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लैब हाईटेक एक्रिडेटेड, जमीन पर बैठकर ढूंढनी पड़ती है रिपोर्ट

Mon, 05 Jul 2021 01:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 05 Jul 2021 01:27 AM IST
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Lab Hi-Tech Accredited, report has to be found sitting on the ground
प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमएस की व्यवस्था लचर बनी हुई है। यहां की लैब भले ही एक्रिडेटेड हो गई है, मगर रिपोर्ट के लिए अब भी मरीजों व उनके सहायकों को भटकना पड़ता है। कागजों में ढेर में माथा पच्ची कर लोगों को अपनी रिपोर्ट ढूंढनी पड़ती है। यह व्यवस्था अपने आपमें संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रही है। इधर, पीजीआई प्रशासन ने बेहतर व्यवस्था होने का दावा किया है।
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पीजीआई में पिछले कुछ वर्षों में काफी कुछ बदलाव हुआ है। मरीजों की भीड़ बढ़ी है। बेहतर इलाज को ध्यान में रखते हुए यहां नए भवन, माड्यूलर ऑपरेशन थियेटर, एसी प्लांट व ऑक्सीजन प्लांट जैसी सुविधाओं में सुधार हुआ है। बस, नहीं बदला है तो लैब से रिपोर्ट मिलने का वर्षों पुराना तरीका। यह वही का वही है। वर्तमान में भी लैब से संस्थान के तय फार्म पर मरीज की स्थिति लिखकर उसे संबंधित संचय केंद्र पर भेज दिया जाता है। यहां कागजी रिपोर्ट का यह ढेर प्लास्टिक की टोकरी में डाल दिया जाता है। इसी ढेर में लोग दिन भर अपनी या अपनों की रिपोर्ट ढूंढते नजर आते हैं। ऐसे में अक्सर या तो रिपोर्ट गुम हो जाती है या कोई दूसरा उसे ले जाता है। नतीजतन मरीज रिपोर्ट के बगैर इलाज तक को तरस जाता है।
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आपात विभाग की लैब के बाहर रहती है भीड़
संस्थान के आपात विभाग की लैब इस अव्यवस्था का बड़ा उदाहरण है। यहां लैब के बाहर मरीजों या उनके सहायकों की भीड़ लगी रहती है। इनमें से कोई रिपोर्ट तलाश रहा होता है तो कोई रिपोर्ट का इंतजार कर रहा होता है। भीड़ में लोग फर्श पर इन रिपोर्ट को दूर तक फैला कर अपना नाम तलाशते हैं।
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निजी लैब से मिलती है कंप्यूटराइज्ड रिपोर्ट
पीजीआई से बाहर निकलते ही अनेक निजी अस्पताल व लैब हैं। यहां भी मरीजों को जांच रिपोर्ट दी जाती है। ये सभी रिपोर्ट कंप्यूटराइज्ड होती हैं। यही नहीं, इस रिपोर्ट को भी सम्मान जनक तरीके से लिफाफे में डालकर दिया जाता है। निजी संस्थाओं की जांच रिपोर्ट की स्पष्टता के चलते संस्थान के चिकित्सक तक इन्हें प्राथमिकता देते हैं।

संस्थान में बेहतर व्यवस्था है। लैब से कंप्यूटराइज्ड रिपोर्ट जारी की जा रही है। साथ ही पुरानी व्यवस्था को भी बनाए रखा गया है। फिर भी कहीं कमी है तो इसे दुरुस्त किया जाएगा।
- डॉ. पुष्पा दहिया, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआईएमएस
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