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Rohtak News: दो बार की वर्ल्ड चैंपियन को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचीं मीनाक्षी हुड्डा, पदक पक्का
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33-रोहतक के रुड़की गांव की बेटी मीनाक्षी हुड्डा। स्रोत : कोच
रोहतक। रोहतक की बेटी और विश्व की नंबर-1 मुक्केबाज मीनाक्षी हुड्डा ने 51 किलो भारवर्ग में अपने प्रदर्शन से एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया। विश्व बॉक्सिंग कप के क्वार्टर फाइनल में मीनाक्षी ने दो बार की वर्ल्ड चैंपियन को हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है और भारत के लिए मेडल पक्का कर दिया है।
चीन के गुइयांग में चल रहे वर्ल्ड बॉक्सिंग कप स्टेज-2 में शुक्रवार को रुड़की के शहीद बैतून सिंह स्टेडियम में अभ्यास करने वाली मीनाक्षी हुड्डा का क्वार्टर फाइनल मैच हुआ। कोच विजय ने बताया कि क्वार्टर फाइनल में मीनाक्षी ने विश्व की नंबर दो खिलाड़ी कजाकिस्तान की अलुआ बाल्कीबेकोवा को मात दी है।
अलुआ कोई सामान्य खिलाड़ी नहीं बल्कि दो बार की वर्ल्ड चैंपियन के साथ-साथ तीन बार की एशियाई चैंपियन रही हैं। दुनिया की सबसे मजबूत और अनुभवी मुक्केबाजों में गिनी जाने वाली अलुआ को रिंग में हराना हर खिलाड़ी का सपना होता है।
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रुड़की की इस बेटी ने दमदार पंच और रणनीति से अलुआ के सारे दांव ध्वस्त कर दिए। इससे गांव में खुशी का माहौल है। यह जीत मीनाक्षी की सालों की मेहनत, अनुशासन और जज्बे का नतीजा है। उन्होंने बताया कि एल 2028 को ध्यान में रखकर 48 किलो से 51 किलो भारवर्ग में बदलने के बाद भी उनका खेल पहले से ज्यादा निखरा है। अगर मीनाक्षी ने इसी लय को बरकरार रखा तो स्वर्ण पदक दूर नहीं।
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चीन के गुइयांग में चल रहे वर्ल्ड बॉक्सिंग कप स्टेज-2 में शुक्रवार को रुड़की के शहीद बैतून सिंह स्टेडियम में अभ्यास करने वाली मीनाक्षी हुड्डा का क्वार्टर फाइनल मैच हुआ। कोच विजय ने बताया कि क्वार्टर फाइनल में मीनाक्षी ने विश्व की नंबर दो खिलाड़ी कजाकिस्तान की अलुआ बाल्कीबेकोवा को मात दी है।
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अलुआ कोई सामान्य खिलाड़ी नहीं बल्कि दो बार की वर्ल्ड चैंपियन के साथ-साथ तीन बार की एशियाई चैंपियन रही हैं। दुनिया की सबसे मजबूत और अनुभवी मुक्केबाजों में गिनी जाने वाली अलुआ को रिंग में हराना हर खिलाड़ी का सपना होता है।
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रुड़की की इस बेटी ने दमदार पंच और रणनीति से अलुआ के सारे दांव ध्वस्त कर दिए। इससे गांव में खुशी का माहौल है। यह जीत मीनाक्षी की सालों की मेहनत, अनुशासन और जज्बे का नतीजा है। उन्होंने बताया कि एल 2028 को ध्यान में रखकर 48 किलो से 51 किलो भारवर्ग में बदलने के बाद भी उनका खेल पहले से ज्यादा निखरा है। अगर मीनाक्षी ने इसी लय को बरकरार रखा तो स्वर्ण पदक दूर नहीं।