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‘नेक्स्ट जेनरेशन जीनोम सीक्वेंसर’ बताएगा कोरोना का नया वैरिएंट कितना खतरनाक

Tue, 12 Oct 2021 01:24 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 12 Oct 2021 01:24 AM IST
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'Next Generation Genome Sequencer' will tell how dangerous the new variant of Corona
कोरोना का नया वैरिएंट कितना खतरनाक होगा। हवा-पानी में वायरस की मौजूदगी है या नहीं। इन महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए अब दिल्ली का रुख नहीं करना होगा। ये सब जानकारी एमडीयू देगा। इसके लिए विवि की आर्य भट्ट लैब में नेक्स्ट जेन जीनोम सीक्वेंसिंग प्रयोगशाला का शुभारंभ किया गया है। यहां जीनोम की पहचान के लिए एक करोड़ 20 लाख की लागत से नेक्स्ट जेनरेशन जीनोम सीक्वेंसर उपकरण लाया गया है। इससे वायरस, बैक्टीरिया, फंजाई, जंतु, पादप, मनुष्य जीनोम का अध्ययन व शोध आसान होगा।
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महामारी काल में कोरोना वायरस लगातार रूप बदल आ रहा है। हर बार नए वैरिएंट में सामने आ रहे इस वायरस को पहचानना व उसी के अनुरूप मरीजों को उपचार देना या महामारी से बचाव के उपाय किए जा रहे हैं। प्रदेश में अब तक महामारी का वैरिएंट पता लगाने की सुविधा नहीं थी। इस कारण बार-बार सैंपल दिल्ली की लैब भेजने पड़ रहे थे। अब इस काम के लिए प्रदेश आत्मनिर्भर हो गया है। एमडीयू की लैब में वायरस की पहचान की जा सकेगी। पॉथ संगठन ने रॉकफेलर फाउंडेशन के आर्थिक सहयोग से यही मशीन लैब को मुहैया कराई है। इस मौके पर शोध निदेशक प्रो. एके छिल्लर, डॉ. रीतू गिल, डीन प्रो. नवरतन शर्मा, रजिस्ट्रार प्रो. गुलशन तनेजा, डीन सीडीसी प्रो. एएस मान, कुलपति के सलाहकार प्रो. एके राजन, यूएचएस के रजिस्ट्रार प्रो. एचके अग्रवाल, यूएचएस से प्रो. सुनीता सिंह, सीआईएल निदेशक प्रो. अरुण नंदा, डीन लाइफ साइंसेज प्रो. जेपी यादव, अन्य संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, सीएमओ रोहतक डॉ. जसवंत सिंह पूनिया, डॉ. अरविंद दहिया, एमडीयू के जीव विज्ञान संकाय के प्राध्यापक, विवि के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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पीजीआई के चिकित्सक भी कर सकेंगे काम
एमडीयू की आर्य भट्ट लैब आने वाले दिनों में नए मुकाम हासिल करेगी। खासकर नई जीनोम लैब। यहां आई जीनोम की पहचान करने वाली मशीन पर एमडीयू के प्रोफेसर व शोधार्थी ही काम नहीं कर सकेंगे, बल्कि पीजीआई के चिकित्सक भी सहयोगी के रूप में काम कर पाएंगे।
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जीनोम प्रयोगशाला का रहेगा विशेष महत्व
पीजीआई के पल्मनरी मेडिसिन एवं क्रिटिकल केयर (पीसीसीएम) के विभागाध्यक्ष प्रो. ध्रुव चौधरी ने कहा कि वैश्विक स्वास्थ्य के रुझानों के दृष्टिगत जीनोमिक इपीडिमियोलॉजी में इस प्रयोगशाला का विशेष महत्व रहेगा। हेल्थ यूनिवर्सिटी व एमडीयू मिलकर कोरोना समेत अन्य रोग के डायग्नोसिस व थैरापुयटिक्स में जीनोम सिक्वेंसिंग पर शोध कार्य करेंगे।
बीमारी की पहचान व जीनोम सिक्वेंसिग एक साथ
एमडीयू के बायोकेमिस्ट्री विभाग के प्राध्यापक एवं जीनोम सिक्वेंसिंग प्रोजेक्ट के प्रमुख अन्वेषक डॉ. एनएस चौहान ने जीनोम परियोजना के विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रोग डायग्नोसिस के साथ फोरेंसिक जिनोमिक्स, इनवायरमेंटल जिनोमिक्स, ह्यूमन जिनोमिक्स सीक्वेंसिंग, जंतु व पादप जीनोम सिक्वेंसिंग समेत अनेक जैव एवं चिकित्सीय विज्ञान क्षेत्र में जीनोम सिक्वेंसिंग का उपयोग किया जाएगा।
एमडीयू शोध सुविधा वाला प्रदेश का पहला विवि
पॉथ संस्था के सीनियर प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. मयंक शर्मा ने कहा कि संगठन देश में वैक्सीनेशन, रोग डायग्नोसिस व प्रिवेंटिव हेल्थ इनीशिएटिव्स के लिए कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय में इस दिशा में प्रयोगशाला की स्थापना अहम पहल की है। देश के चार चिकित्सा महाविद्यालयों व वैज्ञानिक संस्थान से इतर एमडीयू पहला विश्वविद्यालय है। यहां अत्याधुनिक शोध सुविधा स्थापित की गई है।

यह प्रयोगशाला वायरस, बैक्टीरिया, फंजाई, जंतु, पादप, मनुष्य जीनोम के अध्ययन व शोध के लिए कार्य करेगी। कोविड-19 महामारी के परिप्रेक्ष्य में जीनोमिक सर्विलांस का महत्व बढ़ा है। ऐसे में जीनोम सीक्वेंसिंग का इस्तेमाल क्लीनिकल डायगनोस्टिक्स में विशेष है। प्राध्यापक जीनोम सीक्वेंसिंग संबंधित उच्च अध्ययन व शोध का उपयोग मानव कल्याण में करें। प्रयोगशाला संबंधित शोध कार्य में पंडित बीडी शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के साथ सहभागिता एवं संयुक्त कार्यक्रम होंगे।
- प्रो. राजबीर सिंह, कुलपति, एमडीयू
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