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एमडीयू अंक घोटाले का पर्दाफाश, तीन पर एफआईआर
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 04 Nov 2015 02:35 AM IST
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एमडीयू की रिजल्ट ब्रांच में हुए अंक घोटाले का मंगलवार को पर्दाफाश हो गया है।
घोटाले में न सिर्फ रिजल्ट ब्रांच के अधीक्षक, बल्कि यूनिवर्सिटी का एक बर्खास्त कर्मचारी और न्यासा कंपनी का कर्मचारी भी शामिल पाया गया।
वीसी के आदेशों के बाद ब्रांच अधीक्षक सीताराम शर्मा, यूनिवर्सिटी का बर्खास्त कर्मचारी सुदेश गुप्ता और न्यासा कंपनी के कर्मचारी गिरीश के खिलाफ पीजीआई थाने में केस दर्ज किया गया है।
अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
एमडीयू में सितंबर में बीटेक अंक घोटाला सामने आया। छात्रों के अंक जीरो से बढ़ाकर 55 तक किए गए। डीन एकेडमिक अफेयर्स समेत तीन सदस्यीय कमेटी ने घोटाले की जांच की।
इसमें परीक्षा परिणाम शाखा के अधीक्षक सीताराम शर्मा समेत तीन लोगों के नाम सामने आए थे। सीताराम शर्मा को पहले ही सस्पेंड कर दिया गया था।
वीसी सुधीर राजपाल के आदेश के बाद मंगलवार को रिजल्ट ब्रांच के असिस्टेंट रजिस्ट्रार जगमेंद्र मलिक की शिकायत पर तीनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई।
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न्यासा के कर्मचारी की संलिप्ता पर उठे सवाल
- यूनिवर्सिटी के रिजल्ट का पूरा रिकॉर्ड न्यासा के पास ही रहता है। क्या इतने बड़े घोटाले में कंपनी का एक ही कर्मचारी शामिल रहा होगा।
- क्या रिजल्ट तैयार करने के बाद न्यासा का कोई अधिकारी उसे चेक नहीं करता।
- क्या केवल न्यासा के कर्मचारी ही अपनी मर्जी मुताबिक रिजल्ट तैयार कर देते हैं। हालांकि इस आशंका को भी नहीं नकारा जा सकता कि न्यासा का केवल एक ही कर्मचारी शामिल रहा हो।
- क्या न्यासा के आरोपी कर्मचारी के पीछे किसी बड़े अधिकारी का हाथ है। खैर जो भी हो, लेकिन इन हालातों को देखकर तो यही कहा जा सकता है कि यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित हाथों में नहीं है।
रिश्वत के मामले में बर्खास्त है कर्मचारी
यूनिवर्सिटी अधिकारियों के मुताबिक, घोटाले में जिस बर्खास्त कर्मचारी सुदेश गुप्ता का नाम सामने आया है, उसे कई साल पहले रिश्वत के मामले में नौकरी से निकाला जा चुका है।
उस समय वह रजिस्ट्रेशन ब्रांच में कार्यरत था। अब सवाल यह है कि कही बर्खास्त कर्मचारी तभी से तो इस गोरखधंधे में नहीं लगा। बिना डिपार्टमेंट में आए-जाए तो इतने अंदर तक साठगांठ होना मुश्किल है।
अभी इन घोटालों में कार्रवाई होना बाकी
एमडीयू में हाल-फिलहाल में तीन अंक घोटालों छाए हुए हैं। पहला रिजल्ट ब्रांच में हुआ बीटेक घोटाला। दूसरा फर्जीवाड़ा एमडीयू की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में खानपुर यूनिवर्सिटी में हुआ था। इसमें भी खानपुर यूनिवर्सिटी की एक सहायक प्रोफेसर और एमडीयू की गोपनीय शाखा की महिला समेत दो कर्मचारियों के नाम सामने आ चुके हैं। अभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। तीसरा फर्जीवाड़ा पिछले माह यूआईईटी में सामने आया था। यूआईईटी डायरेक्टर ने इस मामले में संबंधित शिक्षक से जवाब मांगा है।
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घोटाले में न सिर्फ रिजल्ट ब्रांच के अधीक्षक, बल्कि यूनिवर्सिटी का एक बर्खास्त कर्मचारी और न्यासा कंपनी का कर्मचारी भी शामिल पाया गया।
वीसी के आदेशों के बाद ब्रांच अधीक्षक सीताराम शर्मा, यूनिवर्सिटी का बर्खास्त कर्मचारी सुदेश गुप्ता और न्यासा कंपनी के कर्मचारी गिरीश के खिलाफ पीजीआई थाने में केस दर्ज किया गया है।
अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
एमडीयू में सितंबर में बीटेक अंक घोटाला सामने आया। छात्रों के अंक जीरो से बढ़ाकर 55 तक किए गए। डीन एकेडमिक अफेयर्स समेत तीन सदस्यीय कमेटी ने घोटाले की जांच की।
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इसमें परीक्षा परिणाम शाखा के अधीक्षक सीताराम शर्मा समेत तीन लोगों के नाम सामने आए थे। सीताराम शर्मा को पहले ही सस्पेंड कर दिया गया था।
वीसी सुधीर राजपाल के आदेश के बाद मंगलवार को रिजल्ट ब्रांच के असिस्टेंट रजिस्ट्रार जगमेंद्र मलिक की शिकायत पर तीनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई।
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न्यासा के कर्मचारी की संलिप्ता पर उठे सवाल
- यूनिवर्सिटी के रिजल्ट का पूरा रिकॉर्ड न्यासा के पास ही रहता है। क्या इतने बड़े घोटाले में कंपनी का एक ही कर्मचारी शामिल रहा होगा।
- क्या रिजल्ट तैयार करने के बाद न्यासा का कोई अधिकारी उसे चेक नहीं करता।
- क्या केवल न्यासा के कर्मचारी ही अपनी मर्जी मुताबिक रिजल्ट तैयार कर देते हैं। हालांकि इस आशंका को भी नहीं नकारा जा सकता कि न्यासा का केवल एक ही कर्मचारी शामिल रहा हो।
- क्या न्यासा के आरोपी कर्मचारी के पीछे किसी बड़े अधिकारी का हाथ है। खैर जो भी हो, लेकिन इन हालातों को देखकर तो यही कहा जा सकता है कि यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित हाथों में नहीं है।
रिश्वत के मामले में बर्खास्त है कर्मचारी
यूनिवर्सिटी अधिकारियों के मुताबिक, घोटाले में जिस बर्खास्त कर्मचारी सुदेश गुप्ता का नाम सामने आया है, उसे कई साल पहले रिश्वत के मामले में नौकरी से निकाला जा चुका है।
उस समय वह रजिस्ट्रेशन ब्रांच में कार्यरत था। अब सवाल यह है कि कही बर्खास्त कर्मचारी तभी से तो इस गोरखधंधे में नहीं लगा। बिना डिपार्टमेंट में आए-जाए तो इतने अंदर तक साठगांठ होना मुश्किल है।
अभी इन घोटालों में कार्रवाई होना बाकी
एमडीयू में हाल-फिलहाल में तीन अंक घोटालों छाए हुए हैं। पहला रिजल्ट ब्रांच में हुआ बीटेक घोटाला। दूसरा फर्जीवाड़ा एमडीयू की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में खानपुर यूनिवर्सिटी में हुआ था। इसमें भी खानपुर यूनिवर्सिटी की एक सहायक प्रोफेसर और एमडीयू की गोपनीय शाखा की महिला समेत दो कर्मचारियों के नाम सामने आ चुके हैं। अभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। तीसरा फर्जीवाड़ा पिछले माह यूआईईटी में सामने आया था। यूआईईटी डायरेक्टर ने इस मामले में संबंधित शिक्षक से जवाब मांगा है।