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मनुष्य का एक ही कर्म व धर्म है और वह है मानवता : चैतन्य महाराज
Thu, 28 Mar 2024 09:06 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 28 Mar 2024 09:06 PM IST
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झज्जर। सिद्ध समाधी बाबा प्रसाद गिरी मंदिर में सालाना उत्सव 51वां विराट संत सम्मेलन एवं भंडारा वीरवार को आयोजित किया गया। सबसे पहले समस्त देवताओं का पूजन हवन से प्रारंभ हुआ। पंडित नरेंद्र शास्त्री व पंडित उपेन्द्र शास्त्री द्वारा पूजन हवन कराया गया।
बाबा प्रसाद गिरी महाराज के 51वें वार्षिक उत्सव में काशी विश्वनाथ से पधारे स्वामी नारायण चैतन्य महाराज ने कहा कि धर्म क्या है? जो व्यक्ति अपने जीवन को मानवता की सेवा में समर्पित कर दे, वही सच्चा सेवक है। आज ज्यादातर लोग भौतिक वस्तुओं को पाने के लिए अपना पूरा जीवन व्यतीत कर देते हैं। जब वे इस दुनिया से विदा होते हैं तो वे अपने साथ कुछ भी नहीं ले जा पाते। उनकी सारी कमाई यहीं रह जाती है। अगर वे कोई चीज अपने साथ ले जाते हैं तो वह है उनके अच्छे कर्म और लोगों की दुआएं। उन्होंने कहा कि मनुष्य का एक ही कर्म व धर्म है और वह है मानवता। हम इस दुनिया में इंसान बनकर आए हैं तो सिर्फ इसलिए कि हम मानव सेवा कर सकें। पूरे विश्व में ईश्वर ने हम सभी को एक-सा बनाया है। फर्क बस स्थान और जलवायु के हिसाब से हमारा रंग-रूप, खान-पान और जिंदगी जीने का अलग-अलग तरीका है। इस अवसर पर महामंडलेश्वर अवधूत महंत ब्रह्मस्वरूप महाराज छुड़ानी धाम झज्जर, स्वामी नारायण चैतन्य महाराज, वेदांताचार्य दत्तात्रेय मठ वाराणसी, महेंद्र विश्व रूपानंद गिरी महाराज सूरत, गिरी बांग्ला हरिद्वार, महंत स्वामी ब्रह्मचारी चैतन्य सरस्वती महाराज वेदांताचार्य दादनपुर, महंत समर्पणानंद महाराज, आचार्य अभय देव, महंत उद्धव दास महाराज, उदासीन आश्रम बड़ी संगत शाहपुर बिहार, स्वामी परमआनंद गिरि महाराज करनाल, महामंडलेश्वर देवेंद्र आनंद गिरि महाराज, महंत कृष्णानंद महाराज चेतनानंद आश्रम हरिद्वार, महंत हरी पुरी महाराज झज्जर, महंत चरणदास महाराज त्यागी डबरा मंदिर झज्जर, महंत हरिओम आनंद महाराज दूधेश्वर महादेव मंदिर मनमाड़ महाराष्ट्र, अद्वैत नंद गिरी महाराज मृत्युंजय गिरी महाराज पुजारी मंदिर, महंत आलोक चेतन महाराज वेदांताचार्य हरिद्वार, महंत रमेश गिरी महाराज रूद्र गिरी आश्रम झज्जर, महंत कृष्ण देव महाराज दुल्हेडा, महंत सुदामा देव महाराज मौजूद रहे।
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बाबा प्रसाद गिरी महाराज के 51वें वार्षिक उत्सव में काशी विश्वनाथ से पधारे स्वामी नारायण चैतन्य महाराज ने कहा कि धर्म क्या है? जो व्यक्ति अपने जीवन को मानवता की सेवा में समर्पित कर दे, वही सच्चा सेवक है। आज ज्यादातर लोग भौतिक वस्तुओं को पाने के लिए अपना पूरा जीवन व्यतीत कर देते हैं। जब वे इस दुनिया से विदा होते हैं तो वे अपने साथ कुछ भी नहीं ले जा पाते। उनकी सारी कमाई यहीं रह जाती है। अगर वे कोई चीज अपने साथ ले जाते हैं तो वह है उनके अच्छे कर्म और लोगों की दुआएं। उन्होंने कहा कि मनुष्य का एक ही कर्म व धर्म है और वह है मानवता। हम इस दुनिया में इंसान बनकर आए हैं तो सिर्फ इसलिए कि हम मानव सेवा कर सकें। पूरे विश्व में ईश्वर ने हम सभी को एक-सा बनाया है। फर्क बस स्थान और जलवायु के हिसाब से हमारा रंग-रूप, खान-पान और जिंदगी जीने का अलग-अलग तरीका है। इस अवसर पर महामंडलेश्वर अवधूत महंत ब्रह्मस्वरूप महाराज छुड़ानी धाम झज्जर, स्वामी नारायण चैतन्य महाराज, वेदांताचार्य दत्तात्रेय मठ वाराणसी, महेंद्र विश्व रूपानंद गिरी महाराज सूरत, गिरी बांग्ला हरिद्वार, महंत स्वामी ब्रह्मचारी चैतन्य सरस्वती महाराज वेदांताचार्य दादनपुर, महंत समर्पणानंद महाराज, आचार्य अभय देव, महंत उद्धव दास महाराज, उदासीन आश्रम बड़ी संगत शाहपुर बिहार, स्वामी परमआनंद गिरि महाराज करनाल, महामंडलेश्वर देवेंद्र आनंद गिरि महाराज, महंत कृष्णानंद महाराज चेतनानंद आश्रम हरिद्वार, महंत हरी पुरी महाराज झज्जर, महंत चरणदास महाराज त्यागी डबरा मंदिर झज्जर, महंत हरिओम आनंद महाराज दूधेश्वर महादेव मंदिर मनमाड़ महाराष्ट्र, अद्वैत नंद गिरी महाराज मृत्युंजय गिरी महाराज पुजारी मंदिर, महंत आलोक चेतन महाराज वेदांताचार्य हरिद्वार, महंत रमेश गिरी महाराज रूद्र गिरी आश्रम झज्जर, महंत कृष्ण देव महाराज दुल्हेडा, महंत सुदामा देव महाराज मौजूद रहे।
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