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बहुअकबरपुर में माइनर टूटी, 300 एकड़ फसल डूबी
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 15 Nov 2015 02:22 AM IST
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बहुअकबरपुर में शनिवार अलसुबह काहनौर खास माइनर टूट गई। सुबह होते-होते
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गांव की करीब 300 एकड़ फसल जलमग्न हो गई। किसानों ने तुरंत सिंचाई विभाग के
अधिकारियों को सूचना दी। अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया। हेड से पानी
बंद करवाकर कटान रोकने के लिए मिट्टी की बोरियां भी डलवाईं।
पानी निकलवाने के लिए पंपसेट भी लगवा दिए गए हैं। हलका पटवारी ने भी 200 एकड़ जमीन में पानी भरने की बात स्वीकारी है। सिंचाई विभाग के जेई के अनुसार पेड़ काटने से माइनर की पटरी में कटाव शुरू हुआ, इसी के बाद खेतों में पानी भरा है।
शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर बसे बहुअकबरपुर में शनिवार सुबह तीन बजे काहनौर खास माइनर टूट गई। इससे करीब 300 एकड़ फसल जलमग्न हो गई। पानी भरने से किसी किसान की धान की कटी पड़ी फसल बर्बाद हो गई तो किसी का हाल ही में बोया गया गेहूं तबाह हो गया।
बेमौसम बारिश से गई धान की फसल से आहत किसान अब इस नुकसान को झेलने की स्थिति में नहीं हैं। किसानों ने सरकार से नुकसान की गिरदावरी करवाकर मुआवजे की मांग उठाई है। किसानों ने बताया कि इससे पहले वर्ष 1984 में भी नहर टूटने से लगभग 200 एकड़ फसल बर्बाद हो गई थी।
माइनर टूटने से किसानों की लगभग 200 एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। संबंधित विभाग के अधिकारी से कहकर हेड से माइनर का पानी बंद करवा दिया गया है। एक हजार कट्टे मिट्टी के भरवाकर पानी को रोकने के लिए डलवा दिए गए हैं।
सज्जन कुमार, पटवारी।
किसी ने पेड़ काट दिया जिसके कारण माइनर की पटरी में कटाव शुरू हो गया। इसी कारण फसल जलमग्न हो गई है। रिंढाना हेड से पानी बंद करवा दिया है। मिट्टी के कट्टे भरवाकर कटाव को भरा जा रहा है। पानी निकालने के लिए पंप सेट भी लगवा दिए गए हैं। दो दिन में पानी निकाल दिया जाएगा। किसानों की धान की फसल कट चुकी थी, गेहूं की बिजाई भी ज्यादा नहीं हुई थी।
अनिल कुमार, जेई, सिंचाई विभाग।
पानी निकलवाने के लिए पंपसेट भी लगवा दिए गए हैं। हलका पटवारी ने भी 200 एकड़ जमीन में पानी भरने की बात स्वीकारी है। सिंचाई विभाग के जेई के अनुसार पेड़ काटने से माइनर की पटरी में कटाव शुरू हुआ, इसी के बाद खेतों में पानी भरा है।
शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर बसे बहुअकबरपुर में शनिवार सुबह तीन बजे काहनौर खास माइनर टूट गई। इससे करीब 300 एकड़ फसल जलमग्न हो गई। पानी भरने से किसी किसान की धान की कटी पड़ी फसल बर्बाद हो गई तो किसी का हाल ही में बोया गया गेहूं तबाह हो गया।
बेमौसम बारिश से गई धान की फसल से आहत किसान अब इस नुकसान को झेलने की स्थिति में नहीं हैं। किसानों ने सरकार से नुकसान की गिरदावरी करवाकर मुआवजे की मांग उठाई है। किसानों ने बताया कि इससे पहले वर्ष 1984 में भी नहर टूटने से लगभग 200 एकड़ फसल बर्बाद हो गई थी।
माइनर टूटने से किसानों की लगभग 200 एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। संबंधित विभाग के अधिकारी से कहकर हेड से माइनर का पानी बंद करवा दिया गया है। एक हजार कट्टे मिट्टी के भरवाकर पानी को रोकने के लिए डलवा दिए गए हैं।
सज्जन कुमार, पटवारी।
किसी ने पेड़ काट दिया जिसके कारण माइनर की पटरी में कटाव शुरू हो गया। इसी कारण फसल जलमग्न हो गई है। रिंढाना हेड से पानी बंद करवा दिया है। मिट्टी के कट्टे भरवाकर कटाव को भरा जा रहा है। पानी निकालने के लिए पंप सेट भी लगवा दिए गए हैं। दो दिन में पानी निकाल दिया जाएगा। किसानों की धान की फसल कट चुकी थी, गेहूं की बिजाई भी ज्यादा नहीं हुई थी।
अनिल कुमार, जेई, सिंचाई विभाग।