को खेल रहे एक तीन साल के बच्चे को बंदरों ने सिर में काट कर घायल कर दिया। इस पर जब कालोनी के लोगों ने निगम में फोन कर रोष जताया तो बंदरों को पकड़ने वाली टीम पिंजरा लेकर पहुंची। टीम ने पिंजरा पार्क अथवा खुले स्थान पर लगाने के बजाये एक चारदीवारी के अंदर लगा दिया, जिसमें छोटा कारखाना चलता है। चारदीवारी से घिरे संकरे स्थान पर जब पिंजरे के अंदर एक भी बंदर नहीं फंसा तो टीम उसे उठाकर ले गई। टीम का मानना है कि कॉलोनी में एक भी बंदर नहीं है। जब इस मामले में नगर निगम की सेनेटरी इंस्पेक्टर सुंदर से बात की गई तो उनका कहना है कि जब पिंजरे में बंदर नहीं फंसा तो क्या करते उसको हटाते ही? जब उनसे पूछा गया कि अब कॉलोनी में कब दोबारा से पिंजरा लगेगा तो कोई जवाब नहीं दिया। चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर महावीर सिंह का कहना है कि मुझे तो बताया नहीं गया कि इंद्रप्रस्थ कालोनी से पिंजरा हटवा दिया है। यदि ऐसा है तो जल्द दोबारा से लगवा दिया जाएगा।
ये कहना है कॉलोनी के लोगों का
कई बार निगम अफसरों से बंदरों के आतंक से राहत दिलाने के लिए शिकायती पत्र दिए गए। जब बच्चे को बंदरों ने काट लिया तो सिर्फ खानापूर्ति के लिए पिंजरा लगवा दिया।
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-मेहर सिंह नैन पीएचसीए हरियाणा चेयरमैन
बंदरों के आतंक की वजह से बच्चों का घर से निकलना तक बंद हो गया है। जिसकी वजह से बच्चे घरों के अंदर कैद होकर रह गए हैं।
- डॉ. रणवीर दहिया
कॉलोनी में इतना ज्यादा बंदरों का आतंक हो गया है कि कोई भी व्यक्ति खाने-पीने का सामान हाथ में लेकर सुरक्षित अपने घर तक नहीं सकता है।
- जोगेंद्र नैन
पूरी सर्दी निकल गई मगर कपड़े तक खुले में नहीं सुखाए। जब भी धूप में बैठते हैं तो डंडा रखना पड़ता है। अन्यथा बंदर काटने को दौड़ते हैं।
-विरमी देवी
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शीला बाईपास के नजदीक इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में बंदरों का काफी आतंक है। जिसके चलते कॉलोनी के बच्चों का घर के बाहर खेलना बंद हो गया है। लोग खाने-पीने का सामना सुरक्षित लेकर घर नहीं पहुंच पाते हैं। जरा सी चूक होने पर बंदर झपट्टा मारकर ले जाते हैं। कॉलोनी के लोगों का आरोप है कि कई बार नगर निगम अफसरों से बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए गुहार लगाई गई मगर कुछ नहीं हुआ। शुक्रवार को खेल रहे एक तीन साल के बच्चे को बंदरों ने सिर में काट कर घायल कर दिया। इस पर जब कालोनी के लोगों ने निगम में फोन कर रोष जताया तो बंदरों को पकड़ने वाली टीम पिंजरा लेकर पहुंची। टीम ने पिंजरा पार्क अथवा खुले स्थान पर लगाने के बजाये एक चारदीवारी के अंदर लगा दिया, जिसमें छोटा कारखाना चलता है। चारदीवारी से घिरे संकरे स्थान पर जब पिंजरे के अंदर एक भी बंदर नहीं फंसा तो टीम उसे उठाकर ले गई। टीम का मानना है कि कॉलोनी में एक भी बंदर नहीं है। जब इस मामले में नगर निगम की सेनेटरी इंस्पेक्टर सुंदर से बात की गई तो उनका कहना है कि जब पिंजरे में बंदर नहीं फंसा तो क्या करते उसको हटाते ही? जब उनसे पूछा गया कि अब कॉलोनी में कब दोबारा से पिंजरा लगेगा तो कोई जवाब नहीं दिया। चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर महावीर सिंह का कहना है कि मुझे तो बताया नहीं गया कि इंद्रप्रस्थ कालोनी से पिंजरा हटवा दिया है। यदि ऐसा है तो जल्द दोबारा से लगवा दिया जाएगा।
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ये कहना है कॉलोनी के लोगों का
कई बार निगम अफसरों से बंदरों के आतंक से राहत दिलाने के लिए शिकायती पत्र दिए गए। जब बच्चे को बंदरों ने काट लिया तो सिर्फ खानापूर्ति के लिए पिंजरा लगवा दिया।
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-मेहर सिंह नैन पीएचसीए हरियाणा चेयरमैन
बंदरों के आतंक की वजह से बच्चों का घर से निकलना तक बंद हो गया है। जिसकी वजह से बच्चे घरों के अंदर कैद होकर रह गए हैं।
- डॉ. रणवीर दहिया
कॉलोनी में इतना ज्यादा बंदरों का आतंक हो गया है कि कोई भी व्यक्ति खाने-पीने का सामान हाथ में लेकर सुरक्षित अपने घर तक नहीं सकता है।
- जोगेंद्र नैन
पूरी सर्दी निकल गई मगर कपड़े तक खुले में नहीं सुखाए। जब भी धूप में बैठते हैं तो डंडा रखना पड़ता है। अन्यथा बंदर काटने को दौड़ते हैं।
-विरमी देवी

nv 6 today photo which saw there is no cabe.