{"_id":"591b62994f1c1b864bf22879","slug":"late-fees-scam-in-rohtak-rohtak-haryana-education-mdu","type":"story","status":"publish","title_hn":"एमडीयू में लेट फीस के नाम पर बड़ा खेल, मामला उजागर होते मचा हड़कंप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एमडीयू में लेट फीस के नाम पर बड़ा खेल, मामला उजागर होते मचा हड़कंप
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 17 May 2017 02:05 AM IST
विज्ञापन
demo pic
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एमडीयू में लेट फीस माफ करने का बड़ा खेल सामने आया है। यूनिवर्सिटी के दो अधिकारियों ने मिलीभगत करके पलवल स्थित एक कॉलेज के 1033 विद्यार्थियों की करीब पांच लाख रुपये लेट फीस माफ की मंजूरी दे दी। जब इसकी भनक फीस ब्रांच को लगी तो रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी। मामला उजागर होते ही रजिस्ट्रार ने पत्र लिखकर अधिकारियों से जवाब मांगा है। अब बिना उच्च अधिकारियों की जानकारी के एक कॉलेज के विद्यार्थियों की फीस माफ करना सवालों के घेरे में है।
पलवल स्थित एक कॉलेज की तरफ से मार्च में परीक्षा सदन के एक अधिकारी को मेल भेजी गई। इसमें कॉलेज ने बीए, बीकॉम, बीएससी नॉन मेडिकल और एमएससी समेत कई अन्य कोर्सों में पढ़ने वाले 1033 विद्यार्थियों की लेट फीस माफ करने की अपील की थी। परीक्षा सदन के अधिकारी ने यह मामला एक दूसरे विभाग के अधिकारी के पास भेज दिया। इसके बाद कॉलेज के 1033 विद्यार्थियों की पांच लाख 16 हजार 500 रुपये की लेट फीस माफ करने की मंजूरी दे दी गई। कुछ दिन बाद यूनिवर्सिटी की फीस ब्रांच को मामले का पता चला। फीस ब्रांच ने रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर मामले से अवगत कराया। रजिस्ट्रार जितेंद्र भारद्वाज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारी को पत्र जारी किया। इस पत्र के माध्यम से अधिकारी से पूछा गया कि क्या आपको लेट फीस माफ करने का अधिकार है? हालांकि बिना उच्च अधिकारियों के संज्ञान में मामला दिए बिना लेट फीस माफ करने की मंजूरी देना सही है या गलत, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा। अब इस पूरे प्रकरण पर कई सवाल जरूर उठ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं एमडीयू में लेट फीस माफ करने के नाम पर बड़ा खेल तो नहीं हुआ।
रजिस्ट्रार बोले, मामला बाहर कैसे गया
पांच लाख की लेट फीस माफ करने संबंधित दस्तावेज मंगलवार को अमर उजाला को मिल गए। पूरे प्रकरण की जानकारी के लिए रजिस्ट्रार के पास फोन किया गया। फीस माफी का मामला बताते ही रजिस्ट्रार ने कहा कि दो अधिकारियों के बीच की प्राइवेट फाइल का मामला बाहर कैसे पहुंचा। इसका पता कराया जाएगा।
विज्ञापन
यह उठ रहे सवाल
- यदि नियमानुसार फीस माफी की मंजूरी दी गई तो फीस ब्रांच को मामला क्यों नहीं पता था?
- रजिस्ट्रार ने पत्र भेजकर अधिकारियों से जवाब मांगा है तो मतलब उच्च अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं थी?
- फीस माफी को लेकर कई अलग-अलग कैटेगिरी है, लेकिन क्या उसके लिए कुलपति को अवगत कराना जरूरी नहीं है?
विज्ञापन
पलवल स्थित एक कॉलेज की तरफ से मार्च में परीक्षा सदन के एक अधिकारी को मेल भेजी गई। इसमें कॉलेज ने बीए, बीकॉम, बीएससी नॉन मेडिकल और एमएससी समेत कई अन्य कोर्सों में पढ़ने वाले 1033 विद्यार्थियों की लेट फीस माफ करने की अपील की थी। परीक्षा सदन के अधिकारी ने यह मामला एक दूसरे विभाग के अधिकारी के पास भेज दिया। इसके बाद कॉलेज के 1033 विद्यार्थियों की पांच लाख 16 हजार 500 रुपये की लेट फीस माफ करने की मंजूरी दे दी गई। कुछ दिन बाद यूनिवर्सिटी की फीस ब्रांच को मामले का पता चला। फीस ब्रांच ने रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर मामले से अवगत कराया। रजिस्ट्रार जितेंद्र भारद्वाज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारी को पत्र जारी किया। इस पत्र के माध्यम से अधिकारी से पूछा गया कि क्या आपको लेट फीस माफ करने का अधिकार है? हालांकि बिना उच्च अधिकारियों के संज्ञान में मामला दिए बिना लेट फीस माफ करने की मंजूरी देना सही है या गलत, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा। अब इस पूरे प्रकरण पर कई सवाल जरूर उठ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं एमडीयू में लेट फीस माफ करने के नाम पर बड़ा खेल तो नहीं हुआ।
विज्ञापन
रजिस्ट्रार बोले, मामला बाहर कैसे गया
पांच लाख की लेट फीस माफ करने संबंधित दस्तावेज मंगलवार को अमर उजाला को मिल गए। पूरे प्रकरण की जानकारी के लिए रजिस्ट्रार के पास फोन किया गया। फीस माफी का मामला बताते ही रजिस्ट्रार ने कहा कि दो अधिकारियों के बीच की प्राइवेट फाइल का मामला बाहर कैसे पहुंचा। इसका पता कराया जाएगा।
विज्ञापन
यह उठ रहे सवाल
- यदि नियमानुसार फीस माफी की मंजूरी दी गई तो फीस ब्रांच को मामला क्यों नहीं पता था?
- रजिस्ट्रार ने पत्र भेजकर अधिकारियों से जवाब मांगा है तो मतलब उच्च अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं थी?
- फीस माफी को लेकर कई अलग-अलग कैटेगिरी है, लेकिन क्या उसके लिए कुलपति को अवगत कराना जरूरी नहीं है?