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Rohtak News: रैन बसेरे फुल, खुले में सो रही जिंदगी

Sun, 31 Dec 2023 01:12 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Sun, 31 Dec 2023 01:12 AM IST
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Night shelters full, life sleeping in the open
रोहतक। कड़ाके की ठंड में आम जनमानस को राहत देने के लिए शहर में बनाए गए रैन बसेरों का प्रवासी और बेसहारा लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। कहीं रैन बसेराें में बेड खाली पड़े हैं, तो कहीं जरूरतमंदों के लिए बेड कम पड़ रहे हैं। अमर उजाला ने रैन बसेरों की पड़ताल की तो कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। रात में मुसाफिर स्टेशन के बाहर फुटपाथ और बैंच पर खुले में सोते मिले।
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शहर में रोडवेज और जन सेवा संस्थान ने रैन बसेरों की व्यवस्था की है। पुराने बस स्टेशन पर जनसेवा केंद्र ने रैन बसेने का इंतजाम किया है। यहां रैन बसेरे की देखरेख कर रहे ओमप्रकाश ने बताया कि अच्छे लोग नहीं आते हैं, जो आते हैं वह नशेड़ी किस्म के होते हैं। ठीक से रहने वाले व्यक्ति को ही यहां पर जगह दी जाती है। ताकि, अन्य लोगों को परेशानी न हो। जबकि नए बस अड्डे पर बने रैन बसेरे में बस के अंदर ही सीटों को हटाकर लोगों के सोने का इंतजाम रोडवेज प्रशासन ने किया है। लेकिन, वहां पर ज्यादा लोग नहीं पहुंच रहे हैं।
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बाक्स
रैन बसेरे के लिए नहीं लगे हैं संकेतक बोर्ड
बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर रैन बसेरे की सुविधा की जानकारी देने के लिए संकेतक बोर्ड तक नहीं लगे हैं। इससे यात्रियों को रैन बसेरे के बारे में जानकारी तक नहीं मिल पाती है। यही वजह है कि बस स्टैंड पर बने रैन बसेरे में ज्यादा यात्री नहीं आ पाते। इससे वहां का रैन बसेरा खाली ही रहता है। हालांकि दोनों रैन बसेरों में खाने पीने की सुविधा से लेकर कंबल तक की पूरी सुविधा दी गई है।
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वर्जन
-बस स्टैंड परिसर में ही दो बसें खड़ी की गई हैं। बसों पर ही बड़े अक्षरों में रैन बसेरा लिखा हुआ है। रोजाना पांच से छह यात्री यहां रुकते हैं। जिन्हें पूरी सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। रैन बसेरे में यात्रियों को ठहराने के लिए अलग से दो लोगों की टीम गठित की गई है। ये लोग स्पेशल निगरानी करते हैं।

-जयवीर हुड्डा, संस्थान प्रबंधक, रोडवेज डिपो
.........
-रोजाना पुराना बस स्टैंड स्थित रैन बसेरे में करीब 30 से 32 लोग आते हैं। खाने-पीने, साने के लिए कंबल और बिस्तर आदि की सुविधा दी गई है। वीआईपी की भी व्यवस्था की गई है, जो कभी कभार आते हैं और जो रोज आते हैं उनके लिए सामान्य व्यवस्था है। बाकी कोई समस्या है तो उसे भी दुरुस्त किया जाएगा।
-स्वामी परमानंद महाराज, संस्थापक जनसेवा संस्थान
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