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बगैर परीक्षा दिए नहीं पास होंगे एमबीबीएस के विद्यार्थी
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बीडीएस की तरह बगैर परीक्षा दिए एमबीबीएस के विद्यार्थी अगले सत्र में नहीं जा पाएंगे। उन्हें प्रेक्टिकल क्लास पूरी करने के अलावा परीक्षा देनी अनिवार्य होगी। हेल्थ विश्वविद्यालय भले ही इस सेशन को दो से तीन माह लेट कर दें, लेकिन प्रोफेशनल कोर्स में ऐसी छूट नहीं दे सकते। सरकार के जारी निर्देशों पर जब भी प्रेक्टिकल लगाने की अनुमति दी जाएगी तो संस्थान दो माह में प्रेक्टिकल पूरा कराए और एक माह में परीक्षा पूरी करवाएं।
पीजीआईएमएस के रजिस्ट्रार डॉ. एचके अग्रवाल ने बताया कि एमबीबीएस के विद्यार्थियों की परीक्षा को लेकर लंबे समय से मंथन चल रहा था। इसमें सभी हेल्थ विवि के कुलपति व अधिकारियों ने शिरकत की थी। 16 जुलाई को इस पर वेबिनार से हुई बैठक में सभी कुलपति से उनकी राय ली गई थी। गौरतलब है कि प्रदेश में करीब 900 सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में एक सेशन में एमबीबीएस के छात्र हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि थ्योरी की ऑनलाइन क्लास चल रही थी, लेकिन प्रेक्टिकल नहीं हो पा रहा था। अब एमसीआई से निर्देश आ चुके हैं कि एमबीबीएस के विद्यार्थियों की परीक्षा करवाई जाए।
नर्सिंग कॉलेजों में फाइनल ईयर वालों को देनी होगी परीक्षा
पीजीआईएमएस नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. संतोष हुड्डा ने बताया कि उनके यहां फाइनल ईयर वालों को परीक्षा देनी होगी। इसके अलावा अन्य विद्यार्थियों को प्रमोट किया जाएगा। यह नियम प्रदेश भर के नर्सिंग कॉलेजों में लागू होगा। बीएससी नर्सिंग में 1745, 970 पोस्ट बेसिक में दो साल का कार्स व एमएससी नर्सिंग में लगभग 200 विद्यार्थी हैं। तीन साल के आगे वालों के इंटरनल असेसमेंट हो चुके हैं इनके एक और इंटरनल असेसमेंट होंगे। इसमें इनको पास होना अनिवार्य होगा।
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फार्मेसी में फाइनल और 5वें सेमेस्टर की होगी परीक्षा
स्वामी दयानंद पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइेंसेज के प्रिंसिपल डॉ. गजेंद्र ने बताया कि ओड-ईवन में कोर्स चल रहा है। अभी पहला, तीसरा, पांचवां सेमेस्टर रनिंग में नहीं है। इसलिए दूसरा, चौथा, छठे में से ही प्रमोट होंगे। कोविड के कारण पांचवें सेमेस्टर की परीक्षा नहीं हो पाई थी वह अब होगी। प्रदेश में फार्मेसी के 45 कॉलेज हैं और लगभग 10 हजार के करीब छात्र-छात्रा हैं। इस साल फाइनल वालों को ही यह परीक्षा देनी होगी।
डेंटल की चल रही परीक्षाएं
पीजीआईडीएस के प्रिंसिपल डॉ. संजय तिवारी ने बताया कि एमबीबीएस व बीडीएस प्रोफेशनल कोर्स हैं। इसमें बगैर परीक्षा में पास हुए आगे प्रमोट करना संभव नहीं है। हमारी परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं और बाकी जगह भी परीक्षा ली जा रही हैँ। डॉक्टर मरीजों की जान बचाता है, इसके लिए अधिक गहन अध्ययन की जरूरत होती है। इसकी परीक्षा लिए बिना पास करना सही नहीं है।
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पीजीआईएमएस के रजिस्ट्रार डॉ. एचके अग्रवाल ने बताया कि एमबीबीएस के विद्यार्थियों की परीक्षा को लेकर लंबे समय से मंथन चल रहा था। इसमें सभी हेल्थ विवि के कुलपति व अधिकारियों ने शिरकत की थी। 16 जुलाई को इस पर वेबिनार से हुई बैठक में सभी कुलपति से उनकी राय ली गई थी। गौरतलब है कि प्रदेश में करीब 900 सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में एक सेशन में एमबीबीएस के छात्र हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि थ्योरी की ऑनलाइन क्लास चल रही थी, लेकिन प्रेक्टिकल नहीं हो पा रहा था। अब एमसीआई से निर्देश आ चुके हैं कि एमबीबीएस के विद्यार्थियों की परीक्षा करवाई जाए।
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नर्सिंग कॉलेजों में फाइनल ईयर वालों को देनी होगी परीक्षा
पीजीआईएमएस नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. संतोष हुड्डा ने बताया कि उनके यहां फाइनल ईयर वालों को परीक्षा देनी होगी। इसके अलावा अन्य विद्यार्थियों को प्रमोट किया जाएगा। यह नियम प्रदेश भर के नर्सिंग कॉलेजों में लागू होगा। बीएससी नर्सिंग में 1745, 970 पोस्ट बेसिक में दो साल का कार्स व एमएससी नर्सिंग में लगभग 200 विद्यार्थी हैं। तीन साल के आगे वालों के इंटरनल असेसमेंट हो चुके हैं इनके एक और इंटरनल असेसमेंट होंगे। इसमें इनको पास होना अनिवार्य होगा।
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फार्मेसी में फाइनल और 5वें सेमेस्टर की होगी परीक्षा
स्वामी दयानंद पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइेंसेज के प्रिंसिपल डॉ. गजेंद्र ने बताया कि ओड-ईवन में कोर्स चल रहा है। अभी पहला, तीसरा, पांचवां सेमेस्टर रनिंग में नहीं है। इसलिए दूसरा, चौथा, छठे में से ही प्रमोट होंगे। कोविड के कारण पांचवें सेमेस्टर की परीक्षा नहीं हो पाई थी वह अब होगी। प्रदेश में फार्मेसी के 45 कॉलेज हैं और लगभग 10 हजार के करीब छात्र-छात्रा हैं। इस साल फाइनल वालों को ही यह परीक्षा देनी होगी।
डेंटल की चल रही परीक्षाएं
पीजीआईडीएस के प्रिंसिपल डॉ. संजय तिवारी ने बताया कि एमबीबीएस व बीडीएस प्रोफेशनल कोर्स हैं। इसमें बगैर परीक्षा में पास हुए आगे प्रमोट करना संभव नहीं है। हमारी परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं और बाकी जगह भी परीक्षा ली जा रही हैँ। डॉक्टर मरीजों की जान बचाता है, इसके लिए अधिक गहन अध्ययन की जरूरत होती है। इसकी परीक्षा लिए बिना पास करना सही नहीं है।