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महाशिवरात्रि कल : चतुर्दशी तिथि रात 9 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगी
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माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। महाशिवरात्रि फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी। महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव शादी के बंधन में बंधे थे। इसलिए इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति को सुख और सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ आठ मार्च को रात में 9 बजकर 57 मिनट पर होगा। अगले दिन 9 मार्च को 6 बजकर 17 मिनट समाप्त होगी। भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व प्रदोष काल में होता है। इसलिए 8 मार्च को ही महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा।
ऐसी मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की और महाशिवरात्रि के दिन ही तपस्या सफल हुई। उनका विवाह भगवान शिव के साथ संपन्न हुआ। महाशिवरात्रि का व्रत महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं।
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पूजा विधि-विधान
महाशिवरात्रि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और गंगाजल मिलाकर स्नान करें। भगवान शिव व माता पार्वती को प्रणाम कर पूजा का संकल्प लें। इसके उपरांत सूर्यदेव को अर्घ्य दें। भगवान शिव को कच्चे दूध, गंगाजल और पंचामृत से ओम नमः शिवाय का जाप करते हुए अभिषेक करें।
सुख-समृद्धि के लिए ये वस्तुएं चढ़ाएं
पंडित सुनील शास्त्री (सामड़) ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और पंचामृत शिवलिंग पर अर्पित करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। भगवान शिव को सबसे प्रिय भांग, धतूरा, फल, मदार के पत्ते, बेलपत्र, पुष्प आदि अर्पित करने से मनोकामना शीघ्र पूर्ण हो जाती है। भगवान शिव पर बिल्व पत्र चढ़ाने से तीन जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। भगवान शिव पर गुड़, शक्कर व शहद से अभिषेक करने पर धन की अपार प्राप्ति होती है। भगवान शिव को मिष्ठान का भोग लगाना चाहिए।
महाशिवरात्रि को सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। इस दिन भक्त महादेव के लिए उपवास रखते हैं। इस दिन सच्ची भक्ति और निष्ठा के साथ व्रत रखने से भगवान शिव अवश्य प्रसन्न होते हैं। साथ ही समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। महाशिवरात्रि का यह पावन दिन हर तरह के शुभ और मांगलिक कार्य करने लिए उत्तम माना जाता है।
महाशिवरात्रि पर चार पहर के शुभ मुहूर्त
रात्रि प्रथम पहर : शाम 6:25 से 9:28 तक
रात्रि द्वितीय पहर : रात्रि 9:28 से 12:31 तक
रात्रि तृतीय पहर : रात्रि 12:31 से 3:34 तक
चतुर्थ पहर : रात्रि 3:34 से सुबह 6:37 तक
निशिता काल मुहूर्त : 12:07 से 12:55 तक
व्रत पारण समय : 06:37 से 03:28 तक
श्रद्धालु करते हैं इन मंत्रों का जाप
इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं। रातभर शिव की भक्ति में लीन रखकर भजन कीर्तन, हर-हर महादेव, बम-बम भोले और महामृत्युंजय मंत्र जाप करते हैं। पंडित सुनील शास्त्री सामड़ ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग से शुभ फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस योग में किया गया कार्य निश्चित रूप से सफल होता है।
मनोकामना और धन प्राप्ति
भगवान शिव पर गन्ने का रस, आक का फूल, धतूरा, कनेर का फूल, मीठा पान, चंदन, इत्र आदि अर्पित करने से धन की प्राप्ति होती है।
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रोहतक। महाशिवरात्रि फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी। महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव शादी के बंधन में बंधे थे। इसलिए इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति को सुख और सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ आठ मार्च को रात में 9 बजकर 57 मिनट पर होगा। अगले दिन 9 मार्च को 6 बजकर 17 मिनट समाप्त होगी। भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व प्रदोष काल में होता है। इसलिए 8 मार्च को ही महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा।
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ऐसी मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की और महाशिवरात्रि के दिन ही तपस्या सफल हुई। उनका विवाह भगवान शिव के साथ संपन्न हुआ। महाशिवरात्रि का व्रत महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं।
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पूजा विधि-विधान
महाशिवरात्रि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और गंगाजल मिलाकर स्नान करें। भगवान शिव व माता पार्वती को प्रणाम कर पूजा का संकल्प लें। इसके उपरांत सूर्यदेव को अर्घ्य दें। भगवान शिव को कच्चे दूध, गंगाजल और पंचामृत से ओम नमः शिवाय का जाप करते हुए अभिषेक करें।
सुख-समृद्धि के लिए ये वस्तुएं चढ़ाएं
पंडित सुनील शास्त्री (सामड़) ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और पंचामृत शिवलिंग पर अर्पित करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। भगवान शिव को सबसे प्रिय भांग, धतूरा, फल, मदार के पत्ते, बेलपत्र, पुष्प आदि अर्पित करने से मनोकामना शीघ्र पूर्ण हो जाती है। भगवान शिव पर बिल्व पत्र चढ़ाने से तीन जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। भगवान शिव पर गुड़, शक्कर व शहद से अभिषेक करने पर धन की अपार प्राप्ति होती है। भगवान शिव को मिष्ठान का भोग लगाना चाहिए।
महाशिवरात्रि को सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। इस दिन भक्त महादेव के लिए उपवास रखते हैं। इस दिन सच्ची भक्ति और निष्ठा के साथ व्रत रखने से भगवान शिव अवश्य प्रसन्न होते हैं। साथ ही समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। महाशिवरात्रि का यह पावन दिन हर तरह के शुभ और मांगलिक कार्य करने लिए उत्तम माना जाता है।
महाशिवरात्रि पर चार पहर के शुभ मुहूर्त
रात्रि प्रथम पहर : शाम 6:25 से 9:28 तक
रात्रि द्वितीय पहर : रात्रि 9:28 से 12:31 तक
रात्रि तृतीय पहर : रात्रि 12:31 से 3:34 तक
चतुर्थ पहर : रात्रि 3:34 से सुबह 6:37 तक
निशिता काल मुहूर्त : 12:07 से 12:55 तक
व्रत पारण समय : 06:37 से 03:28 तक
श्रद्धालु करते हैं इन मंत्रों का जाप
इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं। रातभर शिव की भक्ति में लीन रखकर भजन कीर्तन, हर-हर महादेव, बम-बम भोले और महामृत्युंजय मंत्र जाप करते हैं। पंडित सुनील शास्त्री सामड़ ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग से शुभ फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस योग में किया गया कार्य निश्चित रूप से सफल होता है।
मनोकामना और धन प्राप्ति
भगवान शिव पर गन्ने का रस, आक का फूल, धतूरा, कनेर का फूल, मीठा पान, चंदन, इत्र आदि अर्पित करने से धन की प्राप्ति होती है।