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Rohtak News: कथा व्यास ने सुखदेव जन्म की कथा सुनाई
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18सीटीके29..सुभाष नगर स्थित श्री सनातन धर्म हनुमान मंदिर में श्रीमद् भागवत की कलश यात्रा में म
रोहतक। श्री सनातन धर्म हनुमान मंदिर सुभाष नगर में श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान योग का शुभारंभ हुआ। सुबह कलश यात्रा निकाली गई। आयोजन समाजसेवी जतिन बतरा ने परिवार संग किया। कथा के पहले दिन कथा व्यास राधा प्रिया ज्योति ने सुखदेव के जन्म के बारे में बताया। शुकदेव व्यास ऋषि के अयोनिज पुत्र थे, जिन्होंने महाभारत व पुराणों की रचना की थी। उनका सर तोते का था। प्राचीन काल में श्रुति-परंपरा प्रचलित थी। ग्रंथ रचे जाते थे, ज्ञान व अनुभव उनमें पिरोए जाते थे।
शुकदेव ने अपने पिता से जो महाभारत की कथा सुनी, उसे अर्जुन के पौत्र व अभिमन्यु के पुत्र राजा परीक्षित को सुनाया, ताकि उन्हें ज्ञान मिले, शक्ति मिले, साहस बढ़े और वे मृत्यु से भयभीत न हों। शुकदेव ऋषि व्यास के अयोनिज पुत्र थे। साध्वी ने कथा सुनाई कि एक बार भगवान शिव माता पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे। इसी बीच उनकी नींद का झोंका आया और वे सो गईंं। वहीं एक तोता भी बैठा, उस कथा को सुन रहा था। वह बीच में बोलने लगा। शिवजी ने उसे दंडित करने के लिए, अपना त्रिशूल छोड़ा। तोता जान बचाता व्यास के आश्रम में पहुंचा और सूक्ष्म रूप धारण कर, उनकी पत्नी के मुख में समा कर अंदर चला गया।
वह वहीं डर कर, बारह वर्षों तक छुपा रहा। वहीं उसने वेद-पुराण सभी का ज्ञान सुना और याद कर लिया। बाद में भगवान कृष्ण के आश्वासन पर कि माया का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, वह बाहर निकला और ऋषी व्यास का पुत्र कहलाया। इस मौके पर सनातन धर्म सभा हनुमान मंदिर के प्रधान यशपाल ढींगरा, जनरल सेक्रेटरी अशोक हुड़िया, कोषाध्यक्ष अशोक वर्मा आदि मौजूद रहे।
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शुकदेव ने अपने पिता से जो महाभारत की कथा सुनी, उसे अर्जुन के पौत्र व अभिमन्यु के पुत्र राजा परीक्षित को सुनाया, ताकि उन्हें ज्ञान मिले, शक्ति मिले, साहस बढ़े और वे मृत्यु से भयभीत न हों। शुकदेव ऋषि व्यास के अयोनिज पुत्र थे। साध्वी ने कथा सुनाई कि एक बार भगवान शिव माता पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे। इसी बीच उनकी नींद का झोंका आया और वे सो गईंं। वहीं एक तोता भी बैठा, उस कथा को सुन रहा था। वह बीच में बोलने लगा। शिवजी ने उसे दंडित करने के लिए, अपना त्रिशूल छोड़ा। तोता जान बचाता व्यास के आश्रम में पहुंचा और सूक्ष्म रूप धारण कर, उनकी पत्नी के मुख में समा कर अंदर चला गया।
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वह वहीं डर कर, बारह वर्षों तक छुपा रहा। वहीं उसने वेद-पुराण सभी का ज्ञान सुना और याद कर लिया। बाद में भगवान कृष्ण के आश्वासन पर कि माया का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, वह बाहर निकला और ऋषी व्यास का पुत्र कहलाया। इस मौके पर सनातन धर्म सभा हनुमान मंदिर के प्रधान यशपाल ढींगरा, जनरल सेक्रेटरी अशोक हुड़िया, कोषाध्यक्ष अशोक वर्मा आदि मौजूद रहे।
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