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उच्च जोखिम गर्भधारण की निगरानी और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना हों : डीसी
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रोहतक। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने मंगलवार को लघु सचिवालय स्थित सभागार में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की। यहां जिले में चल रहे प्रमुख जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के निर्देश दिए।
उपायुक्त ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए तीन प्रमुख पहलों पर ध्यान दिया जाएगा। इनमें सुरक्षित मातृत्व मिशन के तहत उच्च जोखिम गर्भधारण की निगरानी और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना, प्रथम 1000 दिन पोषण कार्यक्रम के तहत मातृ पोषण सुधारना और कम वजन वाले जन्म को कम करना है।
इसके अलावा, हेल्दी रोहतक पहल के तहत जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की प्रारंभिक पहचान और दीर्घकालिक प्रबंधन करना शामिल है। उन्होंने कहा कि जिले में लिंगानुपात में सुधार के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं व निजी अस्पतालों में गर्भपात कराने वाली महिलाओं को चिह्नित कर उनकी जांच की जाए।
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उपायुक्त ने सभी संस्थागत प्रसव के मामलों में प्रसूता व नवजात को कम से कम 48 घंटे तक स्वास्थ्य संस्थान में निगरानी में रखने के निर्देश दिए। जिले में लगभग 18 प्रतिशत गर्भधारण उच्च जोखिम (हाई रिस्क प्रेग्नेंसी) श्रेणी में आते हैं। यह बेहतर स्क्रीनिंग व्यवस्था का संकेत है।
उपायुक्त ने सभी हाई रिस्क गर्भधारण मामलों की ब्लॉक स्तर पर निगरानी के निर्देश दिए हैं। उन्होंने डेंगू व मलेरिया नियंत्रण पर जोर देते हुए कहा कि मानसून से पहले ही संभावित संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, निगरानी बढ़ाने च जन जागरूकता अभियान चलाया जाए।
सिविल सर्जन डॉ. रमेश चंद्र, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजपाल चहल, जिला न्यायवादी सुरेंद्र पाहवा, डीईओ मनजीत मलिक, डीईईओ दिलजीत सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी दीपिका सैनी, उप सिविल सर्जन टीबी डॉ. विकास, डॉ. सुशीला, डॉ. अनिलजीत त्रेहान, डॉ. विश्वजीत, डॉ. प्रीतेव सिंह, डॉ. दिनेश गर्ग, डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. शिवानी, मनोचिकित्सक डॉ. विनिता आदि मौजूद रहे।
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उपायुक्त ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए तीन प्रमुख पहलों पर ध्यान दिया जाएगा। इनमें सुरक्षित मातृत्व मिशन के तहत उच्च जोखिम गर्भधारण की निगरानी और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना, प्रथम 1000 दिन पोषण कार्यक्रम के तहत मातृ पोषण सुधारना और कम वजन वाले जन्म को कम करना है।
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इसके अलावा, हेल्दी रोहतक पहल के तहत जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की प्रारंभिक पहचान और दीर्घकालिक प्रबंधन करना शामिल है। उन्होंने कहा कि जिले में लिंगानुपात में सुधार के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं व निजी अस्पतालों में गर्भपात कराने वाली महिलाओं को चिह्नित कर उनकी जांच की जाए।
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उपायुक्त ने सभी संस्थागत प्रसव के मामलों में प्रसूता व नवजात को कम से कम 48 घंटे तक स्वास्थ्य संस्थान में निगरानी में रखने के निर्देश दिए। जिले में लगभग 18 प्रतिशत गर्भधारण उच्च जोखिम (हाई रिस्क प्रेग्नेंसी) श्रेणी में आते हैं। यह बेहतर स्क्रीनिंग व्यवस्था का संकेत है।
उपायुक्त ने सभी हाई रिस्क गर्भधारण मामलों की ब्लॉक स्तर पर निगरानी के निर्देश दिए हैं। उन्होंने डेंगू व मलेरिया नियंत्रण पर जोर देते हुए कहा कि मानसून से पहले ही संभावित संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, निगरानी बढ़ाने च जन जागरूकता अभियान चलाया जाए।
सिविल सर्जन डॉ. रमेश चंद्र, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजपाल चहल, जिला न्यायवादी सुरेंद्र पाहवा, डीईओ मनजीत मलिक, डीईईओ दिलजीत सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी दीपिका सैनी, उप सिविल सर्जन टीबी डॉ. विकास, डॉ. सुशीला, डॉ. अनिलजीत त्रेहान, डॉ. विश्वजीत, डॉ. प्रीतेव सिंह, डॉ. दिनेश गर्ग, डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. शिवानी, मनोचिकित्सक डॉ. विनिता आदि मौजूद रहे।