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मौत को मात देकर घर लौटा कर्ण, सेना में जाने की चाह

Tue, 09 Nov 2021 01:45 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 09 Nov 2021 01:45 AM IST
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Karna returned home after defeating death, wanted to join the army
पीजीआई के कार्डियक सर्जरी विभाग में कर्ण। अमर उजाला
मौत को मात देकर नया जीवन पाने वाला कर्ण सोमवार को अपने घर लौट गया। पीजीआई के चिकित्सकों ने जांच के बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर उसे छुट्टी दे दी है। हालांकि अभी कुछ दिन उसे दवा लेने के साथ हाई प्रोटीन डाइट लेनी होगी। साथ ही सांस के व्यायाम भी करने होंगे। घर जाने से पहले परिजनों ने पीजीआई चिकित्सकों को कर्ण को दूसरा जीवन मिलने का श्रेय दिया। कक्षा 11वीं का यह छात्र सेना में भर्ती होकर देश सेवा का सपना संजोए हुए है। हादसे से पहले वह इस सपने को साकार बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था। अमर उजाला से हुई विशेष बातचीत में उसने अपने सपने व हादसे का दर्द साझा किया।
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सोनीपत के गांव भोरा रसूलुपर निवासी कर्ण ने बताया कि 29 अक्तूबर का दिन नहीं भूल पा रहा हूं। अब भी वह दिन याद है। उस दिन बाइक में पेट्रोल भरवाकर घर जा रहा था। रास्ते में एक जुगाड़ वाहन बड़ी मात्रा में सरिये व सीमेंट लेकर सामने से आ रहा था। वह अनियंत्रित हो गया और सीधी बाइक को टक्कर मार दी। जुगाड़ पर खुले सरिये में से दो सीने को चीरते हुए आर-पार निकल गए। यह तो गनीमत रही कि लोगों ने सरिये काटकर मुझे अस्पताल पहुंचा दिया। दिन भर मैं दर्द से कराहता रहा। पहले खानपुर मेडिकल कॉलेज गया, वहां से पीजीआई आया। इस सारी प्रक्रिया में पांच घंटे से अधिक समय लगे। पीजीआई में भी पांच घंटे से ज्यादा ऑपरेशन चला। ऐसे में करीब 10 घंटे से ज्यादा दर्द व तकलीफ के कारण सांसें अटकी रही। यहां डॉक्टरों ने बेहतर इलाज कर मुझे नया जीवन दिया। इसके लिए उनका ऋण कभी नहीं चुका पाऊंगा। वहीं, कर्ण के भाई रोहित ने कहा कि पीजीआई के चिकित्सकों ने सही समय पर पूरी देखभाल की। उन्हीं की बदौलत हमारा भाई हमारे पास सुरक्षित है। इसके लिए उनकी जितनी तारीफ करूं कम है। पीजीआई आने पर राहत मिली। इससे पहले मरीज के इलाज के लिए घंटों इधर-उधर भटकते रहे।
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पता नहीं फिर कब दौड़ पाऊंगा
कर्ण ने बताया कि मुझे सेना में भर्ती होना है। इसलिए अपनी 11वीं कक्षा की पढ़ाई के साथ सेना भर्ती की तैयारी भी कर रहा था। रोजाना सुबह दौड़ लगाता था। अब पता नहीं फिर कब दौड़ पाऊंगा। अपना सपना पूरा करना है। अभी डॉक्टर ने दवा के साथ हाई प्रोटीन लेने की सलाह दी है। साथ ही सांस के व्यायाम बताए हैं। सीने में चोट के बाद सांस की तकलीफ न हो इसके लिए एक उपकरण दिया है। इसमें मुंह से हवा भरनी है। इसके अलावा रोजाना स्टीम लेनी है।
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देर रात ओटी में गए डॉक्टर सुबह 6 बजे निकले
पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर में सीन में लोहे के सरिये धंसे व खून से लथपथ कर्ण को देखकर हर कोई हैरान था। उसे कर्मचारी, नर्स या डॉक्टर जिसने भी देखा उफ कर रहा था। संस्थान के कार्डियक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसएस लोहचब ने उसे देखा व तुरंत टीम से चर्चा कर उसका ऑपरेशन शुरू किया। टीम देर रात कार्डियक सर्जरी के ऑपरेशन थियेटर में गई थी। यहां से सुबह छह बजे बाद ही यह टीम बाहर निकली। रात करीब पांच घंटे मरीज का ऑपरेशन चला। इस दौरान सरिये काट कर निकाले गए। फेफडे़ में आई चार चोटों को स्टैपल किया।

कर्ण के सीने में सरिये धंसे थे। इन्हें निकालकर उसका इलाज किया गया। अब उसका स्वास्थ्य बेहतर है। वह खाना भी खाने लगा है। उसकी सभी रिपोर्ट सामान्य है। इसलिए उसे जांच के बाद छुट्टी दे दी गई है।
- डॉ. एसएस लोहचब, अध्यक्ष, कार्डियक सर्जरी, पीजीआईएमएस
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