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Rohtak News: एमडीयू ने अमान्य की प्रोफेसर की डिग्री, न्याय के लिए अदालत जाएंगे प्रोफेसर
Sun, 06 Apr 2025 02:13 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 06 Apr 2025 02:13 AM IST
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चंडीगढ़/रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) ने प्रो. कुलताज सिंह की पीएचडी डिग्री को अमान्य घोषित कर दिया है। विश्वविद्यालय ने उन्हें दी गई प्रोफेसर पद की पदोन्नति समेत अन्य सभी लाभ 5 दिसंबर 2012 से प्रभावी रूप से वापस ले लिए हैं।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सख्त कार्रवाई और अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान एमडीयू ने यह जानकारी शनिवार को कोर्ट में दी। इधर, प्रो. कुलताज सिंह ने विवि के फैसले को लेकर विवि प्रशासन पर दबाव व जल्दबाजी में फैसला लेने का आरोप लगाया है। इसके खिलाफ न्याय के लिए अदालत में अपील की जाएगी।
प्रो. कुलताज सिंह एमडीयू के शारीरिक शिक्षा विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने 5 दिसंबर 2012 को सीएमजे विश्वविद्यालय मेघालय से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की थी। इसी डिग्री के आधार पर उन्हें प्रोफेसर के पद पर पदोन्नत किया गया था और विभागाध्यक्ष भी बनाया गया था। बाद में विभाग के ही एक अन्य प्रोफेसर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर उनकी डिग्री की वैधता और पदोन्नति को चुनौती दी थी।
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याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि सुप्रीम कोर्ट के 13 सितंबर 2013 के आदेश के अनुसार सीएमजे विश्वविद्यालय द्वारा 30 अप्रैल 2013 तक जारी सभी डिग्रियां अवैध घोषित की जा चुकी हैं। इसके अलावा, हरियाणा उच्च शिक्षा निदेशालय ने भी ऐसी सभी नियुक्तियों और प्रवेश को रद्द करने के निर्देश दिए हैं, जो सीएमजे विश्वविद्यालय की डिग्रियों के आधार पर हुए हैं। हाईकोर्ट ने 23 नवंबर 2023 को एमडीयू को तीन माह की अवधि में कुलताज सिंह की पीएचडी डिग्री की वैधता पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था, लेकिन विवि ने मामले को लटकाए रखा और ‘यथास्थिति बनाए रखने’ का प्रस्ताव पारित कर दिया।
इसके बाद अवमानना याचिका दायर की गई, जिसमें कहा गया कि एमडीयू का रवैया सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है। हाईकोर्ट ने 3 अप्रैल एमडीयू के रजिस्ट्रार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने के निर्देश दिए और आदेश का पालन 5 अप्रैल तक करने को कहा था। इसके बाद एमडीयू की कार्यकारिणी की बैठक 4 अप्रैल को हुई, जिसमें फैसला लिया गया कि कुलताज सिंह की पीएचडी डिग्री अमान्य की जाएगी।
विवि ने दबाव और जल्दबाजी में दिया फैसला
एमडीयू प्रशासन ने मेरी पीएचडी डिग्री को लेकर दबाव व जल्दबाजी में फैसला लिया है। संभवत: मेरे पक्ष में फैसला लिया जाना था, मगर किन्हीं कारणों से फैसला मेरे विपरीत लिया गया है। यही नहीं, विवि ने इस फैसले से पहले न तो कोई नोटिस दिया और न ही मुझे बुलाया। मेरी डिग्री अमान्य नहीं है। यह पूरी तरह सही है। इसकी एक बार नहीं, 15 बार जांच हो चुकी है। विवि इस तरह मेरे पदोन्नति लाभ वापस नहीं ले सकता है। न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाऊंगा।
- प्रो. कुलताज सिंह, शारीरिक शिक्षा विभाग, एमडीयू।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सख्त कार्रवाई और अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान एमडीयू ने यह जानकारी शनिवार को कोर्ट में दी। इधर, प्रो. कुलताज सिंह ने विवि के फैसले को लेकर विवि प्रशासन पर दबाव व जल्दबाजी में फैसला लेने का आरोप लगाया है। इसके खिलाफ न्याय के लिए अदालत में अपील की जाएगी।
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प्रो. कुलताज सिंह एमडीयू के शारीरिक शिक्षा विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने 5 दिसंबर 2012 को सीएमजे विश्वविद्यालय मेघालय से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की थी। इसी डिग्री के आधार पर उन्हें प्रोफेसर के पद पर पदोन्नत किया गया था और विभागाध्यक्ष भी बनाया गया था। बाद में विभाग के ही एक अन्य प्रोफेसर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर उनकी डिग्री की वैधता और पदोन्नति को चुनौती दी थी।
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याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि सुप्रीम कोर्ट के 13 सितंबर 2013 के आदेश के अनुसार सीएमजे विश्वविद्यालय द्वारा 30 अप्रैल 2013 तक जारी सभी डिग्रियां अवैध घोषित की जा चुकी हैं। इसके अलावा, हरियाणा उच्च शिक्षा निदेशालय ने भी ऐसी सभी नियुक्तियों और प्रवेश को रद्द करने के निर्देश दिए हैं, जो सीएमजे विश्वविद्यालय की डिग्रियों के आधार पर हुए हैं। हाईकोर्ट ने 23 नवंबर 2023 को एमडीयू को तीन माह की अवधि में कुलताज सिंह की पीएचडी डिग्री की वैधता पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था, लेकिन विवि ने मामले को लटकाए रखा और ‘यथास्थिति बनाए रखने’ का प्रस्ताव पारित कर दिया।
इसके बाद अवमानना याचिका दायर की गई, जिसमें कहा गया कि एमडीयू का रवैया सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है। हाईकोर्ट ने 3 अप्रैल एमडीयू के रजिस्ट्रार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने के निर्देश दिए और आदेश का पालन 5 अप्रैल तक करने को कहा था। इसके बाद एमडीयू की कार्यकारिणी की बैठक 4 अप्रैल को हुई, जिसमें फैसला लिया गया कि कुलताज सिंह की पीएचडी डिग्री अमान्य की जाएगी।
विवि ने दबाव और जल्दबाजी में दिया फैसला
एमडीयू प्रशासन ने मेरी पीएचडी डिग्री को लेकर दबाव व जल्दबाजी में फैसला लिया है। संभवत: मेरे पक्ष में फैसला लिया जाना था, मगर किन्हीं कारणों से फैसला मेरे विपरीत लिया गया है। यही नहीं, विवि ने इस फैसले से पहले न तो कोई नोटिस दिया और न ही मुझे बुलाया। मेरी डिग्री अमान्य नहीं है। यह पूरी तरह सही है। इसकी एक बार नहीं, 15 बार जांच हो चुकी है। विवि इस तरह मेरे पदोन्नति लाभ वापस नहीं ले सकता है। न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाऊंगा।
- प्रो. कुलताज सिंह, शारीरिक शिक्षा विभाग, एमडीयू।