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Rohtak News: नगर निगम चुनाव... हुड्डा के गढ़ में 12 साल बाद फिर एससी समाज से बनेगा मेयर

Fri, 27 Dec 2024 02:12 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2024 02:12 AM IST
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Municipal Corporation elections... After 12 years in Hooda's stronghold, mayor from SC community will again become mayor.
नगर निगम चुनाव से पहले शहर की सियासत में उठापठक हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के घर रोहतक शहर में 12 साल बाद एससी समाज से मेयर बनेगा। वीरवार को सरकार ने मेयर का पद एससी समाज के लिए आरक्षित कर दिया।
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इससे पहले 2013 में नगर निगम के पहले चुनाव में एससी समाज की महिला पार्षद रेणू डाबला कांग्रेस से मेयर बनी थीं। अब निगम के 3 लाख 18 हजार 822 मतदाता शहर के प्रथम नागरिक का सीधा वोट डालकर चुनाव करेंगे। मेयर का पद आरक्षित होने से कांग्रेस, भाजपा, जजपा व इनेलो सहित दूसरे दलों के नेताओं के अरमानों पर पानी फिर गया है। इसमें सामान्य वर्ग से लेकर बीसी वर्ग तक के मतदाता शामिल हैं।
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प्रदेश कांग्रेस की राजनीति जहां रोहतक से चलती है, वहीं भाजपा का प्रदेश कार्यालय भी रोहतक में ही है। ऐसे में रोहतक नगर निगम मेयर का चुनाव कांग्रेस व भाजपा के लिए बेहद अहम है। 2013 में कांग्रेस की महिला पार्षद रेणू डाबला शहर की पहली मेयर बनीं, जो एससी वर्ग से हैं। हालांकि, बाद में वह भाजपा में शामिल हो गईं और पिछला विधानसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर कलानौर से लड़ा। 2018 में भाजपा के मनमोहन गोयल ऐसे पहले मेयर बने, जिनको सीधा जनता ने वोट डालकर चुना। गोयल पूर्व मंत्री सेठ श्रीकिशन दास के बेटे हैं। नगर निगम का अब 2025 में तीसरा चुनाव होगा, जिसमें शहर के करीब 3 लाख 18 हजार 822 से ज्यादा मतदाता सीधा वोट डालकर चुनाव करेंगे। 15 जनवरी को मतदाता सूची वार्ड वाइज फाइनल हो जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में सरकार 22 वार्ड पार्षद व मेयर का चुनाव करवा सकती है।
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भाजपा से डाबला, सोलंकी तो कांग्रेस से किलोई व बोहत अहम दावेदार
प्रदेश की राजधानी रोहतक शहर की राजनीति में लंबे समय से सामान्य वर्ग का ही दबदबा रहा है। खासकर विधानसभा चुनाव में पंजाबी समुदाय से ही विधायक बनता आ रह है। केवल दो बार पूर्व मंत्री सेठ श्रीकिशनदास गैर पंजाबी विधायक बने। 2010 में प्रदेश की हुड्डा सरकार ने नगर परिषद को भंग करके नगर निगम बना दिया। तीन साल बाद हुए निगम चुनाव में मेयर का पद एससी वर्ग की महिला के लिए आरक्षित किया गया। कांग्रेस समर्थक प्रत्याशी रेनू डाबला, ममता व पूनम किलोई मेयर पद की दावेदार रहीं। हालांकि, बाजी रेणू डाबला ने मारी। 2018 में भाजपा की मनोहर लाल सरकार ने तय किया कि मेयर का चुनाव अब पार्षद नहीं, बल्कि सीधे मतदाता वोट डालकर करेंगे। विधायक से भी बड़े मुकाबले में भाजपा ने बाजी मारी। अब तीसरा मेयर चुनाव 2025 में होगा। भाजपा एससी समाज से आने वाली पूर्व मेयर रेणू डाबला को मैदान में उतार सकती है। डाबला की न केवल पार्टी में पकड़ है, बल्कि पिछला विधानसभा चुनाव कलानौर से लड़ा था। कांग्रेस प्रत्याशी शकुंतला खटक से हार गई थीं, लेकिन नगर निगम के हिस्सा रहे गौकर्ण मंडल में अच्छी वोट हासिल किए थे। उनका आवास हनुमान कॉलोनी भी निगम में आता है। दूसरा, पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के ओएसडी रह चुके पूर्व एचसीएस अधिकारी अमरजीत सोलंकी पर भी पार्टी दावं लगा सकती है। हालांकि, वे इसकी संभावना से इन्कार कर रहे हैं। कांग्रेस में पूर्व पार्षद सूरजमल किलोई को मेयर प्रत्याशी का अहम दावेदार माना जा रहा है। किलोई विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए थे। वह और उनकी पत्नी पूनम किलोई पूर्व पार्षद रह चुकी हैं। कांग्रेस में एससी समाज से राजेश बोहत भी लंबे समय से सक्रिय हैं।
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चौंकाती रही है भाजपा, कांग्रेस में हुड्डा तय करेंगे प्रत्याशी
अक्सर भाजपा चुनाव में प्रत्याशी चयन को लेकर चौंकाती रही है। चाहे प्रदेश अध्यक्ष पद हो या पिछले दिनों हुआ राज्यसभा चुनाव। पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली व पूर्व सांसद संजय भाटिया तक को अहम दावेदार माना जा रहा था, लेकिन पार्टी ने रेखा शर्मा को राज्यसभा में भेजा। रोहतक में मेयर पद का प्रत्याशी कौन होगा, यह प्रदेश नेतृत्व तय करेगा। बताया जा रहा है कि कांग्रेस में रोहतक नगर निगम का मेयर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा तय करेंगे।

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मेयर बनने का सपना नहीं हो सका पूरा, कई नेताओं के अरमान ठंडे बस्ते में
नगर निगम मेयर का पद 2013 में एससी महिला के लिए आरक्षित हुआ था, जबकि 2018 में सामान्य रखा गया था। अब 2025 में उम्मीद थी कि सरकार सामान्य वर्ग की महिला या बीसी वर्ग के लिए आरक्षित कर सकती है। निवर्तमान मेयर मनमोहन गोयल चुनाव लड़ने से मना कर चुके थे।

ऐसे में पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर राजकमल सहगल, विधानसभा चुनाव लेने से चूक गए डॉक्टर आदित्य बतरा, पूर्व पार्षद अशोक खुराना के अलावा बीसी समाज से पूर्व जिला अध्यक्ष कंवल सिंह सैनी के चुनाव लड़ने की संभावना थी। कांग्रेस से व्यापारी नेता हेमंत बख्शी, पूर्व पार्षद गुलशन ईशपुनियानी, राजीव गुगनानी के अलावा सीताराम सचदेवा के परिवार से कोई महिला या बीसी समाज से पार्टी का नेता मेयर का चुनाव लड़ सकता था, लेकिन एससी वर्ग के लिए मेयर पद आरक्षित होने से शहर की सियासत पलट गई है।

ये वार्ड अनुसार नगर निगम में कुल मतदाता व बूथ

वार्ड पुरुष महिला कुल मतदाता बूथ
01 5945 5127 11072 08
02 7217 6544 13761 12
03 6959 6399 13358 12
04 6447 5916 12363 10
05 7181 6872 14053 13
06 7312 6842 14154 12
07 8442 7972 16414 15
08 7919 7687 15606 14
09 8817 8308 17125 14
10 8152 7495 15647 12
11 6328 5605 11933 12
12 5806 5635 11441 13
13 8208 7831 16039 14
14 8727 8362 17089 16
15 8616 8032 16648 15
16 8244 7790 16034 13
17 8412 7673 16085 15
18 7018 6199 13217 15
19 6105 5428 11533 15
20 8265 7607 15871 14
21 7987 7328 15315 14
22 7425 6639 14064 13
नोट : नगर निगम की मतदाता सूची में आंशिक बदलाव हो सकता है, क्योंकि 15 जनवरी तक मतदाता सूची फाइनल होनी हैं। इसके लिए 31 दिसंबर तक दावे व आपत्ति मांगी गई हैं।
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