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नई शिक्षा नीति: एमडीयू में पांच गुना तक बढ़ाई फीस, अब बीएससी की फीस 8592 से 40,660 रुपये हुई

Tue, 28 May 2024 10:12 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 28 May 2024 10:12 PM IST
सार

छात्र संगठनों ने फीस वृद्धि को वापस लेने की आवाज उठाई है। प्रॉस्पेक्टस देखकर युवाओं में गुस्सा आ रहा है। एमडीयू में फीस बढ़ाने पर छात्र संगठन बोले कि शिक्षा का अधिकार छीना जा रहा है। इसको वापस लेने की मांग की जा रही है। 

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New education policy: Fees increased five times in MDU Rohtak
रोहतक एमडीयू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा के रोहतक में स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) ने स्नातक कोर्स में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर प्रॉस्पेक्टस जारी कर दिया है। इसमें नए सत्र से एनईपी (नई शिक्षा नीति) के तहत नए कोर्स शुरू किए गए हैं। कोर्सों की फीस भी पांच गुना बढ़ा दी गई है। स्नातक कोर्स भी अब तीन के बजाय चार साल में पूरा होगा।

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महंगी शिक्षा को लेकर एमडीयू के छात्र संगठनों में रोष पनप रहा है। इसी कड़ी में ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एआईडीएसओ) ने फीस वृद्धि की कड़ी निंदा की है। संगठन ने इसके खिलाफ आंदोलन करने की भी चेतावनी दी है।
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एआईडीएसओ के प्रदेश सचिव उमेश मौर्य ने बताया कि एमडीयू ने बीकॉम और बीएससी की फीस 8592 से 40,660 रुपये व बीए कोर्स की फीस 8522 रुपये से 30,660 रुपये कर दी गई है। यही अकेला कोर्स नहीं है, जिसकी फीस बढ़ाई गई है। प्रॉस्पेक्टस में ऐसे और भी कोर्स दिए गए हैं, जिनकी फीस चार से पांच गुना तक बढ़ाई गई है।
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यह फीस वृद्धि के नाम पर विद्यार्थियों से खुली लूट है। यह एक तरह से यूनिवर्सिटी के दरवाजे आम परिवारों के बच्चों के लिए बंद करने का फरमान है। एमडीयू प्रशासन केंद्र व राज्य सरकार के इशारे पर ऐसे काले कारनामे कर रहा है। यह फीस वृद्धि निसंदेह गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के शिक्षा के अधिकार का हनन है।

एआईडीएसओ के प्रदेश सचिव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू कर स्नातक को तीन साल से बढ़ाकर चार साल कर दिया गया है। फीस वृद्धि और चार साल का ग्रेजुएशन कोर्स शिक्षा के निजीकरण और व्यापारीकरण को बढ़ावा देने के लिए, बड़े कॉर्पोरेट घराने का मुनाफा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। शिक्षा में यह बदलाव शिक्षा को वैश्विक बाजार में खरीद-फरोख़्त की वस्तु में बदल कर इससे अधिकतम मुनाफा लूटने के लिए किया गया है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी में चार वर्षीय स्नातक कोर्स का परीक्षण फेल हो चुका है। कुछ दिन पहले ही कर्नाटक सरकार ने चार वर्षीय स्नातक कोर्स को वापस लिया है। इसके बावजूद यहां सरकार व यूनिवर्सिटी प्रशासन इसे लागू करने पर अड़ा है। एआईडीएसओ 2019 से ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के खिलाफ देश में आंदोलन कर रहा है। इस समय यूनिवर्सिटी और शिक्षा खतरे में है। इसे बचाने की जरूरत है।

फीस बढ़ोतरी को लेकर डीन एकेडमिक को सौंपा ज्ञापन, फीस वृद्धि वापस लेने की मांग की
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय की दाखिला प्रक्रिया का प्रॉस्पेक्टस जारी होते ही विद्यार्थियों के होश उड़ गए हैं। विवि की ओर से फीस में की गई चार से पांच गुणा वृद्धि को लेकर विद्यार्थियों में गुस्सा पनप रहा है। मंगलवार को आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन सीवाईएसएस (छात्र युवा संघर्ष समिति) ने चार गुना फीस बढ़ोतरी के विरोध में दाखिला कमेटी के कन्वीनर एवं एमडीयू के डीन एकडेमिक प्रो. एएस मान को ज्ञापन सौंपा।

समिति के पूर्व अध्यक्ष दीपक धनखड़ ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत विश्वविद्यालय में पांच साल वाले पाठ्यक्रम, जिनमें ग्रेजुएशन व पोस्ट ग्रेजुएशन एक साथ हो जाती थी, उन्हें बंद कर चार साल के पाठ्यक्रम शुरू कर दिए गए हैं। इनमें केवल ग्रेजुएशन होगी। पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए एक साल दाखिला लेना होगा।

नई शिक्षा नीति लागू होने से हर विभाग की फीस चार गुना तक बढ़ गई है। पहले पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स में ग्रेजुएशन व पोस्ट ग्रेजुएशन दोनों हो जाती थी। एमए इकोनॉमिक्स, एमए इंग्लिश, एमए हिस्ट्री, एमएससी गणित, एमए हिंदी, एमए पब्लिक एड कोर्स की फीस सालाना 8500 रुपये थी। अब यह बढ़कर 42 हजार रुपये हो गई है। बीएससी गणित, बीएससी जेनेटिक्स, बीकॉम, बैचलर ऑफ फाइन आर्ट की फीस 8500 रुपये से बढ़कर 40600 रुपये की। बीसीए व होटल मैनेजमेंट की फीस 45000 रुपये से बढ़ाकर 61000 रुपये कर दी गई है। यानी इंटीग्रेटेड कोर्स पांच साल में 50 हजार रुपये में हो जाता था। अब ये कोर्स दो लाख से अधिक फीस देने पर होगा।


छात्र अमन आलड़िया ने कहा कि प्रदेश में दो महीने पहले ओलावृष्टि के कारण किसानों की फसल लगभग नष्ट हो गई थी। फसल नष्ट होने के साथ किसान आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। उनके साथ मजदूर भी खेतों में काम नहीं मिलने से आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। विवि प्रशासन बढ़ाई गई फीस जल्द से वापस ले। ऐसा नहीं होने पर विद्यार्थियों को सड़क पर उतरना पड़ेगा। इस मौके पर साहिल चावरिया, ललित सैनी मौजूद रहे।

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