फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   khel nursery

जिले में 17 स्कूलों की 45 में से 22 खेल नर्सरियां बंद

Wed, 18 Sep 2019 03:06 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 18 Sep 2019 03:06 AM IST
विज्ञापन
khel nursery
रोहतक। जिले में खिलाड़ी व कोच की कमी के चलते 17 स्कूलों की 22 खेल नर्सरियों पर ताला लटक गया है। खेल विभाग द्वारा एक माह तक औचक निरीक्षण के बाद मिली रिपोर्ट पर खेल विभाग पंचकूला ने यह फैसला लिया। विभाग की तरफ से हर माह उक्त खेल नर्सरियों पर करीब 14 लाख 74 हजार रुपये खर्च किए जाने थे। वहीं, जिला खेल कार्यालय से पत्र लिखकर उन स्कूलों से इन अनियमितताओं के प्रति स्पष्टीकरण मांगा गया था। कार्यालय की ओर से भेजे गए इस स्पष्टीकरण पत्र का स्कूलों ने सही से जवाब नहीं दिया। जिसके बाद यह निर्णय लिया गया।
विज्ञापन

जिला खेल अधिकारी सुखबीर सिंह ने बताया कि प्रदेश में खेल को बढ़ावा देने व ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से खेल विभाग की ओर से हर जिले में खेल नर्सरियां शुरू की गई। इसी क्रम में रोहतक जिले में 45 खेल नर्सरियां शुरू की गई। इन खेल नर्सरियों की शुरुआत एक अगस्त से हो गई। इन खेल नर्सरियों का सही रूप से संचालन करने व किसी भी प्रकार का फर्जीवाड़ा होने से रोकने की जिम्मेदारी जिला खेल अधिकारी की थी। उन्होंने बताया कि जिला खेल अधिकारी अपने स्टाफ के साथ मिलकर इन खेल नर्सरियों में हर महीने निरीक्षण करना होता है व किसी भी नर्सरी में तय मानकों के पूरा न होने की कंडीशन में उस खेल नर्सरी को बंद कर उसकी रिपोर्ट विभाग के हेडक्वार्टर को भेजनी होती है। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में उन्होंने अगस्त व सितंबर माह में दो से तीन बार अपने स्टाफ की मदद से हर खेल नर्सरी का निरीक्षण करवाया। जिसमें 22 खेल नर्सरियों में खिलाड़ियों की संख्या कम होना व कोच के न होने जैसी अनियमितता मिली है।
विज्ञापन

खेल नर्सरियों के लिए यूं चयनित हुए थे खिलाड़ी
- डीएसओ सुखबीर सिंह ने बताया कि इन खेल नर्सरियों का हिस्सा बनने के लिए खिलाड़ियों का संबंधित खेल का ट्रायल व बैटरी टेस्ट हुआ था। इस ट्रायल व बैटरी टेस्ट को पास करने वाले खिलाड़ियों की सूची हेडक्वार्टर भेजी गई थी। उसके बाद हेडक्वार्टर की ओर से हर खेल नर्सरी के लिए फाइनल सेलेक्शन किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

ये थी नर्सरी खोलने की शर्तें
खेल नर्सरियों के लिए विभाग के माध्यम से 25 खिलाड़ियों की फाइनल लिस्ट व 25 खिलाड़ियों की वेटिंग लिस्ट तैयार की गई थी। टीम गेम वाली खेल नर्सरियों में हर रोज 20 खिलाड़ी व इंडिविजुअल खेल नर्सरियों में हर रोज 15 खिलाड़ियों की मैदान पर मौजूदगी जरूरी है। इसके अतिरिक्त कोच महीने में एक दिन की छुट्टी कर सकता है। अन्य दिनों में कोच मैदान पर होना चाहिए। विभाग की ओर से हर रोज खिलाड़ियों की मौजूदगी की संख्या से कम खिलाड़ी उपस्थित या कोच अनुपस्थित मिलते हैं तो इन खेल नर्सरियों को बंद करने के निर्देश हैं।
खिलाड़ियों को ये मिलता था लाभ
खेल नर्सरियों में चयनित होने वाले 8 से 14 वर्ष की आयु के खिलाड़ियों को विभाग की ओर से हर महीने 1500 रुपये व 15 से 19 वर्ष के खिलाड़ियों को हर महीने 2000 रुपये डाइट के खर्च के रूप में दिए जाते हैं। इसके अतिरिक्त इन खेल नर्सरियों में खिलाड़ियों को अभ्यास करवाने वाले एनआईएस कोचों को 25000 रुपये प्रतिमाह व प्रमाणपत्र धारी नेशनल खिलाड़ी या शारीरिक शिक्षा से एमए, बीपीएड, एमपीएड वाले कोच को 20 हजार रुपये प्रतिमाह की सैलरी विभाग की ओर से दी जाती है। इसके अतिरिक्त जिस विद्यालय में यह खेल नर्सरी संचालित है, उस विद्यालय को खेल का सामान खरीदने के लिए एक लाख रुपये प्रतिवर्ष दिए जाते हैं।
यूं समझें गणित
एक खेल नर्सरी में 8 से 14 वर्ष के खिलाड़ियों को 1500 रुपये व 15 से 19 वर्ष के खिलाड़ियों को 2000 रुपये प्रतिमाह डाइट के नाम पर दिए जाते हैं। इसके साथ ही एक नर्सरी में खिलाड़ियों की संख्या 25 है। अगर हम एक खिलाड़ी पर औसतन 1800 रुपये प्रतिमाह डाइट खर्च लेते हैं तो 22 खेल नर्सरियों के 25 खिलाड़ी प्रतिमाह के हिसाब से 9 लाख 90 हजार रुपये का खर्च आता है। वहीं इन खेल नर्सरियों में एनआईएस कोर्स वाले कोच को 25000 रुपये प्रतिमाह व सर्टिफिकेट वाले कोच को 20000 रुपये प्रतिमाह के अनुसार वेतन मिलता है। अगर हम एक कोच का औसत वेतन 22000 रुपये लेते हैं तो 22 कोचों के वेतन में 4 लाख 84 हजार रुपये की लागत आती है। इस तरीके से खेल विभाग को इन 22 खेल नर्सरियों द्वारा 14 लाख 74 हजार रुपये प्रतिमाह की चपत लगने से बची है।

संबंधित स्कूलों से मांगा गया था स्पष्टीकरण
जिन स्कूलों में ये खेल नर्सरियां संचालित की जा रही हैं। जिला खेल कार्यालय से पत्र लिखकर उन स्कूलों से इन अनियमितताओं के प्रति स्पष्टीकरण मांगा गया था। कार्यालय की ओर से भेजे गए इस स्पष्टीकरण पत्र का स्कूलों ने सही से जवाब नहीं दिया। इन स्कूलों में से किसी ने खिलाड़ियों की परीक्षा चलने, किसी ने खिलाड़ियों के क्रॉस कंट्री पर जाने तो ने खिलाड़ियों व कोचों के मैदान पर ही उपस्थित होने जैसे जवाब दिए हैं। ऐसे में विभाग ने 22 खेल नर्सरी बंद करने के आर्डर जारी किए हैं।
- सुखबीर सिंह, जिला खेल अधिकारी
स्कूल का नाम खेल लड़के/लड़की
: नवयुग शिक्षा निकेतन स्कूल, मकड़ौली खुर्द तीरंदाजी लड़के
: संस्कार वैली पब्लिक स्कूल, पटवापुर खो-खो लड़कियां
: संस्कार वैली पब्लिक स्कूल, पटवापुर कबड्डी लड़कियां
: मानव रचना ग्लोबल स्कूल, सुनारिया खुर्द एथलेटिक्स लड़कियां
: मानव रचना ग्लोबल स्कूल, सुनारिया खुर्द कबड्डी लड़कियां
: डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल, सुनारिया तीरंदाजी लड़कियां
: राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सुंदरपुर कुश्ती लड़के
: बाबा भगत सिंह हाई स्कूल, कलानौर बॉक्सिंग लड़कियां
: द सनसाइन वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रोहतक कबड्डी लड़कियां
: मार्डन वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, खरकड़ा कबड्डी लड़कियां
: मार्डन वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, खरकड़ा खो-खो लड़कियां
: सैनिक स्कूल, सिंहपुरा कबड्डी लड़के
: राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, मकड़ौली कलां कबड्डी लड़के
: आर्य वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, मदीना (कोरसान) कबड्डी लड़के
: शिक्षा भारती वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रोहतक फुटबाल लड़के
: एसडी पब्लिक स्कूल, बनियानी वुशू लड़के
: एसडी पब्लिक स्कूल, बनियानी वुशू लड़कियां
: वैश्य वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रोहतक बैडमिंटन लड़के
: न्यू विद्या भारती पब्लिक स्कूल, धामड़ नेटबॉल लड़के
: एसआरएम हाई स्कूल, खिड़वाली कुश्ती लड़के
: एसआरएम हाई स्कूल, खिड़वाली कुश्ती लड़कियां
: एसवीएम इंटरनेशनल स्कूल, बालंद नेटबाल लड़कियां
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed