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Rohtak News: 135 वर्ष पुरानी बार में लाला लाजपत राय ने भी लड़ा है केस
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01सीटीके11...कोर्ट की स्थापना पर लगाया गया पत्थर। संवाद
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रोहतक। रोहताशगढ़ यानी रोहतक की तरह ही यहां की जिला बार एसोसिएशन का इतिहास भी पुराना व गौरवशाली रहा है। जिले में करीब 135 वर्ष पूर्व स्थापित इस बार के सदस्यों में लाला लाजपत राय भी शामिल रहे हैं। वे आजादी से पहले यहां से केस लड़ चुके हैं। वर्ष 1889 में स्थापित इस एसोसिएशन के सदस्याें में चौधरी छोटूराम, पूर्व मंत्री लहरी सिंह, चौधरी लालचंद भालौठ समेत अनेक नामी अधिवक्ता शामिल रहे हैं। इस बार ने प्रदेश को मुख्यमंत्री से लेकर अनेक विधायक व सांसद दिए हैं।
जिला बार एसोसिएशन के रिकॉर्ड के अनुसार, रोहतक में एसोसिएशन की स्थापना वर्ष 1889 में हुई थी। शुरुआत में 40 सदस्य थे। बाद में संख्या बढ़ती गई और वर्तमान में जिला बार एसोसिएशन के सदस्यों के रूप में करीब 25 हजार अधिवक्ता नामांकित हैं। सब डिविजन महम में एक अलग बार एसोसिएशन है।
रोहतक बार एसोसिएशन सदस्यों के रूप में लंबी सूची है। इसमें चौधरी छोटूराम, पूर्व मंत्री लहरी सिंह, चौधरी लालचंद भालौठ समेत अनेक हस्तियां शामिल हैं। सरदार चंचल सिंह, सरदार वीरेंद्र सिंह सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस, जसवंत सिंह फोगाट, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा विधायक भारत भूषण बतरा, पूर्व सांसद शादीलाल बतरा, पूर्व गृह मंत्री सुभाष बतरा, कैप्टन अभिमन्यु समेत अनेक विधायक व सांसद एसोसिएशन के सदस्य हैं।
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1824 में हुआ था रोहतक जिले का गठन
वर्ष 1824 में रोहतक जिले का गठन गोहाना, खरखौदा-मांडोठी, रोहतक-बेरी और महम-भिवानी तहसीलों को मिलाकर एक अलग इकाई के रूप में किया गया था। यहां एक मार्च 1955 से पहले न्यायिक प्रशासन के लिए रोहतक जिले को करनाल जिले से जोड़ दिया गया था। इस तरह दोनों जिलों के लिए केवल एक जिला एवं सत्र न्यायाधीश की नियुक्ति हुई थी। वकीलों व वादियों के लिए इस व्यवस्था को बोझिल पाते हुए बार ने इसके खिलाफ प्रतिनिधित्व किया। परिणामस्वरूप रोहतक में एक अलग जिला एवं सत्र न्यायाधीश की नियुक्ति हुई।
1955 में रोहतक बना अलग सत्र खंड
रोहतक को 1 मार्च 1955 को एक अलग सत्र खंड घोषित किया गया। ज्वाला दास को रोहतक में प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश व राम गोपाल कोहली को 9 अप्रैल 1959 को रोहतक में वरिष्ठ उप न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों की अदालत बीएस यादव की अध्यक्षता में 28 अगस्त 1967 को रोहतक में स्थापित हुई।
सीनियर व जूनियर डिवीजन की हैं 6-6 अदालतें
जिला एवं सत्र न्यायाधीश की एक अदालत के अलावा, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों की छह अदालतें, सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की छह अदालतें व अतिरिक्त सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की एक अदालत, महम वर्तमान में सत्र डिवीजन रोहतक में कार्यरत हैं। एक श्रम न्यायालय व एक उपभोक्ता न्यायालय भी कार्यरत हैं। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की एक अदालत, सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं के लिए एक स्थायी लोक अदालत की अदालत व एक स्थायी और निरंतर लोक अदालत (समझौता सदन) की अदालत भी इस सत्र डिवीजन में स्थापित की गई है। वे न्यायिक न्यायालय परिसर भवन में कार्यरत हैं। जिला न्यायालय मिनी सचिवालय सोनीपत स्टैंड रोहतक के पास स्थित न्यायिक न्यायालय परिसर भवन में कार्यरत हैं।
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जिला बार एसोसिएशन के रिकॉर्ड के अनुसार, रोहतक में एसोसिएशन की स्थापना वर्ष 1889 में हुई थी। शुरुआत में 40 सदस्य थे। बाद में संख्या बढ़ती गई और वर्तमान में जिला बार एसोसिएशन के सदस्यों के रूप में करीब 25 हजार अधिवक्ता नामांकित हैं। सब डिविजन महम में एक अलग बार एसोसिएशन है।
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रोहतक बार एसोसिएशन सदस्यों के रूप में लंबी सूची है। इसमें चौधरी छोटूराम, पूर्व मंत्री लहरी सिंह, चौधरी लालचंद भालौठ समेत अनेक हस्तियां शामिल हैं। सरदार चंचल सिंह, सरदार वीरेंद्र सिंह सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस, जसवंत सिंह फोगाट, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा विधायक भारत भूषण बतरा, पूर्व सांसद शादीलाल बतरा, पूर्व गृह मंत्री सुभाष बतरा, कैप्टन अभिमन्यु समेत अनेक विधायक व सांसद एसोसिएशन के सदस्य हैं।
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1824 में हुआ था रोहतक जिले का गठन
वर्ष 1824 में रोहतक जिले का गठन गोहाना, खरखौदा-मांडोठी, रोहतक-बेरी और महम-भिवानी तहसीलों को मिलाकर एक अलग इकाई के रूप में किया गया था। यहां एक मार्च 1955 से पहले न्यायिक प्रशासन के लिए रोहतक जिले को करनाल जिले से जोड़ दिया गया था। इस तरह दोनों जिलों के लिए केवल एक जिला एवं सत्र न्यायाधीश की नियुक्ति हुई थी। वकीलों व वादियों के लिए इस व्यवस्था को बोझिल पाते हुए बार ने इसके खिलाफ प्रतिनिधित्व किया। परिणामस्वरूप रोहतक में एक अलग जिला एवं सत्र न्यायाधीश की नियुक्ति हुई।
1955 में रोहतक बना अलग सत्र खंड
रोहतक को 1 मार्च 1955 को एक अलग सत्र खंड घोषित किया गया। ज्वाला दास को रोहतक में प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश व राम गोपाल कोहली को 9 अप्रैल 1959 को रोहतक में वरिष्ठ उप न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों की अदालत बीएस यादव की अध्यक्षता में 28 अगस्त 1967 को रोहतक में स्थापित हुई।
सीनियर व जूनियर डिवीजन की हैं 6-6 अदालतें
जिला एवं सत्र न्यायाधीश की एक अदालत के अलावा, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों की छह अदालतें, सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की छह अदालतें व अतिरिक्त सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की एक अदालत, महम वर्तमान में सत्र डिवीजन रोहतक में कार्यरत हैं। एक श्रम न्यायालय व एक उपभोक्ता न्यायालय भी कार्यरत हैं। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की एक अदालत, सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं के लिए एक स्थायी लोक अदालत की अदालत व एक स्थायी और निरंतर लोक अदालत (समझौता सदन) की अदालत भी इस सत्र डिवीजन में स्थापित की गई है। वे न्यायिक न्यायालय परिसर भवन में कार्यरत हैं। जिला न्यायालय मिनी सचिवालय सोनीपत स्टैंड रोहतक के पास स्थित न्यायिक न्यायालय परिसर भवन में कार्यरत हैं।