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Rohtak News: अचार-मुरब्बे से निर्मला ने शुरू किया आजीविका का स्वरोजगार
Thu, 23 Oct 2025 02:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 23 Oct 2025 02:02 AM IST
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21...अचार-मुरब्बे की स्टाॅल दिखातीं ज्योति स्वयं सहायता समूह की सदस्य निर्मला देवी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं होता है। अगर सही दिशा में मेहनत की जाए तो सफलता जरूरत मिल जाती है। सफलता की ऐसी की बानगी जिले के लाखन माजरा की निर्मला देवी पेश कर रही हैं। उन्होंने 2016 में ट्रेनिंग लेकर अचार तैयार करने से आजीविका का स्वरोजगार शुरू किया और अब वह न केवल रोहतक व प्रदेश के अन्य जिलों बल्कि दूसरे प्रदेशों में भी अचार-मुरब्बे की प्रदर्शनी लगाने लगी हैं।
सातवीं तक पढ़ी निर्मला कहती हैं कि उन्होंने वर्ष 2016 में बागवानी विभाग की ओर से करनाल में पहले तो अचार व मुरब्बे बनाने का एक माह तक प्रशिक्षण लिया और फिर इसके बाद काम शुरू कर दिया। निर्मला बताती हैं तो ज्योति स्वयं सहायता समूह से वह 2014 से ही जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने 2017 में स्टाॅल लगाकर अचार-मुरब्बे का काम शुरू किया। अब तक वह रोहतक, फरीदाबाद, कुरुक्षेत्र, गुरुग्राम, पंचकूला, चंडीगढ़, करनाल, नोएडा व दिल्ली में भी अचार व मुरब्बे की प्रदर्शनी लगा चुकी हैं। उनके इस कार्य की सराहना अधिकारी भी करते हैं। इस कार्य में परिवार के सदस्यों ने भी उनका साथ दिया है। इससे उनको हर माह 10 से 12 हजार रुपये की आमदनी हो आती है।
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150 तरह के अचार-मुरब्बे तैयार
उनका दावा है कि वह 150 तरह के अचार, चटनी व मुरब्बे तैयार करती हैं। आंवले से ही वे लड्डू, मुरब्बा, अचार, चटनी, कैंडी व जूस बनाती हैं। मिर्च, आम, नींबू, गाजर, प्याज, ककरोली, हल्दी, अदरक, मेथी व कराेंदे आदि का अचार भी तैयार करती हैं। निर्मला अब हरियाणा से बाहर दूसरे प्रदेशों में भी प्रदर्शनी लगाकर सराहनीय कार्य कर रही हैं।
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रोहतक। मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं होता है। अगर सही दिशा में मेहनत की जाए तो सफलता जरूरत मिल जाती है। सफलता की ऐसी की बानगी जिले के लाखन माजरा की निर्मला देवी पेश कर रही हैं। उन्होंने 2016 में ट्रेनिंग लेकर अचार तैयार करने से आजीविका का स्वरोजगार शुरू किया और अब वह न केवल रोहतक व प्रदेश के अन्य जिलों बल्कि दूसरे प्रदेशों में भी अचार-मुरब्बे की प्रदर्शनी लगाने लगी हैं।
सातवीं तक पढ़ी निर्मला कहती हैं कि उन्होंने वर्ष 2016 में बागवानी विभाग की ओर से करनाल में पहले तो अचार व मुरब्बे बनाने का एक माह तक प्रशिक्षण लिया और फिर इसके बाद काम शुरू कर दिया। निर्मला बताती हैं तो ज्योति स्वयं सहायता समूह से वह 2014 से ही जुड़ी हुई हैं।
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उन्होंने 2017 में स्टाॅल लगाकर अचार-मुरब्बे का काम शुरू किया। अब तक वह रोहतक, फरीदाबाद, कुरुक्षेत्र, गुरुग्राम, पंचकूला, चंडीगढ़, करनाल, नोएडा व दिल्ली में भी अचार व मुरब्बे की प्रदर्शनी लगा चुकी हैं। उनके इस कार्य की सराहना अधिकारी भी करते हैं। इस कार्य में परिवार के सदस्यों ने भी उनका साथ दिया है। इससे उनको हर माह 10 से 12 हजार रुपये की आमदनी हो आती है।
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150 तरह के अचार-मुरब्बे तैयार
उनका दावा है कि वह 150 तरह के अचार, चटनी व मुरब्बे तैयार करती हैं। आंवले से ही वे लड्डू, मुरब्बा, अचार, चटनी, कैंडी व जूस बनाती हैं। मिर्च, आम, नींबू, गाजर, प्याज, ककरोली, हल्दी, अदरक, मेथी व कराेंदे आदि का अचार भी तैयार करती हैं। निर्मला अब हरियाणा से बाहर दूसरे प्रदेशों में भी प्रदर्शनी लगाकर सराहनीय कार्य कर रही हैं।